समर वेकेशन में बढ़ गई बच्चों की बदमाशियां बच्चों का रुटीन सही करने के लिए करा रहे हैं कॉउंसलिंग

2019-06-15T11:51:08Z

समर वेकेशन शुरू होते ही हर बच्चा खुशी से झूम उठता है एडमिशन के बाद से ही सबसे ज्यादा छोटे बच्चे समर वेकेशन का इंतजार करते हैं

- बच्चों का रुटीन सही करने के लिए अभी से लग गए पैरेंट्स

gorakhpur@inext.co.in

GORAKHPUR : समर वेकेशन शुरू होते ही हर बच्चा खुशी से झूम उठता है. एडमिशन के बाद से ही सबसे ज्यादा छोटे बच्चे समर वेकेशन का इंतजार करते हैं. इस दौरान घूमने और खेलने की पैरेंट्स भी फुल आजादी देते हैं. बच्चों का दिनभर खेलना और फिर शाम को पैरेंट्स के साथ घूमना समर वेकेशन में खूब चलता है. कई फैमिलीज तो इस दौरान हिल स्टेशन या फिर और जगहों पर घूमने भी जाती हैं. बच्चों के लिए ये दौर गोल्डेन टाइम से कम नहीं होता. अब जब समर वेकेशन खत्म होने वाला है और स्कूल्स खुलने वाले हैं तो इसको लेकर शहर के पैरेंट्स अभी से सीरियस हो गए हैं. क्योंकि इतना खेलने-घूमने के बाद अब बच्चे पढ़ाई से कतरा रहे हैं और बदमाशियां तो पूछिए मत. पैरेंट्स परेशान हैं कि बच्चों को वापस पुराने रुटीन में लाया कैसे जाए.

काउंसलर की ले रहे मदद

शहर के पॉश इलाकों में रहने वाले कुछ पैरेंट्स ने बताया कि समर वेकेशन के बाद बच्चे पढ़ाई से दिल चुरा रहे हैं. उन्हें पढ़ने के लिए बैठाओ तो थोड़ी ही देर बाद चुपके से खेलने निकल जा रहे हैं. इसके लिए उनकी क्लास टीचर का खौफ दिखा उनसे मोबाइल से बात भी कराई जाती है ताकि बच्चा डरकर ही सही पढ़ने तो बैठे. वहीं कुछ लोग काउंसलर की मदद भी ले रहे हैं कि बच्चों को किस तरह समझाया जाए कि वे अपने पुराने रुटीन में लौट आएं.

बच्चों संग खुद भी पढ़ रहे पैरेंट्स

शहर के ही एक और पैरेंट्स से बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि वे बच्चों का रुटीन सही करने में अभी से लग गए हैं. इसके लिए बच्चों को वे खुद पढ़ा रहे हैं. जब तक बच्चे पढ़ रहे हैं तब तक पैरेंट्स भी उनके साथ कोई भी किताब लेकर पढ़ते रहते हैं. उनका कहना है कि इससे बच्चे अपने पुराने रुटीन में लौट आएंगे और स्कूल्स खुलने के बाद उन्हें भेजने में भी अधिक मश्क्कत नहीं करनी पड़ेगी.

कोड वर्ड में बाहर बुलाते दोस्त

एक पैरेंट्स का कहना है कि बच्चे खेल-खेल कर बदमाश हो गए हैं. घर में बुलाओ तो उनके दोस्त कोड वर्ड भाषा का प्रयोग करके उन्हें किसी तरह बाहर फिर से बुला लेते हैं. कड़ी धूप में भी बच्चे गली में क्रिकेट खेलते रहते हैं. इन्हें जब पढ़ने के लिए बैठाओ तब इनको नींद आने लगती है. सुबह भी टाइम पर जगते नहीं हैं जबकि कुछ ही दिन बाद स्कूल्स खुलने वाले हैं.

समर वेकेशन में बच्चे ने खूब मस्ती की. दिन भर अपने फ्रेंड्स के बीच रहना चाहते हैं. इसलिए अब मैं खुद बच्चे के साथ उसका रुटीन सही करने में लग गई हूं.

- अनु पोद्दार

हिल स्टेशन घूमकर आए हैं. अभी भी बच्चा स्विमिंग तो कभी क्रिकेट की जिद्द करता है. पढ़ने को बोलो तो उसे नींद आने लगती है.

- नम्रता गोयनका


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