क्योंकि ये तराजू इंसाफ नहीं करती

2013-08-18T16:25:06Z

Patna यूं तो हरी सब्जी के रेट में आग लगी हुई है लेकिन प्याज के बाजार ने चारों तरफ हाहाकार मचा दिया है 60 रुपए में पांच किलो मिलने वाला प्याज होलसेल मार्केट में किलो के हिसाब से बिक रहा है यह रिटेल तक पहुंचतेपहुंचते 70 रुपए प्रति किलो चला जाता है

पसीने जरूर छूटने लगे हैं
इस बीच कस्टमर के पसीने जरूर छूटने लगे हैं, लेकिन होलसेल मार्केट से लेकर रिटेल मार्केट में जमकर लूट मची है. आपको जानकर हैरत होगा कि मंडियों में जिस तराजू से सब्जी तौली जा रही है उसमें 70 परसेंट गलत है. इसे माप-तौल विभाग सही नहीं मानता है. यह मानक के हिसाब से पूरी तरह गलत है. इसके बाद भी चारों तरफ लूट की छूट दी गयी है. माप-तौल विभाग के स्टाफ से लेकर ऑफिसर तक दफ्तरों में आराम फरमाते रहते हैं. इनकी मानें तो इनके पास साधन की कमी है. इसलिए कहीं निकलने से अच्छा दफ्तर में रहना पसंद करते हैं. इन लोगों को इसकी जानकारी भी है कि किसी भी होलसेल मंडी या रिटेलर शॉप पर नेशनल माप-तौल एक्ट का पालन नहीं हो रहा है.


हर मंडी में तौला जाता कम
अंटा घाट, मीठापुर मंडी, शास्त्री नगर, राजेंद्र नगर मंडी से लेकर बाजार समिति तक जमकर लूट मची है. इसके अलावा ठेले पर सजी मंडी में भी माप-तौल का ख्याल नहीं रखा जाता है. नाम न छापने की शर्त पर माप-तौल विभाग के स्टाफ बताते हैं कि सड़क किनारे वाले से लेकर बड़ी मंडी तक में लूट मची है. कस्टमर को सही वजन नहीं दिया जाता है, लेकिन हम क्या करें.  

जांच की करते खनापूर्ति
माप-तौल विभाग के ऑफिसर ने बताया कि साल में एक बार भी अगर जांच हो तो बड़ी बात है. लेकिन यहां किसी तरह की फैसिलिटी नहीं दी जाती है. अगर इंस्पेक्टर जांच के लिए जाता है और हंगामा होता है तो उसकी सिक्योरिटी तक पर किसी का ध्यान नहीं रहता है. किसी तरह साल में एक बार जांच कर ली जाती है, जबकि हर दिन इंस्पेक्टर की ओर से जांच अभियान चलाना चाहिए. ताकि पटनाइट्स को मूल्य के हिसाब से उसकी सही मात्रा मिल पाए.

होलसेल से ही मची रहती लूट
लूट की मार डायरेक्टर कस्टमर के सिर पर ही नहीं पड़ती है. होलसेल से सामान लाने वाले रिटेलर के ऊपर भी इसकी मार पड़ती है. रिटेलर सुबोध कुमार ने बताया कि बटखरे में पत्थर का यूज करने का मतलब ही यही होता है कि माप में कम करना. आखिर होलसेल में हम लुटते हैं तो इसकी भरपाई के लिए किसी न किसी तरह का तिकड़म लगाना ही पड़ता है. शास्त्रीनगर होलसेल मार्केट में हर दिन क्विंटल के हिसाब से सब्जी की खरीद फरोख्त होती है, लेकिन माप के लिए कई जगह पत्थर का ही यूज किया जाता है.
आप मंडी में इन बातों का रखें ख्याल
- तराजू लोहे का हो, खासकर उसके हैंडल में कांटा लगा हो.  
- हैंडल लकड़ी का है तो उससे सब्जी न खरीदें, उसका वजन स्टैंडर्ड मानक को फकॅलो नहीं करता है.
- उस पर उमाचरण कर्मकार जरूर लिखा होना चाहिए, यह बनाने वाले का नाम है. इसके मानक को मान्यता मिली है.
- हैंडल पर रस्सी या धागा तो नहीं लगा है, अगर है तो वो गलत है.
-  बटखरे की जगह पत्थर या ईंट का इस्तेमाल तो नहीं कर रहा है.
- बाट की कटिंग सही है या नहीं, साथ ही शॉप पर माप-तौल का परमिशन सर्टिफिकेट है या नहीं.
- जब वजन को तराजू पर उठाया जा रहा है तो उसके कांटों पर नजर रखें.
- अमूमन बीच की अंगुली से कांटे को दबा दिया जाता है इससे सही मात्रा नहीं मिल पाती है.
- तराजू का नीचे का हिस्सा टूटा तो नहीं है या लोहे की चेन घूमाकर मोड़ी तो नहीं गयी है.
- तराजू और बाट मान्यता प्राप्त एजेंसी के यहां से ही खरीदनी चाहिए.
- तराजू पर चढ़ा हुआ सामान अधिक गीला है या फिर गंदा है तो उसे ठीक से तौलने को कहें.
ऐसे देते हैं कम वजन
- पानी से भींगी या मिट्टी लगी सब्जी लोकल समझ कर लेने पर वजन कम मिलता है.
- सब्जी और साग को ताजा रखने के लिए लगातार उसे पानी से भिंगाया जाता है इससे वजन बढ़ जाता है.
- मछली और मीट के साथ भी यही होता है, कमोबेश पानी की मात्रा को ही तौल दिया जाता है या तराजू के एक तरफ लोहे की कील लटका दी जाती है.
कहां से खरीद सकते हैं तराजू
भारत सरकार की ओर से निर्धारित कंट्रोलर लिगल मेट्रोलॉजी बिहार की ओर से सौ रुपए का लाइसेंस मिलता है. इसके बाद ही आप तराजू की बिक्री कर सकते हैं. शहर में ऐसे दो दर्जन से अधिक हार्डवेयर के शॉप हैं जिसे तराजू और बाट बेचने का लाइसेंस मिला हुआ है. इसमें बनाने वाले, बेचने वाले और मरम्मत करने वाले तीनों लाइसेंसधारी होते हैं. ताकि वजन में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी न हो.
जांच के लिए छह स्टैंडर्ड माने गए हैं
कमर्शियल स्टैंडर्ड
वर्किंग स्टैंडर्ड बाट और माप
द्वितीय मानक बाट और माप
रिफ्रेंस मानक बाट और माप
प्रोटो टाइप मानक बाट और माप
इंटरनेशनल मानक बाट और माप
(रिफरेंस, प्रोटो टाइप और इंटरनेशनल मानक बाट और माप की जांच भुवनेश्वर में होती है.)
बाट की जांच करानी है जरूरी
माप-तौल विभाग की मानें तो हर किसी को बाट की खरीदारी के बाद उसकी जांच माप-तौल विभाग में आकर करानी चाहिए. इस दौरान वर्किंग स्टैंडर्ड बाट और माप से उसकी जांच होती है. अगर उसमें गड़बड़ी रहती है तो बाट के पीछे भरकर उसे पूरा कर दिया जाता है. लेकिन अब तक ऐसी जांच कराने वालों की संख्या नहीं के बराबर है.
सब्जी मार्केट में आपकी जेब पर दोहरी मार पड़ रही है. एक तरफ महंगाई तो दूसरी तरफ कम वजन की वजह से घर लाई गई दो दिन की सब्जी एक दिन में ही हो जाती है खत्म. यह कोई एक मंडी की कहानी नहीं है. शास्त्रीनगर सब्जी मंडी, अंटा घाट, मीठापुर सब्जी मंडी, गर्दनीबाग मार्केट, राजेंद्र नगर ओवर ब्रिज के नीचे हर दिन किलो में 125 ग्राम तो मार ही लिया जाता है. वैसे आप जितना कम सब्जी लेंगे माप में उतनी कम लूट की गुंजाइश रहती है.



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