फर्जी कंप्लेन दे रही ओरिजनल टेंशन

2019-03-10T06:00:40Z

- कंप्लेन के बाद आरटीओ के एक बाबू के दिव्यांग प्रमाण की शुरू हो गई जांच

- सीएमओ के यहां से बार-बार लेटर आने के बाद भी उपस्थित नहीं हो रहा बाबू

- आरटीओ कर्मचारियों के खिलाफ हर महीने आती हैं तीन से चार फर्जी शिकायतें

GORAKHPUR: आरटीओ विभाग में इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। यहां के कर्मचारियों की ट्विटर से लगाए पीएम और सीएम के पोर्टल पर आए दिन शिकायत हो रही है। जिससे कर्मचारियों पर जांच की तलवार लटकी रहती है। वहीं जब शिकायतकर्ता का पता किया जाता है तो उसका कुछ पता नहीं चलता है। लेकिन इन फर्जी शिकायतों के बाद जांच की फार्मेल्टी शुरू हो जाती है। इसी तरह आरटीओ के एक बाबू जिसका दिव्यांगता के आधार पर ट्रांसफर रुका हुआ है, उसकी भी शिकायत हुई है। जिसके बाद से बाबू की दिव्यांगता की जांच के लिए लगातार सीएमओ के यहां से लेटर आ रहा है। इसके बाद भी बाबू जांच कराने सीएमओ ऑफिस नहीं जा रहा।

दिव्यांगता पर उठाया सवाल

बांसगांव के राममिलन सिंह ने आरटीओ के बाबू बेचन प्रसाद की शिकायत परिवहन मंत्री, परिवहन आयुक्त, डीएम और सीएमओ से की है। राममिलन ने आरोप लगाया है कि बेचन प्रसाद 25 साल से एक पटल पर जमे हुए हैं। कुछ दिन पहले इनका ट्रांसफर भी हुआ था जिसे सांठ-गांठ करके दिव्यांगता सार्टिफिकेट के आधार पर बेचन ने रुकवा लिया। राममिलन का आरोप है कि ये कहीं से भी दिव्यांग नहीं हैं। सीएमओ मेडिकल बोर्ड गठित कर इनकी जांच करें।

शिकायत पर सीएमओ ने भेजा लेटर

शिकायत के बाद सीएमओ ने आरटीओ के बाबू को लेटर भेजकर जांच के लिए बुलाया है लेकिन बेचन प्रसाद जा नहीं रहे। वहीं आरटीओ प्रशासन का कहना है कि सोमवार को बाबू बेचन प्रसाद जांच कराने सीएमओ ऑफिस जाएंगे। इसका लेटर बनाकर उन्होंने सीएमओ को भेज दिया है।

बॉक्स

महिला कर्मचारी पर भी लगाए आरोप

इसी तरह आरटीओ ऑफिस में तैनात एक महिला कर्मचारी के खिलाफ भी किसी ने शिकायत की है। जिसके बाद शिकायतकर्ता का पता करने पर उसका घर और मोबाइल नंबर दोनों ही गलत निकला। मोबाइल पर कई बार ट्राई करने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला। लेकिन इस शिकायत ने महिला कर्मचारी की टेंशन जरूर बढ़ा दी है।

ट्विटर पर खोला था मोर्चा

अभी कुछ ही दिनों पहले एक शख्स ने पीएम, सीएम, परिवहन विभाग के पोर्टल पर गोरखपुर के आरटीओ प्रवर्तन की शिकायत की थी। जिसके बाद शिकायत पत्र पर अंकित मोबाइल नंबर पर उससे कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। यही नहीं आरटीओ के खिलाफ आए दिन ट्विटर पर नई-नई शिकायतें भी वो करता रहा इसके बाद जब उसकी तलाश शुरू हुई तो उसने अपना ट्विटर हैंडल ही बंद कर दिया।

वर्जन

महीने में चार-पांच शिकायतें ऐसी आ जाती हैं जो कर्मचारियों को टेंशन दे जाती हैं। इनमें शिकायतकर्ता का भी पता नहीं चलता है।

- श्याम लाल, आरटीओ प्रशासन


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