- सभी तरह के पेमेंट हुए ऑनलाइन, वहीं खरीदारी भी हुई डिजिटल

- नए-नए कोर्स की मिली सौगात, गोरखपुर के होनहारों का बजा डंका

GORAKHPUR: गोरखपुर के होनहारों का डंका हमेशा से ही हर फील्ड में बज रहा है. चाहे एजुकेशन फील्ड में पढ़ाई की बात हो, या फिर स्पो‌र्ट्स में मेडल झटकने की बात. गोरखपुर यूनिवर्सिटी के होनहारों ने हर फील्ड में अपना डंका बजाया है. वहीं अब यूनिवर्सिटी डिजिटल ट्रैक पर तेजी से दौड़ने लग गई है. जहां फॉर्म भरने से लेकर इसके पेमेंट तक सभी कुछ ऑनलाइन कर दिया गया है, वहीं रिजल्ट, एडमिट कार्ड और बाकी दूसरी व्यवस्थाएं भी डिजिटल ट्रैक पर दौड़ने लग गई हैं. हाल में ही यूनिवर्सिटी ने कैंटीन और गेस्ट हाउस को भी डिजिटल कर दिया और डिजिटल एरा की ओर एक कदम और बढ़ाया है.

तीन सर्विस जल्द हुईं ऑनलाइन

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में कॉमर्शियली यूज होने वाली तीन सर्विसेज को पहले फेज में भीम एप के जरिए ऑनलाइन कर दिया गया है. इसमें स्टूडेंट्स की भीड़ वाली कैंटीन को मोस्ट प्रियॉरिटी पर रखा गया है, वहीं फोटोकॉपी कराने के लिए लाइब्रेरी में भी अगर 10 या उससे ज्यादा का पेमेंट करना है, तो स्टूडेंट्स को यह भीम एप के जरिए करना होगा. गेस्ट हाउस का पेमेंट भी डिजिटल मोड में लिया जा रहा है, जिससे हिसाब रखने में कोई मुश्किल न हो और लोग पैसा पास न होने के बाद भी अपनी भूख मिटा सकेंगे. यह सर्विस भी पहले ऑप्शनल है, लेकिन धीरे-धीरे इसे मेंडेटरी कर दिया जाएगा.

कॉमन सिलेबस में यूनिवर्सिटी को 8 सब्जेक्ट

एमएचआरडी और यूजीसी ने प्रदेश भर के सिलेबस को कॉमन करने के लिए कवायद शुरू की. इसके लिए बाकायदा अलग-अलग यूनिवर्सिटीज को जिम्मेदारी सौंपी गई है. गोरखपुर यूनिवर्सिटी की उपलब्धि यह रही कि आ‌र्ट्स फैकेल्टी के सबसे ज्यादा सब्जेक्ट्स तैयार करने की जिम्मेदारी गोरखपुर यूनिवर्सिटी को ही सौंपी गई. हाल ही में यूनिवर्सिटी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी करते हुए आठ सब्जेक्ट्स का सिलेबस तैयार कर इसे उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दिया है. वहां से जैसा फैसला होगा, इसके अकॉर्डिग आगे का वर्क होगा.

इंटीग्रेटेड लॉ की हुई शुरुआत

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में इस साल मोस्ट अवेटेड इंटीग्रेटेड लॉ की शुरुआत हुई. पहले जहां ग्रेजुएशन करने में स्टूडेंट्स को तीन साल लग जाते हैं, वहीं एलएलबी के लिए भी उन्हें तीन साल बर्बाद करने पड़ते हैं. मगर इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स शुरू हो जाने से स्टूडेंट्स पास साल में ही बीए-एलएलबी की डिग्री हासिल कर लेंगे और उनका एक साल का वक्त बचेगा. वहीं सबकुछ ठीक रहा और सारी प्रॉसेस टाइमली कंप्लीट हो गई, तो नेक्स्ट सेशन से यूनिवर्सिटी में भी इंजीनियरिंग का ऑप्शन मिलने लगेगा. इससे स्टूडेंट्स को शहर छोड़कर बाहर नहीं जाना पड़ेगा और उनके काफी पैसे भी बचेंगे.

एमएमएमयूटी से दी जा रही ड्युअल डिग्री

एमएमएमयूटी भी स्टूडेंट्स को बेहतर सुविधा मुहैया कराने की तैयारियों में जुटा हुआ है. जहां यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स को अपग्रेड करने के लिए विदेशी यूनिवर्सिटीज से करार कर उन्हें पढ़ाई और रिसर्च के लिए फॉरेन भेजा जा रहा है. वहीं पिछले सेशन से एमएससी फिजिक्स का स्पेशल डिग्री कोर्स स्टूडेंट्स के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है. इसकी खास बात यह है कि इसमें स्टूडेंट्स को जो डिग्री मिलेगी, वह एमएससी फिजिक्स विद स्पेशलाइजेशन इन इलेक्ट्रॉनिक्स होगी. जो इंजीनियरिंग और साइंस ग्रेजुएट की ड्युअल डिग्री की तरह है. वहीं नेक्स्ट सेशन से एमएससी मैथ्स विद स्पेशलाइजेशन इन कंप्यूटिंग, बीबीए और बीटेक आईटी के कोर्स की भी शुरुआत हो जाएगी, जिससे काफी हद तक स्टूडेंट्स का पलायन रुकेगा और उन्हें यहीं रोजगार की राह मिल जाएगी.

बॉक्स

स्पो‌र्ट्स की फील्ड में चमका विजय

गोरखपुर यूनिवर्सिटी के होनहार स्पो‌र्ट्स की फील्ड में लगातार दम दिखाए हुए हैं. एक के बाद एक बेहतर परफॉर्मेस देकर वह यूनिवर्सिटी का परचम बुलंद करने में लगे हैं. गुरुकुल पीजी कॉलेज दादरी बड़हलगंज के होनहार विजय कुमार यादव ने यूनिवर्सिटी का सिर कई बार ऊंचा किया है. विजय एशियन ओपन जूडो चैंपियनशिप में इंडिया को रिप्रेजेंट करेंगे. अप्रैल में साउथ एशियन जूडो चैंपियनशिप में इंडिया के लिए गोल्ड मेडल हासिल करने वाले विजय ने कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में भी देश का परचम बुलंद किया. इस होनहार ने 5 से 11 नवंबर तक जयपुर में ऑर्गनाइज इवेंट में सीनियर कैटेगरी के 60 किग्रा भार वर्ग में भी इंडिया के लिए गोल्ड जीता. 8वीं साउथ एशियन जूडो चैंपियनशिप में तमाम एशियन कंट्रीज के बीच यूनिवर्सिटी के इस होनहार ने 60 किलोग्राम वेट कैटेगरी में गोल्ड पर कब्जा जमाया था.