देहरादून (ब्यूरो) बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने की प्रक्रिया के तहत चल रही पंच पूजाओं के क्रम में चौथे दिन मुख्य पुजारी रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी ने स्त्री वेश धारण कर माता लक्ष्मी को भगवान बदरी विशाल के साथ गर्भगृह में विराजमान होने का निमंत्रण दिया।

14 नवंबर से शुरू हुईं पंच पूजाएं


बदरीनाथ धाम में में पंच पूजाएं गत 14 नवंबर को शुरू हुई थीं। फस्र्ट डे धाम में स्थित गणेश मंदिर और दूसरे दिन आदि केदारेश्वर मंदिर व आदि शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद किए गए। जबकि, तीसरे दिन खड्ग पुस्तक पूजन के बाद वेद ऋचाओं का वाचन बंद हुआ। इसी क्रम में फ्राइडे को सुबह माता लक्ष्मी को बदरीश पंचायत में विराजित होने का न्योता दिया गया। इस अवसर पर बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा कि मंदिर के कपाट बंद करने की सभी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं।

10 क्विटल फूलों से मंदिर सजाया


कपाट बंद होने के अवसर पर बदरीनाथ धाम के मंदिर को करीब दस ङ्क्षक्वटल फूलों से सजाया गया है। कपाटबंदी का साक्षी बनने के लिए देर शाम तक हजारों की तादात में देश-दुनिया के यात्री धाम पहुंच चुके थी, जो कपाट बंद होने के मौके पर उस पल का गवाह बनेंगे।

शीतकालीन गद्दी पर विराजमान हुए बाबा केदार
दो पड़ावों पर रात्रि प्रवास के बाद फ्राइडे को बाबा केदार अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान हो गए। वहीं, ओंकारेश्वर धाम में बाबा की शीतकालीन पूजाएं शुरू हो गईं। इससे पहले, ओंकारेश्वर धाम पहुंचने पर भक्तों ने बाबा की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली का फूल मालाओं और अक्षत से भव्य स्वागत किया।

चारधाम पहुंचे यात्रियों की संख्या


यमुनोत्री---7,35,244
गंगोत्री---9,05,174
केदारनाथ---19,61,025
बदरीनाथ---18,25,132 (17 नवंबर तक)

बदरीनाथ के कपाट बंद होने का कार्यक्रम
-मंदिर खुलने का समय सुबह चार बजे
-महाभिषेक पूजा साढ़े चार बजे।
-उसके बाद बाल भोग व दर्शन
-11 बजे दिन का राज भोग
-दोपहर 1बजे से शायंकालीन आरती।
-दो बजे लक्ष्मी जी गर्भ गृह में विराजमान
-दोपहर ढाई बजे लगभग से कपाट बंद की प्रक्रिया
-अपराह्न तीन बजकर तैतीस मिनट पर कपाट हो जाएंगे बंद।