भारत के पूर्व कप्‍तान सौरव गांगुली चाहते थे कि 2003 वर्ल्‍डकप में धोनी उनकी टीम में होते। मगर ऐसा संभव ही नहीं था क्‍योंकि माही उस टाइम रेलवे की नौकरी करते थे। गांगुली ने अपनी ऑटोबॉयोग्रॉफी में करियर से जुड़ी तमाम बातें शेयर की हैं। आइए जानते हैं...


गांगुली ने अपनी ऑटोबॉयोग्राफी में किए खुलासेपूर्व क्रिकेटर और भारतीय कप्तान रहे सौरव गांगुली को धोनी से पहले भारत का सबसे सफल कप्तान माना जाता था। विराट कोहली के अंदर जो एग्रेशन देखने को मिलता है उसकी नींव गांगुली ने ही रखी थी। दादा का करियर जितना शानदार रहा, उतना ही चर्चित उनका व्यवहार रहा। इन्हीं किस्सों को लिखा है उन्होंने अपनी ऑटोबॉयोग्रॉफी में। दादा ने अपनी आत्मकथा 'A Century is Not Enough' में इंटरनेशनल क्रिकेट से जुड़ी कई बातें शेयर की हैं। सौरव ने एमएस धोनी की तारीफ करते हुए कई बातें भी लिखी हैं।धोनी-गांगुली की रही है अच्छी बांडिंग
आपको बताते चलें कि धोनी को अपने इंटरनेशनल करियर में डेब्यू करने का मौका दादा की कप्तानी में ही मिला था। इसके बाद धोनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह दिनों-दिन सफलता की सीढ़ी चढ़ते गए और गांगुली से आगे निकल गए। इस बात पर दादा कहते हैं कि, 'आज मैं बहुत खुश हूं, धोनी को लेकर जो मेरा अनुमान था वो सही साबित हुआ। यह शानदार है कि धोनी ने आज अपने आपको एक बड़े खिलाड़ी के रूप में स्थापति किया।' करीब 10 साल पहले संन्यास ले चुके गांगुली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट खेलकर इंटरनेशनल करियर को अलविदा कह दिया था। हालांकि उस वक्त धोनी ने भी दादा के आखिरी मैच में बतौर सम्मान उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपी थी।धोनी ने अपने हेलमेट से हटाया तिरंगा, यह अपमान नहीं सम्मान है जानिए कैसे

Posted By: Abhishek Kumar Tiwari