रांची(ब्यूरो)। गर्मी शुरू होने के साथ ही शहर में आग लगने की घटनाएं भी बढऩे लगी हैं। बुधवार को डोरंडा की कपड़ा दुकान में भीषण आग लग गई, जिससे लाखों का नुकसान हुआ है। आग लगने की यह घटना डोरंडा थाना क्षेत्र के क्लच लाइफ स्टाइल टेक्सटाइल की दुकान में हुई है। बता दें कि जैसे ही अप्रैल का महीना शुरू होता है, आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। रांची में अग्निशमन विभाग के पास आग बुझाने के लिए गाडिय़ां तो हैं, लेकिन उन गाडिय़ों से आग बुझेगी कैसे, क्योंकि इस विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी है।

परमानेंट बहाली नहीं

रांची के डोरंडा स्थित अग्निशमन विभाग की ओर से खाली पड़े पदों के लिए कई बार सरकार को प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन अभी तक रिक्तियों को भरा नहीं जा सका है। मतलब साफ है कि मैन पावर के जुगाड़ तंत्र के भरोसे झारखंड राज्य का अग्निशमन विभाग चल रहा है। हालांकि कांट्रैक्ट पर कर्मचारी बहाल करने का निर्णय लिया गया है। राज्य अग्निशमन पदाधिकारी, अपर राज्य अग्निशमन पदाधिकारी, प्रमंडलीय अग्निशमन पदाधिकारी, सहायक प्रमंडलीय अग्निशमन पदाधिकारी के पद भी संविदा पर ही भरे जाएंगे। ये सभी प्रोन्नति से भरे जाने वाले पद हैं। इनमें सीधी बहाली का प्रावधान नहीं है।

बड़ी संख्या में खाली हैं पद

झारखंड में राज्य अग्निशमन पदाधिकारी का एक, अपर राज्य अग्निशमन पदाधिकारी के दो, प्रमंडलीय अग्निशमन पदाधिकारी के छह, सहायक अग्निशमन पदाधिकारी के 12 पद सृजित हैं। आलम ये है कि फायर डिपार्टमेंट में कुल 875 पद सृजित हैं, जबकि विभाग 433 पदाधिकारियों और कर्मचारियों से ही काम चला रहा है। यानी विभाग के पास वर्तमान में आधे से ज्यादा यानी 442 कर्मचारियों की कमी है। झारखंड अग्निशमन विभाग के पास आधारभूत संरचना की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन संसाधनों के एक्सपर्ट की कमी है। वहीं जो उपलब्ध मैन पावर हैं वो एग्जिस्टिंग सिस्टम का हिस्सा बन चुके हैं।

हाई राइज बिल्डिंग से भी परेशानी

शहर में ऊंची इमारतों के बनने से यह परेशानी और बढ़ गई है। शहर में कई जगह गली-मोहल्लों में बड़े-बड़े अपार्टमेंट खड़े हो गए हैं। अगर कहीं आग लगने जैसी घटना होती है तो वहां फायर ब्रिगेड की गाडिय़ों को घुसने तक में परेशानी होती है। दूसरी ओर अन्य महानगरों में आधुनिक अग्निशमन उपकरण से लैस होता है विभाग। लेकिन अपने शहर में सरकार का ध्यान शायद इस ओर नहीं गया है।

रांची में 5 फायर स्टेशन

झारखंड में कुल 35 फायर स्टेशन हैं। रांची में अलग-अलग स्थानों पर पांच स्टेशन हैं। जहां वाटर टेंडर, वॉटर वॉयजर, होम वाटर टेंडर, मिनी वाटर टेंडर, इमरजेंसी रेस्क्यू टेंडर, ब्रांडों स्काई लिफ्ट जैसे वाहनों के जरिए आग पर काबू पाया जाता है, लेकिन इन सभी जगहों पर कर्मचारियों की भारी कमी है।

सिर्फ नाम के फायर स्टेशन

बुंडू समेत राजधानी रांची में कुल पांच फायर स्टेशन हैं, जो राजेंद्र चौक, आड्रे हाउस, पिस्का मोड़ और धुर्वा में मौजूद हैं। अलग-अलग इलाकों में आग लगने पर इन स्टेशनों में घंटी बजती है, जिसके बाद फायर अफसर गाड़ी लेकर आग बुझाने निकल पड़ते हैं। सिर्फ राजेंद्र चौक स्थित मुख्यालय छोड़कर अन्य कहीं भी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस फायर ब्रिगेड वाहन नहीं हैं। एक वाहन है, इस मशीन से फोम और पानी दोनों निकलने की सुविधा है। वहीं, अन्य वाहनों से सिर्फ पानी की बौछार की जाती है।