फुटपाथ पर भारी भरकम बैग के साथ मुझे परेशान देख एक बुजुर्ग ने पास आकर जीप रोकी और पूछा, "कहां जाना है? चलो, मैं तुम्हें छोड़ दूं." मेरे दिल में आया, "ये तो पागलपन की हद है.

किसी अजनबी की गाड़ी में कोई ऐसे ही बैठ जाता है क्या?" मगर अजनबी की गाड़ी में न बैठने की सारी हिदायतें याद रहने के बावजूद मैं पिछली सीट पर जा बैठा.

पिछले छह महीने में आइसलैंड की ये मेरी दूसरी यात्रा है. इस बार मैं देश में क्लिक करें अपराध के निम्न स्तर के कारणों की खोजबीन कर रहा था. इस खोजबीन के दौरान यहां के बारे में मेरा नज़रिया बदल गया. मैंने आइसलैंड में जो देखा-सुना, वह मेरे लिए हैरतअंगेज़ था.

भयमुक्त मां-बाप

यहां हिंसा न के बराबर है. अपनी सुरक्षा को लेकर लोग रत्तीभर भी चिंतित नहीं हैं. बच्चों को उनके मां-बाप यूं ही बाहर छोड़ देते हैं. उनकी कोई पहरेदारी नहीं करता. मैं नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क में भी रह चुका हूं. यहां तो अपराध का हाल मत पूछिए.

लोग त्रस्त हैं, हिंसा और तरह-तरह की आपराधिक घटनाओं से. वैसे ईमानदारी से कहूं तो इस बात का मुझे कोई जवाब नहीं मिला कि यहां अपराधों की संख्या लगभग नगण्य क्यों हैं?

2011 के संयुक्त राष्ट्र के ड्रग और क्राइम विभाग (यूएनओडीसी) ने दुनिया भर में हुई हत्या के आंकड़ों पर एक अध्ययन किया है. उसमें ये बात सामने आई कि आइसलैंड में 1999-2009 के बीच के दस सालों में हत्या की दर कभी भी 1.8 प्रतिशत (प्रति 1000,000 जनसंख्या) से ऊपर नहीं गई. जबकि दूसरी ओर अमरीका में उसी दौरान प्रति 100,000 की जनसंख्या पर हत्या की दर 5.0 प्रतिशत से 5.8 प्रतिशत रही.

बराबरी का दर्ज़ा

अपराध बहुत कम होने का पहला और यकीनन सबसे महत्वपूर्ण कारण जो मुझे दिखता है कि वह यह कि यहां क्लिक करें विभिन्न तबकों- उच्च, मध्य और निम्न के बीच अंतर ना के बराबर है.

यही वजह है कि यहां किसी भी तरह का आर्थिक संघर्ष नदारद है. मिसौरी विश्वविद्यालय के मास्टर डिग्री के एक छात्र ने जब आइसलैंड की वर्ग व्यवस्था से संबंधित एक अध्ययन किया तो पाया कि केवल 1.1 प्रतिशत लोग खुद को उच्च वर्ग का मानते हैं जबकि 1.5 प्रतिशत लोगों ने खुद को निम्न वर्ग का माना.

बाक़ी 97 फीसदी लोग खुद को या तो उच्च-मध्य वर्ग या निम्न-मध्य वर्ग या मजदूर वर्ग मानते हैं. आइसलैंड की संसद 'अल्थिंग' में मैं सोशल डेमोक्रेटिक अलायंस के पूर्व अध्यक्ष जोरविन सिगर्डसन से मिला.

आइसलैंड के दूसरे नागरिकों की तरह ही वे भी मानते हैं कि अपराधों के नदारद होने के पीछे बराबरी और समानता का भाव है. जोरविन सिगर्डसन ने बताया, "यहां आपको रुतबेदार उद्योगपतियों के बच्चे भी साधारण बच्चों की तरह ही स्कूल जाते हुए मिल जाएंगे." सिगर्डसन मानते है कि देश में समाज कल्याण और शिक्षा की नीतियों ने भी भेदभाव मुक्त समाज को बढ़ावा दिया.

बंदूकों की भरमार

अपराध की छिटपुट घटनाओं में भी आइसलैंड में कभी गोलियां नहीं चलीं. जबकि यहां बंदूकों की भरमार है. गनपॉलिसी डॉट ओआरजी के अनुसार यहां तीन लाख लोगों के बीच बंदूकों की संख्या करीब नब्बे हज़ार है. इसके अलावा कानूनी रूप से प्रति व्यक्ति बंदूक रखने के मामले में दुनियाभर में आइसलैंड का स्थान 15वां है.

मगर इसका अर्थ यह नहीं कि यहां बंदूक बड़ी आसानी से मिल जाती हैं. बंदूक के लिए लाइसेंस हासिल करने की प्रक्रिया खासी मशक्कत भरी है. इसके लिए एक मेडिकल टेस्ट और लिखित परीक्षा भी देनी पड़ती है. यह अफसर एक खास पुलिस बल ‘वाइकिंग दस्ते’ के साथ रहता है. इन्हें कभी-कभार ही बुलाया जाता है.

ड्रगमुक्त देश

बच्चों की सुरक्षा को लेकर माता पिता आम तौर पर चिंता नहीं करते इसके अलावा आइसलैंड में अन्य देशों के मुकाबले तीव्र प्रभाव वाले ड्रग भी बहुत कम पाए जाते हैं.

यूएनओडीसी की 2012 में जारी रिपोर्ट के अनुसार आइसलैंड में 15 से 64 साल की आयु के बीच के लोगों में कोकीन का इस्तेमाल का रुझान 0.9 फीसदी, एक्सटैसी 0.5 फीसदी और ऐम्फटामाईन्स 0.7 फीसदी ही पाया गया.

फिलहाल, पुलिस अपराध के नेटवर्क को तोड़ने में लगी हुई है और यहां की संसद ‘अल्थिंग’ ऐसे कानूनों को बनाने पर विचार-विमर्श कर रही जो इन नेटवर्कों को ध्वस्त कर के रख दे.

जाहिर है कि अपराध से त्रस्त दुनिया में आइसलैंड को हम एक अनोखे उदाहरण के रुप में देख सकते हैं. आइसलैंड उन सारे देशों को एक राह दिखाता है जो अपराध कम करने के तरीके तलाश कर रहे हैं.

इस बार सुबह-सुबह जब उस बुजुर्ग ने मुझसे बैठने को कहा, मैं बिना सोचे तुरंत जीप में जा बैठा. वह मेरे लिए अजनबी था. मगर मुझे यकीन था कि मैं सुरक्षित हूं.

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