पटना ब्‍यूरो।

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरूआत जुलाई 2015 में की गई थी। इसका उद्देश्य विभागों को तकनीकी रुप से सक्षम बनाने के साथ सेवाओं का डिजिटल फार्मेट में लोगों तक पहुंचाना था। इससे डिजिटल रूप से सक्षम ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनाना था। डिजिटलीकरण, विकास को बढ़ावा देने, रोजग़ार सृजन, और उत्पादकता में सुधार करने में अहम भूमिका निभाता है। डिजिटलाइजेशन के दौर में जबसे सोशल मीडिया संचार के क्षेत्र में सशक्त माध्यम के तौरपर उभरी है। तब से विभागों से संबंधित अपडेट को सोशल मीडिया पर डाला जाता है। लेकिन बिहार की बात करें तो आईपीआरडी के तमाम जोर के बाद भी बिहार पुलिस को छोड़कर कोई भी विभाग सोशल मीडिया पर अपनी रिचआउट नहीं बढ़ा सकी है।

पिछले साल आईपीआरडी ने विभागों से रिचआउट बढ़ाने का कहा था

पिछले साल मई 2023 में आईपीआरडी ने विभागों से सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने को कहा था। सूचना जनसंपर्क विभाग का मानना था कि विभागों का सोशल मीडिया पर उपस्थिति का मतलब है कि वे लोगों से सीधे जुड़ रहे हैं। इस मामले में उस समय आईपीआरडी ने अधिकारियों से भी रिचआउट बढ़ाने को कहा था। ताकि सोशल मीडिया पर विभाग लोगों की समस्याओं को सीधे एड्रेस कर सके। इसके बाद भी किसी विभाग का सोशल मीडिया पर कोई खास उपस्थिति नहीं दिखती है। बिहार में अगर पुलिस विभाग को छोड़ दें तो बाकि विभागों के हैंडल को महीनों तक अपडेट नहीं किया जाता है।

विभागों में होती है आईटी टीम

यह हाल तब है जब अब करीब-करीब सभी विभागों में सूचनाओं को सार्वजनिक करने और उसे सोशल मीडिया पर सर्कुलेट करने के लिए उनकी खुद की सोशल मीडिया टीम होती है। कई विभाग ऐसे भी हैं जो सोशल मीडिया पर लोगों की शिकायत पर कुछ रिस्पांड तक नहीं करते हैं। इस मामले में भी बिहार पुलिस अन्य विभागों से लीड ले रही है। क्योंकि उसे टैग करके की जाने वाली शिकायत पर वह रिस्पांड करती है।

सबसे ज्यादा बिहार पुलिस का है टवीट्र पर फॉलोवर

टवीट्र सहित तमाम सोशल मीडिया फॉलोवर की बात करें तो इस मामले में बिहार पुलिस सबसे आगे है। उसके टवीट्र पर ही केवल 437.6 हजार फॉलोवर है। वहीं पटना पुलिस के टवीट्र हैंडल पर भी 11 हजार फॉलोवर हैं। इसके अलावे फेसबूक की बात करें तो बिहार पुलिस का यहां भी जलवा कायम है। पांच लाख छह हजार फॉलोवर के साथ अन्य विभागों से वह काफी आगे है। बिहार पुलिस पब्लिक डिलिंग के मामले में अन्य विभागों से काफी आगे हैं। उसकी डिजिटल टीम हमेशा अपडेट के साथ लोगों से जुड़ी रहती है। हालांकि ग्राउंड पर पुलिस कितनी एक्टिव रहती है यह एक अलग विषय है। क्राइम से जुड़ी किसी भी घटनाक्रम को लेकर डीजीपी का निर्देश है कि उसे दो घंटे के अंदर वीडियो संदेश के माध्यम से सोशल मीडिया पर शेयर किया जाए। इसके अलावे थाना स्तर पर वाट््सएप्प ग्रुप भी बनाए जा रहे हैं। जिसमें एरिया के एक्टिव लोगों को जोड़कर सूचनाओं को शेयर किया जाता है।

वर्जन

थाना स्तर पर एसएचओ को वाट्सएप ग्रुप जरिये लोगों से जुडऩे को कहा गया है। पुलिस जितना ज्यादा से ज्यादा आम लोगों से संपर्क करेगी उतना ही हम अपराध नियंत्रण के प्रयासों को आगे बढ़ा पायेंगे।
आरएस भट्ठी
डीजीपी बिहार
बिहार पुलिस दिवस पर बोलते हुए