#MeToo 'साहबों' के दामन पर भी हैं गहरे दाग IPS महिला अफसरों को भी नहीं मिलता इंसाफ

2018-10-09T14:03:37Z

मुंबई मायानगरी से लगातार उठ रही 'मी टू' की गूंज से यूपी की ब्यूरोक्रेसी भी अछूती नहीं है। सूबे के तमाम ब्यूरोक्रेट्स की ओछी हरकतों से उनका दामन दागदार होता रहा है।

 * आईएएस, आईपीएस के खिलाफ भी शिकायतें, नहीं मिलता इंसाफ
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जांच में दम तोड़ देती हैं छेड़खानी की शिकार महिलाओं की शिकायतें

 * विशाखा कमेटी की संस्तुतियों पर भी पूरी तरह नहीं हो सका अमल
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ashok.mishra@inext.co.in
LUCKNOW: यह बात दीगर है कि अपने रसूख के बल पर वे ऐसे मामलों में होने वाली शिकायतों को भी कफन पहना देते है। शुरुआती हंगामे के बाद बदनामी, पुलिस का रवैया और कोर्ट के चक्कर से बचने के लिए छेड़खानी का शिकार हुई महिलाएं अपने कदम वापस खींच लेती हैं। कई बार तो आलाधिकारी ही उन्हें इसके लिए बाध्य कर देते हैं। सरकारी विभागों में ऐसे मामलों से निपटने के लिए विशाखा कमेटी की संस्तुतियां ठीक से लागू न कर पाना भी इंसाफ की राह में रोड़ा बन जाती है।

अफसरों को भी नहीं बख्शा

आपको शायद यह जानकर हैरानी होगी कि तमाम महिला अफसर भी इसका शिकार बन चुकी हैं। इनमें खुद को बेहद ईमानदार करार देने वाले एक आईजी स्तर के पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं जिनके खिलाफ उनकी ही जूनियर अपने सम्मान की लड़ाई लड़ रही है। इससे पहले बसपा सरकार में एक जूनियर महिला आईपीएस के साथ ट्रेनिंग के दौरान उनके सीनियर अफसर ने छेड़खानी की कोशिश की तो उन्होंने डीजीपी मुख्यालय में आकर शिकायत दर्ज करायी। तत्कालीन आईजी कार्मिक महिला अफसर को साथ लेकर डीजीपी के पास भी पहुंची पर मामला रफा-दफा कर दिया गया। कानपुर में तैनात एक आईपीएस तो अपनी जूनियर के घर में ही घुसकर छेड़खानी करने लगे थे जिसकी गूंज राजधानी तक हुई जिसके बाद उन्हें हटा दिया गया। इसी तरह मुरादाबाद में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में डीआईजी के खिलाफ महिला अफसर ने छेड़खानी का आरोप लगाया तो शासन तक हंगामा मच गया। महिला अफसर ने उन्हें निलंबित को कराया लेकिन कोई सख्त कार्रवाई आज तक नहीं हो सकी।
ट्रेन में पकड़े गये आईएएस
कुछ साल पहले टे्रन में एक आईएएस अफसर ने महिला सहयात्री के साथ छेड़खानी की तो मामला पुलिस तक पहुंच गया। आईएएस को कोर्ट में हाजिर होना पड़ा और विभागीय कार्यवाही का सामना भी करना पड़ गया। पूर्वांचल के एक बड़े जिले में तैनात डीएम ने तो शादीशुदा महिला आईएएस से अपनी मोहब्बत का इजहार तक कर डाला था। देर रात उसे घर पर बुलाने लगे, उसने नाराजगी जताई तो ग्रामीण इलाके में उसका तबादला कर दिया। इससे नाराज महिला अफसर छुट्टी पर चली गयी और नियुक्ति विभाग को पत्र लिखकर डीएम की पोल खोल दी। हालांकि इस मामले को भी बाद में दाखिल दफ्तर कर दिया गया।
शिकायत पर ट्रांसफर, डीजीपी को पता नहीं
हैरत की बात यह है कि आम महिलाओं के साथ होने वाले इस तरह के वाकये तो आसानी से पचाने की कला अधिकारी खूब जानते हैं। यह हालिया मामला नोएडा से जुड़ा है जिसमें यूपी पुलिस की बेहद अहम शाखा में तैनात एएसपी एक महिला को वाट्सएप पर लगातार परेशान कर रहे थे। उसे देर रात अश्लील मैसेज भेजते थे। इसकी शिकायत महिला ने उच्चाधिकारियों से की जिसके बाद एएसपी का तबादला एक हजार किमी दूर नक्सली इलाके में कर दिया गया। इस बारे में डीजीपी को भी नहीं बताया गया। एक बैठक में यह मामला सामने आया तो डीजीपी ने इसे लेकर नाराजगी भी जाहिर की।
ऐसे मामलों में विशाखा जजमेंट की गाइडलाइन के मुताबिक कार्यवाही की जाती है। ज्यादातर विभागों में इसका गठन भी हो चुका है। अगर शिकायतकर्ता अपने आरोपों पर टिकी रहे तो ऐसा कोई कारण नहीं कि आरोपी अफसर पर कार्रवाई न हो। आईएएस एसोसिएशन लगातार इसे लेकर अधिकारियों को सजग करती रहती है।
- प्रवीर कुमार, अध्यक्ष, आईएएस एसोसिएशन
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Posted By: Shweta Mishra

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