अमेरिका में ब्याज दर बढऩे की आशंका ने सोमवार को दलाल स्ट्रीट समेत दुनिया भर के बाजारों को झकझोर डाला. यह आशंका फरवरी में अमेरिकी रोजगार के आंकड़े करीब सात साल में सबसे बेहतर रहने की वजह से पैदा हुई. इसकी वजह से सेंसेक्स छह सौ अंक से ज्यादा का गोता लगा 29 हजारी आंकड़े से नीचे आ गया.


बंबई शेयर बाजार (बीएसई) के इस संवेदी सूचकांक में भी दो माह की सबसे बड़ी गिरावट है. इस दिन भारतीय मुद्रा भी 39 पैसे कमजोर होकर दो महीने के निचले स्तर 62.56 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई. क्या रहा दलाल स्ट्रीट का हालहोली बाद खुले बाजार में कल का दिन काला सोमवार साबित हुआ. इस दिन सेंसेक्स कमजोरी के साथ खुला. बाद में निवेशकों की भारी बिकवाली से सेंसेक्स 604.17 अंक यानी 2.05 फीसद लुढक़कर 28844.78 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह एक समय 28799.76 अंक का निचला स्तर भी छू गया. इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 181 अंक यानी 2.03 फीसद गिरकर 8756.75 पर बंद हुआ. 


फार्मा को छोडक़र बीएसई के अन्य सभी सूचकांक गिरावट पर बंद हुए. बैंकिंग, पावर, रीयल्टी, कैपिटल गुड्स, मेटल व आइटी शेयरों पर बिकवाली की मार पड़ी. मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों में भी मुनाफावसूली हावी रही. बीएसई का मिडकैप सूचकांक भी करीब एक से डेढ़ फीसद फिसल गए. सेंसेक्स की तीस कंपनियों में 26 के शेयर लुढक़ गए, जबकि चार में बढ़त दर्ज हुई. बीएसई में गिरने और बढऩे वाले शेयरों का अनुपात दो और एक का रहा. क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट

अमेरिका में रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहने के कारण वहां ब्याज दरों में वृद्धि की आशंका बढ़ गई. इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर हुआ. इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में 39 पैसे की कमजोरी के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगा गया. अब अगर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरें बढ़ाने का एलान करता है तो इससे भारतीय बाजार से विदेशी निवेशक पैसे निकालेंगे. इससे शेयरों के साथ रुपया भी प्रभावित होगा. बीते साल 30 प्रतिशत तेजी के बाद इस साल अब तक सेंसेक्स करीब 1500 अंक चढ़ा है. शेयरों के ऊंचे दामों की वजह से मुनाफा काटना फायदेमंद लग रहा है.वहीं रिजर्व बैंक की तरफ से नीतिगत ब्याज दर घटाने के बावजूद कंपनियों की आय में तेज वृद्धि के आसार नहीं हैं. इसमें कम से कम दो तिमाहियों का समय लगेगा. देश की दिग्गज आइटी कंपनी टीसीएस के चौथी तिमाही में आमदनी में इजाफा होने की गुंजाइश कम है. इस कारण बाजार में निराशा का माहौल बना है. इतने खराब भी नहीं हालात

हालाकि सिचुएशन इतना ज्यादा घबराने वाली भी नहीं है. हालाकि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता दिख रहा है, लेकिन यह कमजोरी अन्य विकासशील देशों की मुद्राओं के मुकाबले कम है. सच ये है कि रुपया कमजोर नहीं हो रहा बल्कि डॉलर मजबूत हो रहा है. साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी हालात लगातार सुधर रहे हैं. लिहाजा आगे बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है. अगले 12 माह का रिटर्न 12 फीसद तक रह सकता है. जिससे आगामी दो वर्ष के रिटर्न बेहतर भी हो सकते हैं, क्योंकि अर्थव्यवस्था लगातार सुधर रही है. हालांकि, अभी कंपनियों की आय में खास बढ़ोतरी नहीं हो रही है, लेकिन 2016 के दौरान इसमें 13-15 फीसद और 2017 में 22 प्रतिशत तक वृद्धि की गुंजाइश है.

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Posted By: Molly Seth