Coronavirus Treatment update: कानपुर में डॉक्‍टर्स ने इन 5 दवाओं से तोड़ा Covid-19 का 'चक्रव्यूह

Coronavirus Treatment Update : कानपुर मेडिकल कालेज में डॉक्टर्स ने पकड़ा कोरोना वायरस का मैकेनिज्म अब 5 दवाओं से दे रहे कोरोना वायरस को मात। एसिप्टोमेटिक पेशेंट्स नार्मल दवाओं से हो रहे ठीक 2 परसेंट से भी कम पॉजिटिव पेशेंट्स को पड़ी वेंटीलेटर की जरूरत।

Updated Date: Thu, 07 May 2020 10:41 PM (IST)

KANPUR (अंकित शुक्‍ला): Coronavirus In Kanpur Treatment Update : सिटी में कोरोना वायरस के मामले जितनी तेजी से बढ़े हैं. उतनी ही तेजी से इसके पेशेंट्स भी ठीक हो रहे हैं. अभी तक वायरस से संक्रमित 18 परसेंट पेशेंट्स ठीक हो चुके हैं. बाकी जिनका इलाज चल रहा है उनकी हालत भी दिनो दिन सुधर रही है. इस बात से डॉक्टर्स भी ताज्जुब में हैं कि जितना वेंटीलेटर्स की जरूरत को लेकर वह चिंतित थे वैसी स्थिति अभी तक आई नहीं है. वायरस से पीडि़त 2 परसेंट से भी कम पेशेंट्स को वेंटीलेटर की जरूरत पड़ी है. हालांकि इन सभी की वायरस की वजह से मौत भी हो गई. इसपर भी डॉक्टर्स का कहना है कि वह पहले से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे. अभी मेडिकल कॉलेज हो या फिर काशीराम हॉस्पिटल दोनों ही जगहों पर कोरोना पॉजिटिव पेशेंट्स को ठीक करने में बेहद बेसिक दवाओं का यूज डॉक्टर्स कर रहे हैं. जिसके बेहतर रिजल्ट भी देखने को मिले हैं. इन्हीं 5 दवाओं को लेकर मेडिकल कालेज में मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रो. प्रेम सिंह से बातचीत की गई. उन्होनें वायरस को फैलने देने से रोकने और उसे खत्म करने में इन पांच दवाओं के अफेक्ट के बारे में बताया.

डिस्ट्रेस सिंड्रोम की नौबत ही नहीं आती

एलएलआर हॉस्पिटल के कोविड आईसीयू में एक्यूट रेस्पेरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के पेशेंट्स लगातार आ रहे हैं. डॉक्टर्स का मानना है कि कोरोना वायरस के क्रिटिकल केसेस में पेशेंट्स निमोनिया और एआरडीएस के शिकार हो जाते हैं,लेकिन अभी तक चुनिंदा ही कोरोना पॉजिटिव केसेस में ऐसी नौबत आई है. सिटी में अभी कोरोना वायरस से डेथ रेट 2 परसेंट से भी कम है. हालांकि ट्रीटमेंट के दौरान पेशेंट्स के एसपीओटू के स्तर पर नजर रखी जाती है. इसके 94 परसेंट से कम होने पर पेशेंट को आईसीयू ले जाने की जरूरत पड़ती है. इसके 88 परसेंट पर होने पर पेशेंट को वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है.

इन पांच दवाओं का कर रहे यूज

एंटीवायरल ड्रग- हाइड्राक्सीक्लोरोक्वीन

एंटीबायोटिक- एजिथ्रोमाइसिन

एंटीऑक्सीडेंट- विटामिन सी

टेमी लू और इवारमेक्टिन

वायरस को कैसे खत्म करती हैं ये दवाएं

एचसीएक्यू- संक्रमित पेशेंट्स में वायरस को ह्यूमन आरएनए में घुसने से रोकता है. दवा आरएनए मे मौजूद न्यूक्लिक एसिड में वायरस को घुसने से रोकती है.

इवारमेक्टिन- यह वायरस की ग्रोथ को शरीर मे रोकती है

टेमी लू- यह वायरस की ग्रोथ के लिए जरूरी प्रोटीन नहीं बनने देती जिससे वायरस ह्यूमन आरएनए में घुसपैठ नहीं कर पाता और प्रोटीन नहीं बनने से वह कमजोर होने लगता है.

विटामिन सी- यह शरीर में एंटी ऑक्सीडेंट की तरह काम करती है. वायरस से लडऩे के दौरान हीलिंग कैपेसिटी को बढ़ाती है.

एजिथ्रोमाइसिन- यह एंटीबायोटिक ड्रग हैं. प्रेगनेंट महिलाओं समेत गंभीर बीमारियों से पीडि़त दूसरे पेशेंट्स को एचसीक्यू की जगह कई बार यह ड्रग दी जाती है.

''ज्यादातर पाजिटिव पेशेंट्स एस्प्टिोमेटिक हैं. ऐसे में इनके ट्रीटमेंट में डब्लूएचओ और आईसीएमआर की ओर से रेकमेंडेट बेसिक दवाएं ही दी जा रही है. वायरस के प्रभाव को कमजोर करने के लिए पेशेंट्स की इम्यूनिटी बढ़ाने पर भी जोर दिया जाता है. उनसे लगातार गुनगुना पानी पीने को कहा जाता है. अभी तक इसके बेहतर नतीजे सामने आए हैं. हमने आइसोलेशन वार्ड से 74 साल के डायबिटीज पेशेंट को भी वायरस से बचाया है. - प्रो. प्रेम सिंह, मेडिसिन डिपार्टमेंट,जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

ankit.shukla@inext.co.in

Posted By: Chandramohan Mishra
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