जिला अस्पताल में आवारा कुत्तों पर नहीं है किसी का पहरा

2019-01-19T06:00:02Z

- इमरजेंसी के अंदर खड़े कर दिए जा रहे वाहन, सीसीटीवी भी खराब

- टिटनेस वार्ड में अव्यवस्था, तीन स्टार्फ नर्स के भरोसे न्यू बिल्डिंग वार्ड

GORAKHPUR: जिला अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर वार्डो में अव्यवस्था चरम पर है। ये हम नहीं कह रहे यहां का हाल बयां कर रहा है। हाल ये कि वार्डो में आवारा कुत्तों का डेरा बन चुका है। टिटनेस वार्ड में तो मरीज के पास ही कुत्ते का बच्चा सोया मिला। वहीं, न्यू बिल्डिंग का वार्ड मात्र तीन स्टाफ नर्स के भरोसे चल रहा है। स्टाफ नर्सो के लिए यहां बनाया गया नर्सिग स्टेशन पूरी तरह खाली पड़ा है। वहीं, अस्पताल प्रशासन है कि बेहतर कार्य की दुहाई देने में ही लगा है।

वार्ड के गेट पर सोते कुत्ते

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट टीम शुक्रवार रात आठ बजे जिला अस्पताल की हकीकत जानने पहुंची। यहां का नजारा हैरान करने वाला था। इमरजेंसी में जहां मरीजों के आने जाने की जगह है वहीं पर दो पहिया वाहन खड़े थे। जबकि दीवार पर लिखा है कि वाहन खड़ा करने पर जुर्माना देना होगा। इसके अलावा इमरजेंसी के अंदर जिस टेबल पर मरीजों को लिटाकर इलाज किया जाता है उस पर चादर तक नहीं थी। इमरजेंसी पूरी तरह से हाउस फुल थी और मेल और फिमेल आर्थो वार्ड में स्टाफ नर्स मरीजों को इंजेक्शन व दवाएं दे रही थी। वहीं, गलियारे में बर्न वार्ड गेट के ठीक सामने एक कुत्ता लेटा हुआ था। जबकि इस रास्ते मरीज और तीमारदारों का आना जाना होता है।

खाली रहता वार्ड का नर्सिग स्टेशन ज्यादा हैरानी तब हुई जब रिपोर्टर टिटनेस वार्ड पहुंचा। यहां मरीजों के अलावा कोई कर्मचारी नहीं थे। एक मरीज गलियारे में सोया था जिसके ठीक बगल में एक कुत्ते का बच्चा लेटा हुआ था। वार्ड के अंदर गंदगी का अंबार था और सफाई न होने की वजह से तेज दुर्गध उठ रही थी। वहीं, न्यू बिल्डिंग की तीसरे मंजिल पर जनरल वार्ड, सर्जिकल वार्ड, फिमेल वार्ड और मेडिसिन वार्ड हैं। यहां मरीजों की देखरेख के लिए नर्सिग स्टेशन बनाया गया है। लेकिन इस स्टेशन पर एक भी स्टाफ नर्स नहीं बैठती है। यह पूरी तरह खाली रहता है। जब स्टाफ नर्स से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्टाफ नर्स की बेहद कमी है। जिसकी वजह से कम स्टाफ के बीच अस्पताल को चलाया जा रहा है।

इमरजेंसी का सीसीटीवी भी बेकार

जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मारपीट के कई मामले हो चुके हैं। इसे लेकर कई बार अस्पताल प्रशासन इमरजेंसी के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात भी कह चुका है लेकिन आज तक कैमरे नहीं लगे। पुराना कैमरा इमरजेंसी के अंदर खराब होकर एक कोने में लटका हुआ है।

वर्जन

इमरजेंसी के अंदर गाड़ी खड़ी की जा रही है तो ठीक नहीं है। वार्ड में आवारा कुत्तों को भगाने के लिए स्टाफ की ड्यूटी लगाई जाती है। जहां तक सीसीटीवी कैमरे की बात है तो इसके लिए डिमांड भेजी गई है।

- डॉ। आरके गुप्ता, एसआईसी, जिला अस्पताल

Posted By: Inextlive

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