ये शहर है अमन का, यहां की फिजा है निराली, यहां पे सब शांति शांति है

इंट्रो

बनारस में बेफिक्री के साथ जिंदगी जीने का अंदाज बिल्कुल नया नहीं। कई आतंकी हमलों और बड़े हादसों के कुछ ही घंटों बाद यहां जिस तरह से जिंदगी पूरी जिंदादिली के साथ दौड़ने लगती है, वो बनारस के मिजाज से अनजान लोगों को हैरान करती है। अयोध्या मामले में फैसले से पहले और फैसले के बाद भी कुछ ऐसा ही रहा। बनारस में फिर एक बार साबित किया कि ये शहर है अमन का, यहां की फिजा है निराली, यहां पे सब शांति-शांति है। ठीक कहे ना गुरु?

शुक्रवार की रात से शनिवार की सुबह तक पूरा देश अयोध्या फैसले के इंतजार में दुबला हुआ पड़ा था। लेकिन बनारस वाले अलग ही मिजाज में मस्त दिखे। फैसला आने से पहले मास्टर साहब और मैम लोग इस बात से खुश थे कि चार दिन की छुट्टी मिली। खुद को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ समझने वाले इस बात से खुश हो गए कि अब कई दिन ज्ञान देने के लिए नया टॉपिक मिल गया। फैसला क्या होगा या फिर फैसला क्या आया? इसकी तो परवाह ही नहीं। फैसले से पहले बनारसी इस बात से खुश थे कि बाजी लगाने का मौका मिला। और बाद में फैसले पर खुशी जताने वालों की जेब से खर्चा कराने का मौका मिला।

'चला लौंगलता खिया दा पाड़े'

शनिवार फैसला आने के साथ टीवी चैनलों पर ब्रेकिंग और बहस की बयार चल पड़ी। लेकिन बनारस में एक अलग ही माहौल था। लहुराबीर स्थित एक फेमस चाय की दुकान पर बैठे मुनव्वर ने जमुना पाण्डेय को देखते ही आवाज दी, का हो पाड़े, चला सबके लौंगलता खिया दा। हो गयल ना तोहरे मन। पाण्डेय जी का जवाब भी जबरा था। गुरु तोहके भी त पांच एकड़ जमीन मिलल हौ, चला अब तू भी समोसा मंगावा। इस बातचीत के बाद वहां बैठे एक ही मोहल्ले के आधा दर्जन लोगों की बैठे-बिठाये पार्टी हो गई।

जिक्र ज्यादा, फिक्र बिल्कुल नहीं

अयोध्या फैसला आने से पहले और आने के बाद बनारस में कहीं कुछ नहीं बदला। ना एक दूसरे को चिकोटी काटना बंद हुआ ना ही एक दूसरे का खर्चा कराने का संकल्प ही टूटा। फैसले का जिक्र तो हर गली-मोहल्ले, चट्टी-चौराहे पर था लेकिन फिक्र किसी को नहीं थी। सड़कों और बाजारों में आम दिनों की तरह हलचल थी। का गुरु-हां गुरु की गूंज रोज की तरह गूंजती रही। कुछ नहीं बदला। सिवाय ट्रैफिक जाम के क्योंकि स्कूल-कॉलेज जो बंद थे। और कुछ बदलना भी नहीं था क्योंकि बनारसी तो यही सोचते हैं कि जो हो गया सो हो गया और जो होना है वो हो कर रहेगा। फिर टेंशन काहे लें?

Posted By: Inextlive

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