हॉस्पिटल की कहानी शौचालय न पानी

2018-04-12T07:01:18Z

-सुख गई पानी की टंकी, प्यास बुझाने के लिए भटकते हैं मरीज व तीमारदार

-मंडलीय हॉस्पिटल की व्यवस्था हो रही फेल, अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान

सिटी की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। मंडलीय हॉस्पिटल की हालत सबसे खराब है। पीएम से लेकर सीएम तक सफाई पर जोर दे रहे है। लेकिन इसका असर यहां नहीं है। करोड़ो रुपए खर्च कर सरकार इस हॉस्पिटल को हाईटेक रूप देने की तैयारी कर रही है। हकीकत में यहां मरीजों को सामान्य सुविधाएं तक नहीं मिल रही। आउटडोर मरीजों के लिए पीने की साफ पानी की व्यवस्था है और ना शौचालय की। ऐसा तब है जब यहां आए दिन मंत्री से लेकर अधिकारी तक का दौरा हॉस्पिटल में होता रहता है।

सूख गई पानी टंकी

एसएसपीजी मंडलीय हॉस्पिटल में रोजाना हजारों मरीज आते हैं। इनके साथ आने वाले तीमारदारों की प्यास बुझाने के लिए समाजिक संस्था वाराणसी नागरिक समाज की ओर से कुछ साल पहले परमानेंट प्याउ व शौचालय की व्यवस्था की गई थी। अस्पातल प्रबंधन की ओर से किसी तरह का सहयोग नहीं मिलने से प्याउ सूख गया। शौचालय भी बदहाल हो गया है। जिसके चलते मरीजों को पानी मिल रहा न शौचालय का उपयोग कर पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्याउ तक पानी जिस बोरिंग के जरिए पहुंचता था वो सूख गया है। जिसे बनवाने में ढाई से तीन लाख का खर्च है। अधिकारी इसे हॉस्पिटल की जिम्मेदारी न मानते हुए पल्ला झाड़ रहे है। उनका कहना हैं कि जिन लोगों ने इसे लगवाया है वहीं बनवाएंगे।

ओपीडी के पीछे है व्यवस्था

अधिकारियों का कहना हैं कि आउटडोर ओपीडी में आने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों के लिए कोई वाटर कूलर नहीं है। ओपीडी के पिछले हिस्से यानी वार्डो में सभी व्यवस्था है। जब नए पेशेंट्स को डॉक्टर तक पहुंचने में घंटों भटकना पड़ता है तो फिर पानी लिए कितना भटकना पड़ेगा।

वॉर्ड के शौचालय भी गंदे

हॉस्पिटल का दावा है कि यहां के सभी वॉर्डो में पानी व शौचालय की पूरी व्यवस्था है। लेकिन हकीकत इससे दूर है। वॉर्ड में एडमिट मरीजों की माने तो यहां के शौचालयों की गंदगी देख जाने का दिल नहीं होता है। कहीं नाली जाम तो कहीं पान की पीक पड़ी है। यहां पीने का ही नहीं बाथरूम में नहाने को भी पानी नहीं मिलता। ऐसे टॉयलेट में जाना मरीजों की मजबूरी है। लेकिन उनके तीमारदार पास में बने सामुदायिक शौचालय में जाते है।

वह प्याउ हॉस्पिटल का नहीं है। स्वयं सेवी संस्था की मदद से बने इस प्याउ व शौचालय को बनवाने की जिम्मेदारी हमारी नहीं है। मरीजों लिए इमरजेंसी व वॉर्ड में व्यवस्था है।

डॉ। अरविंद सिंह, एमएस, मंडलीय हॉस्पिटल

एक नजर

315 बेड का है मंडलीय हॉस्पिटल

2500 से ज्यादा मरीज डेली आते हैं इलाज के लिए

1500 से ज्यादा मरीज होते हैं नए

1 वाटर कूलर लगा है वॉर्ड नम्बर चार के पास

1 वाटर कूलर लगा है वॉर्ड संख्या सात के पास

-1 वाटर कूलर इमरजेंसी के सामने है

-दो पानी के नल लगाए गए हैं इमरजेंसी के पास


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