Delhi Riots History: 24 फरवरी से पहले भी दंगों से थर्रा चुकी है राजधानी, पढ़ें जब-जब कांपा दिल्ली का दिल

Delhi Riots History: देश की राजधानी एक बार फिर दंगे से थर्रा रही है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को दो संप्रदाय भिड़ने से 32 से अधिक लोगों की माैत हो चुकी और 200 लोग घायल हुए हैं। हालांकि यह कोई पहली बार नहीं इसके पहले भी दिल्ली सांप्रदायिक झड़पों की गवाह बन चुकी है। पढ़ें इसके पहले कब-कब कांपा दिल्ली का दिल...

Updated Date: Fri, 28 Feb 2020 08:34 AM (IST)

कानपुर। Delhi Riots History: दंगा कैसा भी हो उसे ठीक नहीं करार दिया जा सकता है। इसके अलावा दंगों के बीच में कोई तुलना भी नहीं की जा सकती। ऐसे में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को हुए दंगे से राष्ट्रीय राजधानी के दंगों के इतिहास में एक तारीख और दर्ज हो गई है। यहां उत्तर पूर्वी दिल्ली की सीएए के समर्थन व विरोध में हुईं हिंसा में अब तक हेड कांस्टेबल सहित 32 से अधिक माैतें हो चुकी है। वहीं करीब 200 लोग घायल हुए हैं। हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है, राष्ट्रीय राजधानी में हिंसा का पुराना इतिहास है। बीते एक दशक में राजधानी दिल्‍ली कई सांप्रदायिक झड़पों की गवाह बनी है।

2019, 2018 व 2016 में हुईं ये झड़पें

इसके पहले 2019 में मध्य दिल्ली के एक मंदिर में बर्बरता हुई, तो पुलिस ने स्थिति को समय रहते पहले ही नियंत्रित कर लिया था। वहीं 2018 में, उत्तर-पश्चिम दिल्ली के संगम पार्क क्षेत्र में दो समुदायों के सदस्य आपस में भिड़ गए थे। इस दाैरान पथराव हुआ था और इसमें छह लोग घायल हो गए। वहीं 2016 में, वाल्मीकि समुदाय के एक नाबालिग द्वारा दूसरे धर्म के एक व्यक्ति द्वारा छेड़छाड़ किए के मामले में बवाल हुआ था। यहां दो समुदाय आपस में भिड़ गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक 2016 और 2019 की घटनाओं में दोनों समुदायों के बुजुर्ग सदस्यों ने शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

2014 की दिवाली पर दंगा भी थर्राने वाला था

वहीं साल 2014 की दिवाली पर दंगा भी थर्राने वाला था। यहां दिवाली की रात त्रिलोकपुरी इलाके में एक मस्जिद के पास बवाल हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां पर देवी दुर्गा को समर्पित एक माता की चौकी कार्यक्रम के दौरान लाउडस्पीकर के कारण हिंसा शुरू हो गई। मामला बातचीत से हाथापाई और पथराव तक पहुंच गया था। हालांकि त्रिलोकपुरी के दंगों में कोई जनहानि नहीं हुई थी। तीन दर्जन से अधिक लोग झड़पों में घायल हुए थे। त्रिलोकपुरी दंगों के बाद, दिल्ली पुलिस ने अमन समितियों का गठन किया।

1984 में हुए दंगे में कांप उठी थी दिल्ली

देश में 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों में भी दिल्ली कांपी थी। उस समय भी दिल्ली का दिल कांप उठ था। राजधानी दिल्ली में हालात अधिक गंभीर थे। कानून व्यवस्था पूरी तरह धराशायी हो गई थी और लोग काफी लोग डरे-सहमे थे। 1984 के सिख-विरोधी दंगे भारतीय सिखों के विरुद्ध दंगे थे। इन दंगों में दिल्ली में 3000 से ज्यादा मौतें हुई थी।

Posted By: Shweta Mishra
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