- कूड़ेदान के बाहर कूडे़ का ढेर और जर्जर हाल कूडे़दान से बिगड़ रही शहर की सूरत

Meerut . कूडे़दान में कूड़ा न फेंकने की शहर के लोगों की आदत निगम के लिए भारी परेशानी बनती जा रही है. शहर के लोगों की इस आदत के कारण शहर में जगह जगह कूडे़दान बन चुके हैं. कई जगह तो ऐसी है जो इस आदत के कारण हर मोहल्ले में अपने आप ही कूड़ाघर बन चुकी है पूरे मोहल्ले का कूड़ा इन्हीं जगह पर डाला जा रहा है और निगम भी इन जगहों पर कूड़ा डलने से रोकने में असमर्थ है. शहर में जगह जगह बने ये कूडे़दान निगम की परेशानी के साथ साथ खुद शहर की सुंदरता के लिए नासूर बन चुकी हैं. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम ने शहर में कुछ ऐसे ही अस्थाई कूड़ा स्थल और शहर के डस्टबिन की हालत पर फोकस करते हुए आसपास के लोगों से डस्टबिन में ही कूड़ा डालने की अपील की.

ओवर फ्लो डस्टबिन

नगर निगम ने शहर में करीब डेढ़ करोड़ की लागत से शहर में गत वर्ष स्टील के डस्टबिन लगवाए थे. लेकिन अभी साल भर भी नही बीता है कि शहर में अधिकतर जगह से स्टील डस्टबिन या तो गुम हो चुके हैं या तोडे़ जा चुके हैं. हालत यह है जहां डस्टबिन लगे भी हुए हैं वो ओवर फ्लो रहते हैं जिस कारण से कूड़ा डस्टबिन से अधिक उसके आसपास फैला रहता हैं. वहीं कई डस्टबिन की हालत तो इसक कदर जर्जर है कि कूड़ा उसमें डालने के बाद भी बाहर ही फैल जाता है. कुल मिलाकर शहर की सुंदरता के लिए लगाए गए ये डस्टबिन सुंदरता को ही बिगाड़ रहे हैं.

अस्थाई खत्ते बढ़ा रहे बीमारियां

स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में कहीं पर भी कूड़ाघर नहीं होने चाहिए. लेकिन निगम के अस्थाई खत्तों का संचालन अभी तक बंद नही किया गया है. शहर में लगभग हर मोहल्ले में निगम द्वारा बनाए गए अस्थाई खत्ते खुले हुए हैं. इनकी संख्या में शहर में 146 से अधिक हैं. इसके अलावा हर मोहल्ले में लोगों ने अपने आप ही खाली प्लाट या जगह को कूड़ेदान में बदल दिया है. जो कि आसपास के क्षेत्र में बीमारियों का प्रमुख कारण बन गए हैं. ऐसे खत्तों का निगम में कोई रिकार्ड नही है लेकिन 90 वार्ड में लगभग 500 से अधिक जगहों पर कूडेदान बने हुए हैं.

कूड़ा फैला रहीं गाडि़यां

वहीं शहर की साफ-सफाई के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार निगम की कूड़ा कलेक्शन गाडि़यों पर शहर के कूडे़ का इस कदर बोझ है कि कूड़ा एकत्र करने के बाद ये गाडि़यों ओवरफ्लो होकर चलती हैं और शहर के बाहर डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचने तक जगह जगह कूड़ा बिखरते हुए जाती हैं. इस कारण से इन गाडि़यो के कारण सड़क पर जगह-जगह कूड़ा बिखरा रहता है. शहर में फिलहाल तीन जगह कूड़ा डंप किया जा रहा है, जिसमें लोहियानगर, भावनपुर और गांवडी शामिल है. इससे अलग कंकरखेड़ा में एलआइसी के पास, दिल्ली रोड की तरफ बिजली बंबा बाइपास किनारे और मंगतपुरम में पिछले 10 साल से कूडे़ का पहाड़ खड़ा हुआ है.

वर्जन-

कूडे़दान को नियमित रूप से रोजाना खाली कराया जा रहा है. जो अस्थाई खत्ते हैं, उनसे भी रोजाना कूड़ा एकत्र किया जाता है. लेकिन कई जगह ऐसी है, जहां बार-बार रोक के बाद भी कूड़ा डाला जा रहा है. इसके लिए लोगों को जागरुक होना पडेगा.

- डॉ. गजेंद्र, नगर स्वास्थ्य अधिकारी

वर्जन-

लोगों में यह बहुत गंदी आदत होती है कि वे कूडेदान होने के बाद भी इधर उधर कूड़ा फेंक देते हैं. हमने अपनी शॉप के बाहर इसलिए कूडेदान लगाया हुआ ताकि सड़क पर गंदगी न हो, लेकिन निगम के कर्मचारी उसे खाली करने भी नही आते हैं.

- सतीश पाल, व्यापारी

निगम के डस्टबिन स्टाइलिश थे. देखकर अच्छा लगता था कि शहर में कुछ अच्छा हो रहा है, लेकिन अब ये डस्टबिन एक-एक सप्ताह तक ओवरफ्लो रहते हैं. इनको खाली नही किया जाता, जिस कारण आसपास भी गंदगी हो जाती है.

- लोकेश ठाकुर

कूडे़दान की हालत ही इस कदर खस्ता है कि कूड़ा उसमें डाल भी दें तो भी कूडे़दान से बाहर फैला रहता है. कूड़ेदान पूरी तरह जर्जर हैं उनको बदला जाना चाहिए.

- इस्लामुददीन