दुर्लभ महोदय में 71 वर्ष बाद मौन स्नान

2019-01-26T06:00:10Z

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-चार फरवरी को पड़ रहा है शाही स्नान मौनी अमावस्या

-सोमवती व मौनी अमावस्या पर बन रहा है महोदय योग

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कुंभ मेला का दूसरा प्रमुख शाही स्नान पर्व मौनी अमावस्या चार फरवरी को पड़ रहा है। इस बार सोमवती व मौनी अमावस्या पर महोदय योग बन रहा है। यह दुर्लभ योग 71 वर्ष बाद कुंभ के दौरान बन रहा है। इस योग में गंगा स्नान, दान पुण्य करने से राहु, केतु व शनि से संबंधित कष्टों से मुक्ति मिलेगी। ज्योतिषाचार्य पंडित विद्याकांत पांडेय की मानें तो अमावस्या के साथ-साथ सोमवती अमावस्या का अद्भुत संयोग बन रहा है। साथ ही श्रवण नक्षत्र, वियातिपाद योग और सर्वार्थ सिद्धि योग की भी निष्पत्ति हो रही है। हालांकि सामान्य रूप से भी सर्वार्थ सिद्धि योग विशेष होती है लेकिन कुंभ होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

महोदय योग का महत्व

महोदय योग में गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के पावन त्रिवेणी तट पर स्नान करने। पूजा-पाठ करने और दान करने से अन्य दिनों में किए गए स्नान, स्नान-दान से कई गुना अधिक पुण्य फल साधक को मिलत है। ज्योतिषाचार्य पंडित विनय कृष्ण तिवारी ने बताया कि माघ महीने की अमावस्या तिथि चार फरवरी को है। उस दिन सोमवार भी है। इस दिन श्रवण नक्षत्र, व्यातिपात योग, सर्वार्थ सिद्धि योग व सोमवार होने से महोदय योग बन रहा है।

नौ फरवरी 1948 को था ऐसा संयोग

ज्योतिषीय गणना के अनुसार कुंभ के दौरान महोदय योग इससे पहले नौ फरवरी 1948 के कुंभ में बना था। इतना ही नहीं अमृत का ग्रह चंद्रमा अपने ही नक्षत्र में होगा। देव गुरु और दैत्य गुरु के बीच सुंदर संबंध बने रहेंगे। राहु और बृहस्पति एक साथ होंगे और शनि व सूर्य के संबंध की वजह से मौनी अमावस्या पर्व लाभकारी सिद्ध होगा।

इस दिन दान का विशेष महत्व

मौनी अमावस्या पर मौन रहकर डुबकी लगाने का अनंत फल प्राप्त होता है। इस दौरान त्रिवेणी तट पर स्नान व दान का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषाचार्य श्री पांडेय की मानें तो इस विशेष दिन मौन रहकर काले तिल के साथ भगवान सूर्य को अ‌र्घ्य देना नहीं भूलना चाहिए। सूर्योदय के बाद और सुबह 7.08 बजे तक किए गए दान का अनंत फल प्राप्त होता है और मनोकामना की पूर्ति होती है।

माघ महीने में पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है। इस बार तो 71 वषरें के बाद महोदय योग की निष्पत्ति हो रही है। ग्रहों का अद्भुत संयोग अमावस्या को और भी अधिक खास बना रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि सोमवार के अमावस्या पड़ रही है। जिसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इसमें सर्वार्थ सिद्धि योग जुड़ रहा है।

-पंडित विद्याकांत पांडेय, ज्योतिषाचार्य


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