कहानी
अपने घर परिवार को सड़क पर जाने से बचाने के लिए एक मेडिकल सेल्स रिप्रेजेंटेटिव बॉबी को चलाना पड़ता है एक शफाखाना।

रेटिंग : 3.5 स्टार

बॉक्स ऑफिस प्रेडिक्शन : लगभग बीस से पच्चीस करोड़

See Also

समीक्षा
पहले तो अच्छी बातें बोली जाएं क्योंकि वो ज्यादा हैं। फिल्म की कहानी अनूठी है और मैने इस थीम पर कोई मेनस्ट्रीम फिल्म देखी ही नहीं है। जहां हम गुप्त रोग क्लीनिक की अतरंगी दुनिया को बिल्कुल रियल तरीके से देख सकते हैं। थोड़ी देर आप नजारों के जरिए नजरिए में पहुंच जाते हैं और पति-पत्नी के शारीरिक संबध जो कि आज भी भारतीय समाज का सबसे बड़ा टैबू है। उसपर बेझिझक न केवल बात होने लगती है बल्कि आपको फिल्म की कहानी के जरिए समस्या समझ मे भी आने लगती है। जानबूझ के मर्दों और मर्दानगी के लिए फेमस पंजाब को कहानी का हिस्सा बनाया जाता है ताकि आपको असल में समझ आए कि मर्दानगी और कुछ नहीं मर्दों के भ्रम है। फिल्म का आर्ट डायरेक्शन और डायलॉग बहुत अच्छे है।

 

कहाँ कमी रह गई
फिल्म का पेस कई जगह पर बिना किसी कारण के ड्राप हो जाता है, ये परेशानियां बेहतर एडिट से सॉल्व हो सकती थी। गाना बजाना थोड़ा लाउड है उससे भी मुद्दे से ध्यान भटकता है।

अदाकारी
ये सोनाक्षी की अब तक की बेस्ट परफॉर्मेंस है और सोनाक्षी के ऑलमोस्ट परफेक्ट परफॉर्मेंस की वजह से ही आप सिर्फ उसके लिए फिल्म के बोरिंग हिस्सों में भी बैठे रहते हैं। कास्टिंग ओवर आल बहुत अच्छी है और इसलिए फिल्म बोर हिस्सों में भी उतना बोर नही करती।

अगर एक रीजन ही देना हो तो सोनाक्षी वो रीजन है जिसकी वजह से आप इस फिल्म को टैबू सब्जेक्ट के बाद भी सराह पाएंगे।

Review by: Yohaann Bhaargava

Bollywood News inextlive from Bollywood News Desk