20 साल पहले अमेरिका से आए थे इंडिया संस्कृति पसंद आई तो बदल लिया धर्म

2019-02-08T10:54:10Z

manish.mishra@inext.co.in

PRAYAGRAJ : गले में रुद्राक्ष की माला और भभूत में लिपटी काया जॉन और जिनी की पहचान बन गई है। अब तो तन तपस्या की भट्ठी में जलता है और मन शिव की भक्ति में लीन रहता है। योग और साधना के सहारे मोक्ष की तलाश कर रहे अमेरिकन भाई-बहन शिव पार्वती बन गए हैं। फास्ट लाइफ स्टाइल से निकलकर नागा बनने का सफर शांति की तलाश में शुरू हुआ जो आज सफल हो रहा है। आस्था के महाकुंभ में डुबकी लगाने आए शिव पार्वती के आगे हर कोई शीश झुकाकर मनचाहा वर मांग रहा है।

20 साल पहले आए थे इंडिया

जॉन और जिनी सगे भाई-बहन हैं। 20 साल पहले वह अमेरिका से इंडिया घूमने आए थे। भारत का सनातन धर्म और यहां की संस्कृति दोनों को बहुत भायी। शांति के लिए उन्हें इससे बेहतर मार्ग कोई नहीं दिख और फिर क्या था वह इसी धर्म के हो गए। भटकते हुए पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी पहुंचे और यहां दोनों नागा संन्यासी की दीक्षा लेकर नया जीवन शुरू कर दिया। दोनों के जीवन का उद्देश्य अब मोक्ष ही है।

शिव में रम गया मन

अखाड़ा के साधु-संतों का कहना है कि जब ये दोनों इंडिया आए थे तो एकदम युवा थे। दोनों की उम्र साधना और तपस्या की नहीं थी लेकिन उनका मन शिव में रम गया। दोनों ने यह तय किया कि वह नागा बनकर साधना करेंगे। दोनों की दिनचर्या को लेकर अखांड़ा के संत बताते हैं कि उनके रोम-रोम में सनातन धर्म बस गया है। वह एक भारतीय नागा की तरह योग और साधना में लीन रहते हैं। ठंड हो या गर्म हर मौसम में वह अपनी तपस्या से परिस्थतियों को अनुकूल बनाते हैं।

80 आसन करते हैं शिव

नागा शिव 80 तरह का आसन करते हैं। कुंभ में उनका आसन ही आकर्षण का केंद्र बना है। धुनी के पास बैठकर साधना करते-करते जब मन आनंदित होता है तो आसन लगा देते हैं। घंटों सिर के बल खड़े रहने के साथ वह कई जटिल आसनों से लोगों के लिए आस्था का केंद्र बन जाते हैं। अखाड़ा के संतों का कहना है कि नागा तपस्वी के रूप में शिव और पार्वती ने योग साधाना के क्षेत्र में बड़ा प्रयास किया है। अमेरिका से आकर सनातन धर्म अपनाकर वह एक नजीर बन गए हैं।

काया से बड़े हो गए बाल

शिव और पार्वती के बालों को देख उनकी तपस्या का अंदाजा लगाया जा सकता है। शिव के बाल जहां लट बनकर घुटने से नीचे पहुंचते हैं वहीं पार्वती के बाल उनकी काया से बड़े हो गए हैं। जिस वातावरण में वह पले बढ़े वह काफी मॉडर्न था। आग की भट्ठी क्या सूरज की तेज रोशनी से भी चेहरा लाल पड़ जाता था लेकिन आस्था की भट्ठी ऐसी जली कि दो तपकर नागा साधक बन गए।

 

तो लग जाती है भीड़

शिव और पार्वती जहां धूनी रमाते हैं वहां भक्तों की भीड़ लग जाती है। कुंभ में हर समय दोनों भक्तों की भीड़ से घिरे रहते हैं। अखाड़ा मार्ग पर नागाओं की भीड़ के बीच शिव-पार्वती की तपस्या लोगों को आस्था से ओतप्रोत कर रही है। यही कारण है कि दोनों भाई-बहन की धुनी जहां भी रमती है वहां आशीर्वाद लेने वाले भक्तों की कतार लग जाती है। दोनों भक्तों को भभूत लगाते हैं और प्रसाद देते हैं।


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