पारिवारिक और आर्थिक रूप से हताश हो फांसी के फंदे पर लटकी

मोबाइल की किस्त न चुकाने और दुकान छीनने से परेशान थी विवाहिता

आगरा. थाना ताजगंज स्थित धांधुपुरा में चारों तरफ से हताश हो चुकी एक महिला ने फांसी का फंदा चूम लिया. रविवार को उसका शव रसोई में फंदे पर लटका मिला. मृतका ने चार पेज का सुसाइड नोट छोड़ा है. सुसाइड नोट में उसने परिवार के प्रति नाराजगी व्यक्त की है और आर्थिक दिक्कतों का भी जिक्र किया है.

19 साल पहले हुई थी शादी

सेवला सिल्वर टाउन निवासी 37 वर्षीय शशी की शादी 19 साल पहले धांधुपुरा निवासी वीरेंद्र सिंह से हुई थी. पति वर्तमान में कॉस्मेटिक की दुकान चला रहा है. शशी की छोटी बहन राजकुमारी की शादी भी देवर जितेंद्र से हुई है. ससुर की दस वर्ष पूर्व मौत होने के बाद दोनों भाइयों में संपत्ति का बंटवारा हो गया था. देवर ने अपने हिस्से की एक दुकान उसे बेच दी. जिस पर अब दोबारा कब्जा कर लिया. पिछले दिनों राजकुमारी ने दुकान पर अपना दावा जताते हुए ताला लगा दिया. मायके वालों ने भी राजकुमारी का ही साथ दिया. इससे वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी.

बहनोई की आईडी पर साले ने लिया लोन

उधर, मृतका के भाई योगेश ने पिछले वर्ष जीजा वीरेंद्र की आइडी पर किश्तों में 65 हजार रुपये का मोबाइल लिया था. दो किस्त चुकाने के बाद उसने किस्त चुकाना बंद कर दिया. जब शशी ने भाई से किस्त जमा कराने की कहा तो मायके वालों ने ताना देना शुरू कर दिया. इसके कारण शशी परेशान हो गई थी.

रसोई में जाकर लगा ली फांसी

हताश हो चुकी शशी बहुत परेशान थी. उसके पास इतने रुपये तक नहीं थे कि वह मोबाइल की किस्त जमा कर सके. इस सबके चलते शनिवार आधी रात किसी समय शशी ने रसोई में जाकर गले पर फंदा कस लिया. रविवार सुबह उसका शव फंदे पर लटका मिला. इंस्पेक्टर ताजगंज डॉ. विनोद कुमार पायल ने बताया खुदकशी के पीछे आर्थिक और पारिवारिक कारण है.

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सुसाइड नोट में मोदी योजना का जिक्र

शशी ने अपने सुसाइड नोट में प्रधानमंत्री मोदी का भी जिक्र किया है. उसने लिखा है कि मोदी जी क्या अच्छे दिन आए हैं, हमारे लोन लेने के लिए. हम जैसे लोगों को कितनी मेहनत करनी पड़ती है. आपने ट्रेनिंग सेंटर खोले, हमने भी खंदौली में 800 रुपये देकर ट्रेनिंग ली थी कि इसके बाद सर्टीफिकेट मिलेगा, उससे लोन मिल जाएगा. लेकिन वहां से भी कुछ नहीं हुआ, हम जैसे लोगों को कोई लोन नहीं देता. अब जाके जैसे-तैसे लोन मिला, दुकान खोली तो अपने आ गए छीनने के लिए.

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मन्नतों से मांगा भाई, उसी के चलते मरना होगा

सुसाइड नोट में शशी ने लिखा है कि मैंने योगेश के लिए क्या कुछ नहीं किया. उसे क्या पता था कि जिस भाई को आठ वर्ष की उम्र से मंदिरों में जाकर रो-रोकर मांगा, एक दिन उसी के चलते मरना होगा. जब मोबाइल लिया था तो बड़े प्यार से कहा था कि दीदी तुम चिंता मत करो मैं सारे पैसे दे दूंगा. दो किस्त देने के बाद बेईमान हो गया.

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बच्चों खुश रहो, तुम्हें छोड़ कर जाना पड़ रहा है

शशी ने सुसाइड नोट में लिखा है कि अमन, उन्नति मेरे प्यारे बच्चों खुश रहो. बेटा मैं आज तुम्हें छोड़ कर जाने के लिए मजबूर हूं. पापा का ख्याल रखना. उन्नति भैया का ख्याल रखना. शरीर यहां नहीं रहे तो क्या हमारी आत्मा इसी घर में रहेगी. तुम लोगों के साथ. बस अपनी मां की तरह हिम्मत मत हारना. बच्चों ने बताया कि मां शनिवार दोपहर से ही कुछ लिख रही थी पर उन्हें यह नहीं पता था कि मां सुसाइड नोट लिख रही है.