वाहनों की स्पीड रोकने में इंटरसेप्टर की नहीं लगी ब्रेक

2019-05-01T06:00:17Z

क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : सिटी में वाहनों की बेकाबू रफ्तार को रोक पाने में करोड़ों रुपयों से खरीदे गए इंटरसेप्टर वाहन भी नाकाम साबित हो रहे हैं. ये इंटरसेप्टर वाहन सड़कों पर कभी कभार ही नजर आती है. गौरतलब है कि इंटरसेप्टर के जरिए स्पीड लिमिट को तोड़ने वाले वाहनों को उपकरणों में कैद किया जाता है और उन्हें ई-चालान भेजा जाता है. लेकिन, इसके संचालन को लेकर इस्तेमाल किए जा रहे तकनीक की जानकारी पुलिसकर्मियों को नहीं हो है. यही वजह है कि करोड़ों रुपए के इंटरसेप्टर बिना इस्तेमाल के तो सड़ ही रहे हैं और उसके साथ स्पीड गन रडार भी खराब हो रहा है.

स्पीड लिमिट के दावे फेल

शहर में वाहन दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह वाहनों का बेकाबू स्पीड होना है. ट्रैफिक पुलिस ने इस संबंध में कई बार दावा किया कि एक माह के भीतर वाहनों की स्पीड लिमिट कर दी जाएगी, लेकिन सारे दावे फेल हो गए हैं. स्पीड पर लगाम कसने के मकसद से ही इंटरसेप्टर को रोड पर उतारा गया था. पिछले साल सितंबर से इंटरसेप्टर वाहन सड़कों पर टहलती हुई दिख जाती है. लेकिन सिर्फ शोपीस के रुप में.

करोड़ों की लागत से खरीदे गए छह इंटरसेप्टर

पुलिस विभाग ने ट्रैफिक पुलिस को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करते हुए दुर्घटनाओं और रफ्तार पर लगाम कसने के लिए ही करोड़ों रुपयों के इन्वेस्टमेंट से पहले फेज में 6 इंटरसेप्टर खरीदे हैं. इनमें दो रांची के लिए, एक-एक गाडि़यां जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग व बोकारो को दी गई हैं. अर्टिगा कार पर अत्याधुनिक कैमरे लगे हैं, जो निर्धारित रफ्तार तोड़ने वाली गाडि़यों को पकड़ेंगे व उनका चालान काटेंगे.

स्पीड लिमिट का नहीं हो सका निर्धारण

परिवहन विभाग ने नहर निगम एरिया में स्पीड लिमिट 40 किमी प्रतिघ् ांटा रखी है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस विभाग का कहना है कि कौन सी सड़क पर वाहनों की अधिकतम स्पीड क्या होगी, इसका निर्धारण अब तक नहीं हो सका है. ऐसी स्थिति में इंटरसेप्टर खरीदें या स्पीड रडार गन, उनका शो-पीस बनना तय है.

बाइक एक्सीडेंट हो रहे हैं सबसे ज्यादा

इंटरसेप्टर के इस्तेमाल से दुर्घटना में भी कमी आएगी. तेज रफ्तार वाहन चालकों पर इससे लगाम लगेगी. खासकर युवा वर्ग, जो तेज रफ्तार में बिना हेलमेट के बाइक चलाते हैं. रांची में हर महीने एक्सीडेंट में औसतन 30 से 35 लोगों की जान जा रही है. इसमें 60 फीसदी बाइक सवार हैं, जो तेज रफ्तार के कारण दुर्घटना का शिकार होते हैं.

Posted By: Prabhat Gopal Jha

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