वाशिंगटन (रॉयटर्स)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने ईरान पर किये जाने वाले हमले को इसलिए रोक दिया क्योंकि इससे वहां के 150 लोग मारे जा सकते थे। इस बयान के साथ उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह तेहरान के साथ बातचीत करना चाहते हैं। ट्रंप ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में कहा, 'मैं ईरान में तीन जगहों पर हमला कराने वाला था लेकिन इससे कई लोगों की जान चली जाती। मैं युद्ध नहीं करना चाहता हूं लेकिन अगर वह यह चाहते हैं तो युद्ध बहुत बड़ा होगा जैसे कि पहले कभी नहीं देखा गया होगा। खैर, मैं ऐसा नहीं करना चाह रहा हूं।' बता दें कि ईरानी सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि ट्रंप ने ओमान के जरिये तेहरान को चेतावनी दी थी कि वह उसकी गतिविधि को लेकर हमला कर सकते हैं लेकिन वह युद्ध के खिलाफ हैं और बातचीत करना चाहते हैं।

जल्दी में नहीं हैं ट्रंप

अमेरिका ने सोमवार को बंद कमरे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की बैठक का भी अनुरोध किया है। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने रॉयटर्स की इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। ट्रंप ने शनिवार को एक साथ कई ट्वीट किये। उन्होंने लिखा, 'अमेरिका सैन्य कार्रवाई करने की जल्दी में नहीं है और हमने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए अपने प्रतिबंध लगाए थे। इससे ईरान पर काफी प्रभाव पड़ा है। हम पिछली रात जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी तरह से तैयार थे। हमले से दस मिनट पहले मैनें इसे रोक दिया।'

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अमेरिका ने कहा ड्रोन इंटरनेशनल एयरस्पेस में मार गिराया गया
बता दें कि ईरान ने गुरुवार को उसकी सीमा में घुसे एक अमेरिकी ड्रोन आरक्यू-4 ग्लोबल हॉक को मार गिराया था। इसके बाद ईरान के रेवोलुशनरी गार्ड के प्रमुख होसेन सलामी ने कहा, 'ड्रोन को लेकर तेहरान की प्रतिक्रिया यह साफ संदेश देती है कि सीमा की रक्षा करने वाले किसी को जवाब देने से पीछे नहीं हटेंगे। ईरान अपनी हवाई सीमा के उल्लंघन की हर कोशिश का मजबूती से जवाब देगा।' ईरान का कहना था कि ड्रोन ने उसके एयरस्पेस का उल्लंघन किया, जबकि वॉशिंगटन ने कहा कि ड्रोन इंटरनेशनल एयरस्पेस में मार गिराया गया। ईरानी हमले पर अपना जवाब देने के लिए ट्रंप ने हमला करने का आदेश दे दिया था।

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