50 हजार में डिग्री मंगाकर करते फर्जीवाड़ा

2019-07-20T06:00:13Z

एसटीएफ गोरखपुर ने देवरिया से रैकेट के सरगना को दबोचा

गोरखपुर और सिद्धार्थनगर जिले में हो चुकी है गिरफ्तारियां

GORAKHPUR:

देवरिया में फर्जी तरीके से एजुकेशनल सर्टिफिकेट बनाकर सहायक अध्यापक की नौकरी दिलाने वाले रैकेट के सरगना सहित दो को एसटीएफ ने अरेस्ट किया। एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज के निर्देश पर गोरखपुर एसटीएफ की टीम ने इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश सिंह की अगुवाई में कार्रवाई की। बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी दिलने वाले सरगना और उसके सहयोगी के पास से कार, पांच मोबाइल फोन, फर्जी मार्कशीट, नकदी, विभिन्न संस्थाओं की फर्जी मुहर, नकली निवास प्रमाण पत्र, तीन नकली अंगूठा का निशान और खंड शिक्षाधिकारी की मुहर बरामद हुई। गिरफ्तार सरगना अश्वनी के मोबाइल फोन में हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, विभिन्न विश्वविद्यालयों और टेट के बिना सिग्नेचर बनाए हुए मार्कशीट बरामद हुए। एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने बताया कि अयोग्य व्यक्तियों की नियुक्ति कर नौकरी किए जाने के संबंध में विभिन्न थानों में मुकदमे दर्ज हैं। 50 हजार रुपए में विभिन्न कालेज की मार्कशीट कोरियर से मंगाकर उसका क्लोन तैयार किया जाता था।

फर्जी दस्तावेज बनाकर दिलाते थ्ो नौकरी

एसटीएफ को सूचना मिली कि देवरिया जिले के बरडीहा, खुखूंदु निवासी निवासी अश्वनी कुमार श्रीवास्तव फर्जी दस्तावेज के जरिए शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहा है। उसकी तैनाती सिद्धार्थनगर जिले के पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरोधर कठौजिया, भगवानपुर ब्लाक में है। 30 मार्च को एसटीएफ ने सिद्धार्थ नगर में राकेश सिंह को अरेस्ट किया था। तब यह बात पता लगा कि अश्वनी श्रीवास्तव फर्जीवाड़ा का रैकेट चलाता है। वह मार्कशीट सहित अन्य दस्तावेज तैयार करके कई लोगों को नौकरी दिला चुका है। फर्जी मार्कशीट के सहारे बड़हलगंज में शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहा मुक्तिनाथ भी उससे मिलने देवरिया पहुंचेगा। इस सूचना पर गुरुवार रात एसटीएफ ने अश्वनी के घर दबिश दिया।

कोरियर से मंगाकर मार्कशीट, करते फर्जीवाड़ा

एसटीएफ ने अश्वनी और मुक्तिनाथ को पकड़ लिया। अश्वनी ने बताया कि उसके पिता का असली नाम लक्ष्मीशंकर है। जबकि, उसने कुंवर बहादुर के नाम से अंक पत्र बनाया है। 2015 में कस्तूरी पांडेय की मौत हो गई, जिसकी मार्कशीट को टैंपर करके अपने नाम से बना लिया। वह लोग विभिन्न डिग्री कालेज, यूनिवर्सिटी की मार्कशीट कोरियर मंगाते हैं। फिर फर्जीवाड़ा कर उसे किसी के नाम बना देते हैं। 50 हजार रुपए में मिलने वाली बाहरी मार्कशीट के वेरीफिकेशन के लिए संबंधित बाबू को रुपए देकर फेवर में करते हैं। टेट और सी-टेट में भी जमकर फर्जी मार्कशीट का खेल किया गया है। वर्ष 2010 से फर्जीवाड़ा का गैंग काम कर रहा है। इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में एसटीएफ जुटी है।


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