दुनिया विचित्रताओं का घर है और अगर इस में आस्‍था का रंग भी घुल जाये तो प्रभाव अदभुद हो जाता है। ऐसा ही एक अनोखा स्‍थान है हिमाचल प्रदेश के कुल्‍लू डिस्‍ट्रिक्‍ट में जहां खाना पकाने के लिए चूल्‍हे और आग की जरूरत नहीं पड़ती बल्‍कि झरने के पानी में भोजन पका लिया जाता है।

मणिकर्ण साहिब गुरुद्वारे के लंगर में झरने में पकता है खाना
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में भुन्तार से करीब 40 किलोमीटर दूर तकरीबन 1760 मीटर की ऊंचाई पर पावर्ती नदी के तट पर स्थित है मणिकर्ण साहिब गुरूद्वारा। ये मनाली के पास एक टूरिस्ट स्पॉट है जहां हर साल भारी तादात में पर्यटक आते हैं। गुरूद्वारे के पास मंदिर भी बना हुआ है। इसी गुरुद्वारे के लंगर में खाया जाने वाला भोजन झरने में पकाया जाता है।

गर्म पानी का है झरना
मणिकर्ण अपने गर्म पानी के चश्मों के लिए प्रसिद्ध है। इसीलिए गुरुद्वारे लंगर में बनने वाला खाना, गर्म पानी के इन्हीं चश्मों में तैयार होता है। इन गर्म चश्मों में गुरुद्वारे के लंगर के लिए बड़े बर्तनों में चाय बनती है, दाल और चावल पकते हैं। इसके अलावा दर्शन के लिए आये पर्यटकों को सफेद कपड़े की पोटलियों में चावल धागे से बांधकर बेचे जाते हैं। कहते हैं अगर यहां नवदंपती इकट्ठे धागा पकडकर चावल उबालते हैं तो उन्हें सुखद वैवाहिक जीवन का आर्शिवाद मिलता है।

 

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Posted By: Molly Seth