हिमालयी क्षेत्र में बढ़ेगी चीन की सैन्य आवाजाही

चीन ने हिमालयी क्षेत्र में अपनी सैन्य आवाजाही को बढ़ाने के लिए तिब्बत तक एक रेल लाइन बिछाई है. यह विश्व का सबसे ऊंचा रेलमार्ग है. गौरतलब है कि इस रेल लाहन के चलने से चीन के लिए भारतीय सीमा के पास सैन्य जमावड़ा करने में जरा भी दिक्कत नही होगी. यह ट्रेन भारत के अलावा नेपाल और भूटान की सीमाओं के करीब से गुजरती है.  

तिब्बत तक आवाजाही सरल

चीन ने तिब्बत की प्रांतीय राजधानी ल्हासा और एक बड़े शहर शिकात्से के बीच बनी है. नई ट्रेन के बलबूते अब इन दोनों प्वॉइंट्स के बीच दूरी सिर्फ दो घंटे की रह गई है. पहले इन दोनों शहरों के बीच चार घंटे की दूरी थी. इस रेल लाइन को बनाने में 216 करोड़ रुपये का खर्चा हुआ है.

बनेगी एक और रेल लाइन

चीन इस इलाके में तीसरी रेल लाइन बनाने पर आमादा है. गौरतलब है कि यह रेल लाइन भारत के हिस्से अरुणाचल प्रदेश से गुजरेगी. चीन अरुणाचल प्रदेश पर काफी समय से अपना हक जताता आया है. इसलिए नई लाइन के बनने से भारत चीन संबंधों में बड़ा अंतर आने की संभावना है क्योंकि यह लाइन तिब्बत के ल्हासा से चीन के निंगची तक जाएगी. इसलिए चीन इस लाइन को भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने में सौदेबाजी के टूल के रूप में यूज कर सकता है. हालांकि यह चीनी विश्लेषकों का नजरिया है.

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