क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : महिला, बाल विकास और समाज कल्याण विभाग की ओर से एक ऐसे एनजीओ को ओपन शेल्टर होम चलाने का लाइसेंस दिया गया, जहां एक भी बच्चे नहीं थे. इस शेल्टर होम का संचालन सीता दीया सेवा संस्थान के द्वारा किया जा रहा है. राजेश सिंह और सीडब्ल्यूसी के कुछ मेंबरों की सिफारिश पर इस एनजीओ के शेल्टर होम के संचालन का लाइसेंस मिला था. डीसी महिमापत रे ने जब इस शेल्टर होम का निरीक्षण किया तो ये खुलासा हुआ. उन्होंने शेल्टर होम का लाइसेंस रद करने की अनुशंसा विभाग से की है.

नॉ‌र्म्स से छेड़छाड़, रिपोर्ट निगेटिव

डीसी के स्तर पर की गई जांच में सीता दीया संस्थान का निगेटिव रिपोर्ट तैयार किया गया है. इसमें बताया गया है कि वर्ष 2017- 2018 में इस एनजीओ को लाइसेंस देने के क्रम में निर्धारित नॉ‌र्म्स को नजरअंदाज कर दिया गया. वहीं, भूसुर में स्थित आशा एनजीओ की जांच सीडब्ल्यूसी ने की थी, तब उसमें भी त्रुटि पाई गई थी., लेकिन इस एनजीओ ने इन गड़बडि़यों को तत्काल दूर कर लिया. दूसरी तरफ ओपन शेल्टर होम कर लिए एक सामाजिक प्रतिनिधि ने आवेदन दिया था, लेकिन उनके आवेदन को नामंजूर कर दिया गया था, जबकि वे सारे अहर्ता को पूरी करते थे.

सालाना 25 लाख का फंड

रांची में दो ओपन शेल्टर होम हैं. एक आशा एनजीओ और दूसरा सीता दीया सेवा संस्थान. इन दोनों को हर साल सरकार की ओर से 25 लाख रुपए का फंड अलॉट किया जाता है. ऐसे में जब शेल्टर होम में बच्चे नहीं हैं तो इस फंड का कहां और कौन इस्तेमाल किया जा रहा है, इसे लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं.

लाइसेंस रद करना होगा अन्याय

एनजीओ की संचालिका सीता दीया ने कहा कि इस साल ही उसे ओपेन शेल्टर होम का लाइसेंस मिला है. जिसे सुव्यवस्थित करने की बात चल ही रही है. वह स्लम बच्चों के लिए कई काम कर चुकी है. ऐसे में उसका लाइसेंस निरस्त होता है तो उसके साथ अन्याय होगा.