कैसे होती है बैलेस्टिक जांच?

दरअसल, बैलेस्टिक जांच दो महत्वपूर्ण बिंदु पर आधारित होती है। एक तो बंदूक से निकली गोली व दूसरी वह बंदूक जिससे गोली दागी गई। दुर्भाग्य से पुलिस के पास दोनों ही नहीं है। अगर मान लिया जाए कि वहां गोली नहीं पटाखे दागे गए थे, तब पटाखा फटने के बाद आसपास फैले कागज भी साइंटिफिक जांच में अहम रोल निभा सकते हैं। राजधानी स्थित एफएसएल (फारेंसिक साइंस लैब) के डायरेक्टर जीएस मार्तोलिया के मुताबिक अगर गोली और गन दोनों लैब के पास हो तो यह पता करना मुश्किल नहीं कि गोली क्या इसी गन से चली है? इसके लिए 48 घंटे का समय लगता है।

गन की सफाई के बाद मुश्किल

जिस गन से गोली चली है अगर उसे गरम पानी से धुलने के बाद गन ऑयल से साफ कर दिया जाए तो किसी भी लैब में नहीं पता किया जा सकता कि गोली किस गन से चली है। कैबिनेट मंत्री के घर हुई फायरिंग के मामले को बीते हुए एक सप्ताह का समय होने वाला है। डायरेक्टर एफएसएल बताते है, फायर आर्म इंजरी के लिए बुलेट और गन की जांच जरूरी है। अगर गन की सफाई नहीं की गई है तो उसमें बारूद की गंध और दागी गई गोली के छोटे पार्टिकिल्स मौजूद रहते है, जिसके आधार पर जांच की जा सकती है।

और क्या है तरीका

आम और खास का फर्क इस हाई प्रोफ्राइल गोलीकांड में साफ तौर पर देखा गया  अगर ये फायरिंग का मामला किसी आम व्यक्ति से जुड़ा होता तब पुलिस के लिए ये पता करना मुश्किल नहीं होता कि किस गन से फायरिंग की गई। इसके लिए गन के मालिक से ये जानना होता कि उसने एक साल में कितनी गोली खरीदी और कितनी फायर की गई। आखिर फायरिंग कब की गई थी और किस उद्देश्य से। जान लेने पर सीन काफी कुछ साफ हो जाता है। मंत्री के घर पर हुई फायरिंग के मामले में पुलिस दून से लेकर विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन के जनपद हरिद्वार के लंढौरा स्थित महल का दौरा कर चुकी है किंतु अभी भी पुख्ता सबूत के  नाम पर हाथ कुछ नहीं लग सका है।

अगर गन और बुलेट दोनों एफएसएल के पास उपलब्ध हो तो जांच करना मुश्किल नहीं कि गोली किस वेपन से चलाई गई। इसमें कम से कम दो दिन और अधिक से अधिक दस दिन का समय लग सकता है।

जीएस मातोर्लिया, डायरेक्टर एफएसएल