पहले विश्वयुद्घ में जर्मन आैर ब्रिटिश सैनिकों ने दुश्मनी भुलाकर क्रिसमस के दिन खेला फुटबाॅल

2018-12-25T08:51:29Z

पहले विश्वयुद्घ में जर्मन और ब्रिटिश के सैनिकों ने दुश्मनी भुलाकर क्रिसमस के दिन फुटबाॅल का एक मैच खेला था। उस दिन एक भी गोली नहीं चली थी।

कानपुर। पहले विश्वयुद्घ में जर्मन और ब्रिटिश के सैनिकों ने दुश्मनी भुलाकर क्रिसमस के दिन फुटबाॅल का एक मैच खेला था। इम्पीरियल वॉर म्यूजियम की वेबसाइट के मुताबिक, जर्मन और ब्रिटिश के सैनिकों ने अपनी दुश्मनी भुलाकर 25 दिसंबर, 1914 को फुटबॉल मैच खेला था। इस दिन युद्ध स्थल पर एक भी गोली नहीं चली थी।  जर्मन और ब्रिटिश के सैनिकों के बीच हुए इस मैच का नाम 'क्रिसमस ट्रूस' रखा गया। सीएनएन के मुताबिक, मैदान में फुटबॉल मैच शुरू होने से पहले दोनों तरफ के सैनिकों ने देशभक्ति गाने गए थे।

एक दूसरे के साथ ली थीं तस्वीरें
25 दिसंबर, 1914 को ब्रिटिश और जर्मन के सैनिकों ने फुटबॉल मैच खेलने के बाद नो मैन लैंड में एक दूसरे के साथ कुछ उपहारों का भी आदान-प्रदान किया। इसके अलावा सभी सैनिकों ने एक दूसरे के साथ कुछ तस्वीरें भी लीं। इस दिन पश्चिमी मोर्चे के साथ हर जगह युद्ध विराम महसूस किया गया था। दोनों तरफ का मैच बहुत ही दिलचस्प था, जर्मनी के सैनिकों ने ब्रिटिशर्स का जमकर मुकाबला किया था।
युद्ध की भावना कम
इस मुकाबले में ब्रिटेन हार गया था। हालांकि, जहां एक ओर 25 दिसंबर को कुछ अधिकारी युद्ध विराम का आनंद ले रहे थे, वहीं दूसरी तरफ कुछ अधिकारी इस बात से बहुत दुखी और चिंतित थे, उन्हें लगता था कि ये मैच युद्ध की भावना को कम कर देगा।
बाद में भी युद्ध विराम की कोशिश
1914 के बाद भी दोनों तरफ के उच्च कमांडों ने फिर से युद्ध विराम को जारी रखने की कोशिश की लेकिन इसके कोई फर्क नहीं पड़ा, उस दौरान कई जगहों पर भयंकर युद्ध का नजारा देखा गया। कुछ तस्वीरों में देख सकते हैं जर्मन सैनिक फुटबॉल मैच से पहले एक्सरसाइज और आराम कर रहे हैं। बता दें कि पूरी दुनिया को दहशत में डाल देने वाले पहले विश्व युद्ध की शुरुआत 28 जुलाई, 1914 को हुई थी और यह 1918 में 11 नवंबर को खत्म हुआ था।
पहले विश्व युद्ध में भारतीय सैनिकों का योगदान
पहले विश्वयुद्ध में भारतीय सेना की भी अहम भूमिका रही थी, इसमें भारत ब्रिटेन की ओर से लड़ाई लड़ रहा था। इस विश्व युद्ध में भारत के 10 लाख सैनिक शामिल हुए थे। इनमें 74,000 से अधिक शहीद हुए और करीब 60,000 से ऊपर घायल हो गए थे।



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