पूर्व अमेरिकी राजदूत ने कहा पीएम इमरान का दावा खोखला उन्होंने आतंकियों के ठिकाने को नहीं किया ध्वस्त

2019-04-13T15:16:17Z

पाकिस्तान में अमेरिका के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने कहा है कि पीएम इमरान खान के दावे खोखले हैं उन्होंने आतंकियों के ठिकाने को धवस्त नहीं किया है। यहां तक उन्होंने आतंकियों के खिलाफ देश में सख्ती भी नहीं बरती है।

वाशिंगटन (पीटीआई)। पाकिस्तान में अमेरिका के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान का हालिया बयान कहीं से यह साबित नहीं करता कि वह आतंकियों के खात्मे पर वास्तव में काम कर रहे हैं और यह बयानबाजी सिर्फ वह दुनिया में आतंकवाद को फंडिंग करने वालों पर नजर रखने वाले संस्थान FATF द्वारा ब्लैक लिस्टेड किये जाने से डर के कारण कर रहे हैं। आतंकी संगठनों पर लगाम कसने के लिए वैश्विक दबाव के बीच, खान ने पिछले महीने कहा था कि उनकी सरकार दहशतगर्दी की किसी भी तरह की गतिविधि के लिए आतंकियों को पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल नहीं करने देगी और देश में सक्रिय आतंकवादी समूहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।

पाकिस्तान के पास नहीं कोई सबूत

हक्कानी ने शुक्रवार को वाशिंगटन में एक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अभी तक, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि खान की सरकार या सेना पाकिस्तान में आतंकी शिविरों और ठिकानों को ध्वस्त कर रही है। उन्होंने कहा, 'उग्रवाद के प्रति पाकिस्तान के रवैये में थोड़ा बदलाव आया है, भारत और अफगानिस्तान में होने वाले हमलों में इसे खासकर देखा गया है।' हक्कानी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) आतंकी समूह या उसके नेता मसूद अजहर के खिलाफ भी कोई कार्रवाई करने में विफल रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कहने पर चीन ने संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को ब्लैकलिस्ट होने से बचा लिया। पिछले 30 सालों से पाकिस्तान आतंकियों का साथ देता आया है।  हक्कानी ने कहा, 'पीएम इमरान का आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने जैसा बयान एफएटीएफ द्वारा देश पर प्रतिबंध लगाने जैसी कार्रवाई को रोकने की कोशिश कर रहा है। इससे इमरान अपने राष्ट्र का अच्छे एक देश के रूप में प्रचार कर रहे हैं।
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ब्लैकलिस्ट होने पर कोई नहीं देगा कर्ज

उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अभी सही नहीं है। ऐसे में अभी सिर्फ एफएटीएफ ही खान का एकमात्र आर्थिक विकल्प होगा। इससे वह अन्य देशों और आईएमएफ से अधिक कर्ज ले सकते हैं। बता दें कि अगर एफएटीएफ पाकिस्तान को 'ग्रे' लिस्ट में ही आगे रखता है तो उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, यूरोपीय संघ जैसे बहुपक्षीय कर्जदाताओं से लोन मिलने में बहुत मुश्किल होगी।

 


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