क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : राजधानी रांची में साफ-सफाई हाशिए पर है. पब्लिक प्लेसेज पर गंदगी का अंबार है तो डोर-टू-डोर वेस्ट कलेक्शन पर भी आफत आ रही है. यह किसी एक दिन की बात नहीं बल्कि लंबे समय से यह सिलसिला चलता आ रहा है, लेकिन इसमें लापरवाही बरत रही सफाई एजेंसी आरएमएसडब्ल्यू को 'टर्मिनेट' करने में नगर विकास विभाग से लेकर नगर निगम तक के पसीने छूट रहे हैं. बता दें कि नगर विकास सचिव ने नगर आरएमएसडब्ल्यू को हटाने का निर्देश नगर निगम को दिया था पर इसकी भी अवहेलना कर दी गई. अब तो आरएमएसडब्ल्यू पूरी मनमानी कर रही है. एक हफ्ते से सिटी में सफाई का काम बंद है. फिर भी उसके खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर निगम के अफसर चुप्पी साधे हुए है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि किसकी शह पर सफाई को बार-बार जीवनदान मिल रहा है.

2016 में एजेंसी को कमान

आरएमएसडब्ल्यू ने सिटी में सफाई का काम दो अक्टूबर 2016 को संभाला था. जहां एजेंसी ने धीरे-धीरे वार्डो को कवर करना शुरू किया. इसके बाद एजेंसी को सिटी के 33 वार्डो में सफाई का काम करने का आदेश दिया गया. लेकिन एजेंसी आजतक सभी 53 वार्डो में सफाई की कमान नहीं संभाल पाई है. ऐसे में 20 वार्डो में नगर निगम खुद से कचरे का उठाव करा रहा है. वहीं डोर टू डोर भी रिक्शा और ट्रैक्टरों से कराया जा रहा है.

2017 से कई बार चेतावनी, टर्मिनेशन नोटिस भी

रांची नगर निगम ने आरएमएसडब्ल्यू की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अक्टूबर 2017 में टर्मिनेशन नोटिस दिया था. जिसके तहत एजेंसी को काम सुधारने के लिए तीन महीने का वक्त दिया था. इस दौरान एजेंसी ने काम में सुधार कर दिया. इसके बाद एक-एक महीने का एक्सटेंशन दिया गया. फिर एजेंसी ने पूरे शहर में काम करना शुरू कर दिया. वहीं टर्मिनेशन नोटिस का पीरियड खत्म होते ही एजेंसी वापस अपने रूप में लौट आई.

आरएमसी खुद कर रही है साफ-सफाई

सफाई एजेंसी की मनमानी व लापरवाही को देखते हुए रांची नगर निगम ने सिटी की साफ-सफाई का जिम्मा खुद अपने हाथों में ले लिया है. 24 घंटे सफाई का काम चल रहा है. इसके लिए कई ट्रैक्टर और जेसीबी का इस्तेमाल किया जा रहा है. फिर भी, कई इलाकों में गंदगी बरकरार है. इस बाबत निगम का कहना है कि बैकलॉग को पूरा करने में पांच दिन का और समय लग जाएगा. इस बार सफाई की मॉनिटरिंग जियो टैगिंग से की जा रही है ताकि स्टेटस अधिकारियों को मिलता रहे.