क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : रिम्स में मरीज इलाज के लिए आते है ताकि वे ठीक होकर अपने घर लौट सकें. लेकिन हॉस्पिटल में ही लोग बीमारी की चपेट में आ जाएंगे. आखिर हो भी क्यों न जब वार्ड में ही डेंगू-मलेरिया फैलाने का पूरा इंतजाम है. जी हां, रिम्स के मेडिसीन वार्ड डॉ. विद्यापति की यूनिट में कई दिनों से पानी जमा है. जिसमें मच्छरों के लार्वा भी पनप रहे हैं. इसके बावजूद वाटरलॉगिंग को दूर करने को कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या बीमारी फैलने के बाद ही अधिकारियों की नींद खुलेगी.

नहीं आते पीएचईडी वाले

वार्ड में महीने भर से पानी का रिसाव हो रहा है. जिसकी निकासी को लेकर व्यवस्था नहीं की गई है. जबकि पानी से लेकर ड्रेनेज तक की समस्या देखने का काम पीएचईडी का है. इसके लिए उन्हें एक करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान सालाना किया जाता है. फिर भी पीएचईडी के अधिकारी व स्टाफ रिम्स में नहीं आते.

मरीजों को बीमारी बढ़ने का डर

मेडिसीन वार्ड में जहां पानी जमा है वहीं पास में दर्जनों मरीज एडमिट हैं. इसके अलावा नीचे के फ्लोर में ही डेंगू-मलेरिया के मरीजों का इलाज चल रहा है. ऐसे मरीजों को सबसे ज्यादा बीमारी होने का डर सता रहा है. चूंकि उनका इम्युनिटी सिस्टम पहले से ही कमजोर है, जिससे कि बीमारी की चपेट में जल्दी आ जाएंगे.

रेगुलर विजिट का था आदेश

प्रबंधन ने पिछले साल संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर आदेश दिया था कि किसी भी हाल में हॉस्पिटल में वाटरलॉगिंग नहीं होनी चाहिए. इसके साथ ही कार्रवाई करने का भी आदेश दिया था. लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी वाटरलॉगिंग की समस्या से निजात नहीं मिल सकी.