- ग्रामीणों की इनकम का मेन सोर्स है सेब का उत्पादन

- आपदा के बाद टूटी सड़कें नहीं बनी, ट्रांसपोर्ट की दिक्कत

उत्तरकाशी,

आराकोट में क्लाउड ब‌र्स्ट की घटना को 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन जनजीवन अब भी सामान्य नहीं हो पाया है. आराकोट के 16 गांवों को जोड़ने वाला आराकोट-टिकोची-चिवां मोंडा मार्ग नहीं खुल पाया है. ग्रामीणों के पास इस क्षेत्र में जो कुछ बची सेब की फसल है, वह बर्बादी के कगार पर है. सेब या तो पेटियों में पड़े सड़क के किनारे सड़ रहे हैं या फिर बगीचों में ही खराब हो रही है.

आराकोट के मोल्डी, मलाना, एराला, नगवाड़ा, चिवां, टिकोची, ढुचाणू, किराणू, खकवाड़ी, माकुडी, जागटा, गोकुल, डगोली, बलाटबीते 18 अगस्त को आई आपदा में काश्तकारों के कई बागीचे तबाह हो गए. लेकिन, जो बागीचे सुरक्षित हैं उन बगीचों में सेब खराब हो रहा है. जो सेब काश्तकारों ने पेटियों में पैक किया था वह सड़ने लगा है. मोंडा गांव निवासी बलदेव सिंह चौहान ने कहा कि अब जो सेब पेड़ों पर है वह भी नीचे गिरने लगे हैं. गांव में करोड़ों रुपये का जो सेब है वो पेड़ों पर और सड़कों पर खराब हो रहा है. इसलिए उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण राहत अगर कुछ है तो वह सड़क का सुचारू करना है. सेब काश्तकार जोगेंद्र सिंह चौहान, चमन सिंह चौहान कहते हैं कि एक व्यक्ति के पास 15 से 20 लाख रुपये का सेब है. लेकिन, वह सड़कों और खेतों में ही खरब हो रहा है. सेब को सड़क तक पहुंचाने की कोई भी व्यवस्था नहीं है. ग्रामीणों ने जिला आपदा प्रबंधन और डीएम से गुहार लगाई है कि किसी तरह जल्द से जल्द क्षतिग्रस्त सड़क और पुलों को तैयार किया जाए.

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आपदा प्रभावित मोल्डी गांव तक ही पहुंच पाई गृह मंत्रालय की टीम

उत्तरकाशी: केंद्रीय गृह मंत्रालय भारत सरकार की 7 सदस्यीय टीम गुरुवार की देर शाम को अंधेरे में केवल मोल्डी तक ही इंस्पेक्शन कर सकी. गुरुवार की रात को आराकोट में इस टीम ने प्रभावितों का हालचाल जाना. साथ ही प्रभावितों को केंद्र से हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया. शुक्रवार सुबह यह टीम त्यूणी से ही देहरादून के लिए रवाना हुई.

आराकोट में आई आपदा का निरीक्षण करने के लिए गृह मंत्रालय भारत सरकार की 7 सदस्यीय टीम गुरुवार की देर शाम को आराकोट पहुंची. आराकोट से 6 किलोमीटर दूर मोल्डी तक गई. मोल्डी में भूस्खलन जोन का भी टीम ने रात के अंधेरे में टार्च के सहारे जायजा किया. इसके बाद आराकोट में बैठक हुई. इस दौरान आराकोट राहत कैंप में रह रहे प्रभावित ग्रामीणों से भी टीम के सदस्यों ने बातचीत की. वहीं डीएम डॉ. आशीष चौहान ने टीम के सदस्यों को आराकोट में आई आपदा में हुए नुकसान की रिपोर्ट दी. इसमें उन्होंने कहा कि 95 हेक्टेयर कृषि भूमि भूस्खलन की चपेट में आई है. 175 हेक्टेयर मलबा आने से बर्बाद हुई है, जिससे 9.84 करोड़ का नुकसान हुआ है. स्वास्थ्य परिसंपत्ति में 1.90 करोड़ का नुकसान हुआ है. जल संस्थान की 29 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं. ऊर्जा निगम के 610 पोल, 8 ट्रांसफार्मर तथा 34 किमी विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त हुई है. आंतरिक सड़क व पुल की करीब 22 करोड़ की क्षति हो गई है. आपदा से 197 छोटे बड़े पशुहानि हुई है तथा 15 लोगों की मौत व 27 लोग घायल हुए थे.