1965 में मात्र 70 स्टूडेंट्स से हुई थी यूनिवर्सिटी की शुरुआत

- 4 हजार स्टूडेंट्स इन दिनों पढ़ते हैं सीसीएसयू में

- 50 कॉलेजों को थी पहले यूनिवर्सिटी से मान्यता अब 1 हजार 57

- 2014 के बाद हुआ यूनिवर्सिटी की एडमिशन की रफ्तार व सत्र की रफ्तार पर सुधार

Meerut . एक जुलाई 2019 को सीसीएस यूनिवर्सिटी 54 साल पूरे कर लेगी. बीते 54 साल में यूनिवर्सिटी ने जहां काफी सुधार किए है. वहीं काफी उपलब्धियां भी हैं. वहीं यूनिवर्सिटी की शुरुआत जहां पर 70 स्टूडेंट्स और 50 कॉलेजों से हुई थी आज वो संख्या बढ़कर साढ़े चार हजार स्टूडेंट्स और एक हजार से अधिक कॉलेज हो गई है, जो अपने आप में बहुत खास है

एमफिल के थे मात्र पांच कोर्स

गौरतलब है कि साल 1965 में जब यूनिवर्सिटी की शुरुआत हुई थी, उस समय यूनिवर्सिटी में मात्र पांच ही एमफिल के कोर्स हुआ करते थे. इनमें फिजिक्स, जोलोजी, बॉटनी, मैथ्स, माइक्रोबायोलोजी वहीं एमए था. 76 सन् में पॉलिटेक्निक व 78 में इकोनोमिक्स का कोर्स शुरु हुआ था. 95 सन् के बाद यूनिवर्सिटी में सेल्फ फाइनेंस कोर्स आने शुरु हुए. 80 के दशक में स्टैट, सोशलॉजी व इंग्लिश तीन नए विभाग बने. धीरे धीरे विस्तार होता गया और 2001 में एमजेएमसी, 2003 में बीटेक आया. अब हालात इतने बेहतर है कि टोटल 56 कोर्स हो गए है.

डीयू की तर्ज पर चलेंगे कोर्स

डीयू की तर्ज पर 10 नए कोर्स होने जा रहे है. सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में पॉलिटेक्निक का कोर्स शुरु करने की तैयारी है. जो आफ्टर टेंथ किया जाएगा, ये दो साल का कोर्स होगा जो इंटर बेस्ड होगा, इस कोर्स इंटर के इक्वुअल ही माना जाएगा, वहीं बीए ऑनर्स जर्नलिज्म कोर्स भी शुरु होगा, इसके साथ ही पॉलिटेक्निक व जोलोजी आदि में काफी ऐसे नए कोर्स होंगे जो आनर्स से होंगे और इन कोर्स के लिए स्टूडेंटस को दिल्ली नहीं जाना होगा.

पहले कोर्स के हालात अच्छे

बीते एक दो सालों में बीकॉम आनर्स, बीए ऑनर्स इन इकोनोमिक्स व बीएससी आदि के कई नए ऐसे कोर्स शुरु हुए थे. जिनके लिए स्टूडेंट्स को दिल्ली जाना पड़ता था. लेकिन इन कोर्स की डिमांड इतनी हुई कि सीसीएसयू को हर कोर्स में 20 सीट बढ़ानी पड़ी थी. ऐसे में स्टूडेंट्स की बढ़ती रुचि को देखते हुए ही ये फैसला लिया गया है.

काफी कोर्स ऐसे है जिनके लिए स्टूडेंट को दिल्ली जाना पड़ता है. उनमें से कुछ कोर्स शुरु करने पर काफी डिमांड आई, ऐसे में स्टूडेंट की डिमांड को देखते हुए कोर्स बढ़ाने का फैसला लिया गया है.

प्रो. वाई विमला, प्रोवीसी, सीसीएसयू