- डीआईजी ऑफिस में तैनात शहनवाज अब तक 70 बार कर चुके हैैं ब्लड डोनेट
- प्रदीप भी रक्तदान महादान मिशन पर जुटे हैं, कंचन कोविडकाल में बनी सहारा

देहरादून (ब्यूरो): उन्हीं में से एक हैं उत्तरकाशी निवासी शहनवाज अहमद, चमोली गौचर निवासी प्रदीप नेगी और टिहरी निवासी कंचन गुनसोला। शहनवाज अब तक 70 बार ब्लड डोनेट कर चुके हैैं। प्रदीप नेगी भी रक्तदान को महादान मानते हैैं और लगातार जब भी जरूरत पड़ती है वे ब्लड डोनेट कर दूसरों की जिंदगी बचाने में जुटे हैैं। कंचन गुनसोला कोविडकाल में लोगों का सहारा बनीं।

दिल से आवाज आई, मैं किसी के काम आया
डीआईजी-एसएसपी ऑफिस में तैनात शहनवाज अहमद को हर कोई जानता है। वे 70 बार रक्तदान कर चुके हैैं। उनका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है। वे कहते हैं कि उनके जीवन का उद्देश्य ही दूसरों के जीवन के काम आना है। इसी में सुकून मिलता है। बताया कि जब उन्होंने पहली बार ब्लड डोनेट किया था, तब दिल से आवाज आई थी कि मैं किसी के काम आया।

लोग रक्तवीर कहने लगे
शहनवाज कहते हैं कि जब भी ब्लड डोनेट करते हैं, रिलेक्स फील होता है। कई बार परिवारजन व फ्रेंड्स चिंता भी करते हैं। लेकिन, बदले में उनका पूरा सपोर्ट भी रहता है। शहनवाज का 4 साल का बेटा भी है। वह भी अपने पापा से खुश रहता है। शहनवाज कहते हैं कि अपने बेटे को भी ऐसे नेक काम के लिए प्रेरित करेंगे। पहली पोस्टिंग आईआरबी रामनगर में होने के बार शहनवाज कहते हैं कि ब्लड डोनेशन को लेकर कई भ्रांतियां हैं, लेकिन अनुभव बताता है कि 24 घंटे के भीतर नया ब्लड बनना शुरू हो जाता है। हेल्दी व फिटनेस के लिए ब्लड डोनेशन फिटनेस मंत्रा कहा जा सकता है। शहनवाज कहते हैं कि कई बार उन्हें तब मायूसी हाथ लगती, जब लोग उन्हें कहते हैं कि फेम पाने लिए वह ये करते हैं। जिसका मुझ पर असर नहीं पड़ता। कहते हैं मेरा मकसद, कम से कम 100 बार ब्लड डोनेशन करने का है। 18 वर्ष पहले पुलिस सेवा में शामिल हुए शहनवाज कहते हैं कि वह दिन उनके जीवन का सबसे बड़ा दिन रहा, जब उन्हें जौलीग्रांट हॉस्पिटल में भर्ती 12वर्षीय कैंसर पीडि़त के लिए रमजान का रोजा तोड़कर ब्लड डोनेट करना पड़ा। वे कई वाट्सएप ग्रुप से जुड़े हुए हैं। जहां सूचना मिलती है, दौड़ पड़ते हैं। उनकी इस खासियत के लिए उनको रक्तवीर भी कहा जाने लगा है। वे अब तक रामनगर, नैनीताल, हल्द्वानी और दून शहरों के तमाम हॉस्पिटलों में ब्लड डोनेट कर चुके हैं।

जिस दिन बेटा हुआ, उसी दिन ब्लड डोनेट
डालनवाला कोतवाली में तैनात एसएसआई प्रदीप नेगी भी ब्लड डोनेशन में पीछे नहीं हैं। आजकल जब डेंगू का प्रकोप चल रहा है। लगातार प्लेटलेट्स की कमी शहर में आने लगी है। प्रदीप नेगी हर पल इसके लिए तैयार रहते हैं। वे कहते हैं कि वे जरूरतमंदों को ब्लड डोनेट कर कितना काम आ सकें, उनके प्रयास रहते हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने एक डेंगू के मरीज को अपने प्लेटलेट्स डोनेट किए।

18 बार प्रदीप ने किया ब्लड डोनेट
एसएसआई प्रदीप नेगी बताते हैं कि वर्ष 2006 में जब वे हरिद्वार में पोस्टेड थे। इसी दौरान उनका बेटा हुआ। लेकिन, इसी वक्त किसी को ब्लड की जरूरत पड़ी। उन्होंने अपना ब्लड डोनेट कर दिया। प्रदीप नेगी कहते हैं कि समाज के लिए वे क्या काम आ सकें, क्या दे सकें, इसके लिए वे हर पल तैयार रहते हैं। प्रदीप का कहना है कि ब्लड डोनेशन से आत्म संतुष्टि मिलती है। मेडिकल साइंस भी कहता है कि जितने पर ज्यादा ब्लड डोनेट कर पाएं, उसका फायदा खुद के शरीर को मिलता है। हार्ट अटैक की संभावनाएं कम बनी रहती हैं। हर तीन माह में ब्लड बनना शुरू हो जाता है। एसएसपी प्रदीप ने ब्लड डोनेशन की शुरुआत कोटद्वार पोस्टिंग के दौरान से की। उनके इस काम को देखते हुए बाकी पुलिस विभाग के कर्मचारी भी कदम बढ़ाने लगे। उनकी 13 वर्ष की बेटी और 9 साल के दो ट्विंस बेटे हैं। सभी अपने पापा के नेक काम की सराहना करते हैं।

मेरा मकसद महिलाओं के काम आ सकूं
टिहरी के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रतन सिंह गुनसोला की पुत्रबधु कंचन गुनसोला सोशल एक्टिविस्ट होने के साथ ही महिलाओं व जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा आगे रहा करती हैं। वह अपने जीवन का उद्देश्य भी इसी को मानती हैं। बताती हैं कि कोविडकाल में उन्होंने दून से लेकर चकराता, कालसी और टिहरी तक भूख-प्यास की जंग झेल रहे लोगों के दुख-दर्द में शरीक होने की कोई कसर नहीं छोड़ी। अब भी वह ऐसे लोगों व स्थानों का चिन्हीकरण करती हैं, जहां वे जरूरमंदों की आकांक्षाओं पर खरा उतर सकें।

सीएम राहत कोष में दिए 10 लाख
कंचन सियायत से जुड़े परिवार से ताल्लुक रखती हैं। लेकिन, उनकी राजनीति में कम, सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी में ज्यादा दिलचस्पी है। तैराकी व एथलेटिक्स खेलों में इंट्रेस्ट रखने वाली कंचन वर्तमान में दून एमकेपी कॉलेज प्रबंधन कमेटी में वाइस चेयरमैन पद भी संभाल रही हैं। अपनी कला संस्कृति, बोली-भाषा व पलायन रोकने के लिए हमेशा आगे रहने वाले कंचन ने दून के चकराता, दून के आईएबीटी व टिहरी के कई गांवों तक कोविडकाल में दस्तक की। लोगों को हर प्रकार का सहयोग प्रदान किया। अकेले सरकार को सीएम राहत कोष में 10 लाख रुपए का अंशदान दिया। कंचन गुनसोला के पति राजेश गुनसोला टिहरी स्थित 3 मेगावाट हाइड्रो प्रोजेक्ट के वीसी हैं। लेकिन, कंचन भी पूरा सहयोग देती हैं। वह चाहती हैं कि वे अपने फादर-इन-लॉ के संपनों को साकार कर सके। पशुधन को बचाने के लिए उन्होंने कुछ गाय के बछड़ों को अडॉप्ट किया। हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में स्थानीय महिलाओं व पुरुषों को रोजगार से जोडऩे की कोशिश करती हैं। जिससे पलायन रोका जा सके। जीर्ण-शीर्ण स्कूल को बचाने की मुहिम पर जुटी हुई हैं। वह दून के किमाड़ी पुरकुल क्षेत्र में अनाथ आश्रम खोलने की तैयारी कर रही हैं। जिससे जरूरतमंद लोगों की मदद की जा सके। कंचन नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा गठित महिला शोषण अवरोधक समिति की सदस्य भी रहीं। उन्होंने टिहरी में दो बेटियों को भी गोद लेकर उनकी पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा उठाया है।
dehradun@inext.co.in