इंडियन ओलंपिक एसोसिशन पर से निलंबन हटा लेने के बाद रूस के सोची में हो रहे शीतकालीन ओलंपिक में भारत का तिरंगा लहराया गया. अब सोची में खेलों के समापन समारोह में भारतीय एथलीट अपने देश के तिरंगे तले मार्चपास्ट कर सकेंगे.


पिछले दिनों हुए इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) के चुनाव के बाद इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) ने भारत के ऊपर से निलंबन हटाने का फ़ैसला किया था.आईओसी ने एक बयान में कहा है कि उसके कार्यकारी बोर्ड ने मंगलवार को सोची में हुई एक बैठक में यह फ़ैसला लिया.आईओए के अध्यक्ष पद के लिए नौ फरवरी को हुए चुनाव में एन रामचंद्रन नए अध्यक्ष बने हैं, जो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के भाई हैं.तिरंगे तले मार्चपास्टरॉबिन मिशेल की अध्यक्षता में आईओसी का एक प्रतिनिधिमंडल इन चुनावों के दौरान मौजूद था जिसकी रिपोर्ट के बाद आईओए पर से निलंबन हटाने का फ़ैसला किया गया.ओलंपिक आयोजन के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब ओलंपिक खेलों के दौरान किसी राष्ट्रीय खेल समिति का निलंबन ख़त्म किया गया है.


आईओए पर से निलंबन हटने के बाद अब सोची शीतकालीन ओलंपिक के खेलगांव में भारतीय तिरंगा लहराया गया और 23 फरवरी को होने वाले समापन समारोह के दौरान भारतीय खिलाड़ी तिरंगे तले मार्चपास्ट करेंगे.अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति को भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन की चुनाव प्रक्रिया पर ऐतराज़ था और इसी कारण भारत को ओलंपिक से निलंबित कर दिया गया था.विवाद

निलंबन के कारण भारतीय खिलाड़ियों को सोची में देश के झंडे तले मैदान में उतरने का मौक़ा नहीं मिला था.आईओए का अध्यक्ष बनने के बाद एन रामचंद्रन ने कहा था कि उनकी प्राथमिकता सोची शीतकालीन ओलंपिक के दौरान निलंबन हटवाना है.निलंबन हटने के कारण उन एथलीटों ने भी राहत की साँस ली है, जो इस साल होने वाले राष्ट्रमंडल खेल और एशियन गेम्स की तैयारी कर रहे हैं.पूरा विवाद उस समय उठ खड़ा हुआ था, जब दिसंबर 2012 में आईओसी ने चुनाव प्रक्रिया में ओलंपिक चार्टर का पालन न करने का आरोप लगाते हुए भारत को निलंबित कर दिया था.आईओसी ने कहा था कि आईओए के चुनाव में उन लोगों को नहीं शामिल किया जाना चाहिए, जिनके ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल की गई है.

 

Posted By: Subhesh Sharma