इसके बावजूद यह वैश्विक महामारी स्वाभाविक रूप से हमारी छुई गई हर चीज को लेकर मन में एक डर जरूर पैदा करती है, तो मैं आपको बताता हूं कि आईएनएमए को इस विषय के बारे में क्या जानकारी है। क्या उस इलाके से कोई पैकेज प्राप्त करना सुरक्षित रहेगा, जहां पर कोविड-19 का केस सामने आया हो? इसको लेकर डब्लूएचओ का कहना है, 'संक्रमित व्यक्ति की वाणिज्यिक वस्तुओं को दूषित करने की संभावना कम है और एक पैकेज जिसे स्थानांतरित किया गया हो, जिसने यात्रा की हो और जो विभिन्न स्थितियों और तापमान के संपर्क में आया हो, उसके कोविड-19 वायरस पकडऩे का जोखिम बहुत कम है।' हार्टफोर्ड हेल्थकेयर ने इसपर और अधिक स्पष्ट रूप से कहा है, 'अपने घर में होने वाली डिलीवरी की चिंता न करें। कोरोना वायरस वस्तुओं पर लंबे समय तक नहीं टिकता है।' यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (सीडीसी) का कहना है कि किसी व्यक्ति को कोई ऐसी सतह छूने से जिसपर वायरस मौजूद हो, से संक्रमण का शिकार होने की संभावना जरूर है लेकिन इसे वायरस फैलने की मुख्य वजह नहीं माना जा सकता है।' तथ्य यही है कि प्रिंट सामग्रियों की वजह से वायरस के फैलने की कोई घटना नहीं हुई है।

हवा के संपर्क में आने के बाद तेजी से घटती है वायरस की ताकत

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में पिछले सप्ताह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच), सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी), यूसीएलए और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की तरफ से प्रकाशित एक अध्ययन ने विभिन्न सतहों पर कोरोनो वायरस की बदलती स्थिरता को दिखाया था। एरोसोल, प्लास्टिक, स्टेनलेस स्टील, तांबा और कार्डबोर्ड के बीच, कोरोनो वायरस ट्रांसमिशन की संभावना सबसे कम एटॉमिक बनावट की वजह से तांबे और संभवत: झरझरी प्रकृति के कारण कार्डबोर्ड पर थी। कोरोनो वायरस चिकनी, गैर-छिद्रपूर्ण सतहों पर सबसे लंबे समय तक रहता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील पर वायरस तीन दिनों के बाद भी जीवित था। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह उतना अशुभ नहीं है जितना लगता है क्योंकि हवा के संपर्क में आने के बाद वायरस की ताकत तेजी से घट जाती है। क्योंकि वायरस हर 66 मिनट में अपनी आधी शक्ति खो देता है, तो यह सतह पर पहली बार आने के तीन घंटे बाद केवल एक के आठवें हिस्से जितना ही संक्रामक बचता है।

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सूर्य की पराबैंगनी विकिरण में हो सकता है कमजोर

शोधकर्ताओं ने पाया कि छह घंटे बाद इसकी जीवित रहने की शक्ति मूल से केवल 2 प्रतिशत रह जाती है। कार्डबोर्ड पर 24 घंटे के बाद वायरस जीवित नहीं था और यहां अच्छी खबर यह है कि प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील की तरह, हवा के संपर्क में आने पर इसकी शक्ति कम और कम होती जाती है। न्यूजप्रिंट के लिए, जो कार्डबोर्ड की तुलना में बहुत अधिक छिद्रपूर्ण है, वायरस की व्यवहार्यता संभवत: और भी कम है। 13 मार्च के वाशिंगटन पोस्ट के एक लेख में लेखक जोएल अचेनबैक ने पिछले हफ्ते के अध्ययन को मानवीय शब्दों में रखते हुए कहा, 'बाहर, एक निर्जीव सतह पर, वायरस धीरे-धीरे संक्रामक एजेंट बने रहने की क्षमता खो देगा। उदाहरण के लिए, यह सूख सकता है। यह सूर्य की पराबैंगनी विकिरण के संपर्क में आने पर कमजोर हो सकता है। किसी सतह पर छींकने वाला व्यक्ति कई हजारों वायरस प्रतिभागियों को जमा कर सकता है और उनमें से कुछ कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं। फिर भी, उस छींक के अवशेष के संपर्क में आने वाले व्यक्ति के संक्रमित होने की संभावना समय के साथ कम हो जाती है।'

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होम डिलीवरी स्टाफ को हैंड सैनिटाइजर और वाइप्स

समाचार प्रकाशक विभिन्न प्रकार से चिंताओं पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। बुनियादी स्तर पर, वे होम डिलीवरी स्टाफ को हैंड सैनिटाइजर और वाइप्स प्रदान कर रहे हैं और समाचार पत्रों को इमारतों के बाहर छोड़ रहे हैं। मैं ऐसी कहानियां सुन रहा हूं जहां प्रकाशक अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए न्यूजस्टैंड, वितरक और सड़क विक्रेताओं को दस्ताने, मास्क और सैनिटाइजर प्रदान कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इस सप्ताह के शुरू में अपने प्रिंट संस्करण में एक नोटिस के जरिए बताया कि उनकी पेपर उत्पादन प्रक्रिया ज्यादातर स्वचालित है और उसमें जोखिम कम है। प्रकाशक यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठा रहे हैं कि जब तक उत्पाद ग्राहक तक नहीं पहुंचता, तब तक कोई उसे असुरक्षित हाथों से न छुए।

अर्ल जे विल्किंसन (Executive Director and CEO, International News Media Association (INMA), Dallas, Texas, United States)

Posted By: Shweta Mishra

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