रेपिस्टों के खिलाफ लड़ी निर्णायक लड़ाई

2019-12-08T05:46:07Z

ममेरे भाई ने दोस्तों के साथ तीन दिनों तक किया रेप, अकेले किया संघर्ष, भेजवाया जेल

रिलेटिव व चाची-चाची डाल रहे थे घटना पर पर्दा

mukesh.chaturvedi@inext.co.in

PRAYAGRAJ: 2014 में घटना हुई थी। दिन और तारीख ठीक से याद नहीं। उस वक्त उसकी उम्र करीब आठ साल ही थी। मां-पिता जी की असमय मौत के बाद चाचा-चाची उसका सहारा थे। चाचा के साले के लड़के की नीयत डोल गई और उसने वह कर दिया जिसके बारे में वह सपने में भी नहीं सोच सकती थी।

ममेरे भाई ने दोस्तों के संग किया रेप

घटना का शिकार युवती ने अपनी साथ हुई घटना के बारे में बताते हुए कहा कि एक दिन उनका रिलेटिव चाचा को यह बताकर साथ ले गया कि मां ने बुलाया है। संयोग से इस इंफॉर्मेशन को उन्होंने क्रास चेक नहीं किया। चाचा के साले का लड़का उसे लेकर निकला और घर जाने के बजाय सिटी में रहने वाले अपने दोस्त के यहां आ गया। यहां दबाव बनाकर उसने न सिर्फ खुद आबरू लूटी बल्कि दोस्तों को भी इस कुकृत्य में शामिल कर लिया। तीन दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा। एक दिन मौका पाकर युवती तीनों रेपिस्ट के चंगुल से भाग निकली। घर पर उसे देख सभी दंग रह गए। शिकंजे से उसके भाग जाने के बाद तीनों युवकों ने फिर एक और चाल चली। ममेरे भाई ने युवती के चाचा को बताया कि वह रास्ते से न जाने कहां भाग गई है। वह अपने दोस्त के साथ तीन दिन से उसकी तलाश कर रहा है, लेकिन मिल ही नहीं रही।

बंटवा ली थी मां-बाप की जमीन

घर पहुंची युवती ने अपने साथ हुए गैंगरेप की बात बताई तो उल्टे उसी पर सभी शक करने लगे। वह सुबकती रही। नाते रिश्तेदार इकट्ठा हुए और केस को रफादफा करने की तैयारी कर लिए। चूंकि उसके मां बाप थे नहीं, लिहाजा उसकी बात कोई सुनने वाला नहीं था। यह देख युवती ने साहस जुटाया और चाचा से कहा कि वह पिता के हिस्से का घर व खेत बांट दें। यह देख चाचा ने उसकी पिटाई शुरू कर दी। कुछ रिश्तेदारों ने दबाव बनाया और बंटवारा हो गया। उसने गांव के एक व्यक्ति को एक बीघा खेत 40 हजार रुपये में दो साल के लिए दे दिया और गांव के ही एक व्यक्ति से मदद की गुहार लगाई। उसकी बातें सनने के बाद युवक भावुक हो उठा और मदद को तैयार हो गया। अधिवक्ता होने के नाते उसने पैरवी कर आरोपित के खिलाफ केस दर्ज करवाया। गिरफ्तारी हुई तो उसके दोनों दोस्त भी पकड़े गए।

यह पहला केस ऐसा था, जिसमें मैं प्रोफेशन से हटकर भावुकता के साथ उसकी मदद में लगा था। उसने जिस मुसीबत में संघर्ष किया। वह काबिल तारीफ था। उसने खुद से शादी की, यहां तक तो पता है। इसके बाद क्या हुआ यह मालूम नहीं, क्योंकि शादी के बाद फिर वह मुकदमे की पैरवी के लिए भी नहीं आ रही।

एसएन मिश्र,

अधिवक्ता

Posted By: Inextlive

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