Kamlesh Tiwari Murder Case महज 2 किमी दूर ही थे हत्यारे पुलिस सूरत में तलाशती रही

2019-10-21T10:29:15Z

कमलेश तिवारी हत्याकांड की जांच में शुरुआत से चूक कर रही लखनऊ पुलिस हमलावरों के ठिकाने का पता लगा पाने में फेल साबित हुई।

लखनऊ (ब्यूरो)। वारदात को अंजाम देने वाले हमलावरों ने राजधानी के कैसरबाग स्थित भीड़भाड़ भरे गुरु गोविंद सिंह मार्ग पर होटल खालसा इन को अपना ठिकाना बनाया। पुलिस को इसकी भनक तब लगी जब होटलकर्मियों ने हत्यारोपियों के फरार होने के एक दिन बाद खुद पुलिस से संपर्क कर इसकी जानकारी दी। मौके पर पुलिस व फॉरेंसिक टीम ने होटल के कमरे से हमलावरों द्वारा वारदात के वक्त पहने खून से सने कपड़े, सिम कार्ड का पैकेट व अन्य सामान बरामद किया है।
एक रात पहले किया था चेकइन

होटल खालसा इन के रिशेप्सनिष्ट अनस अंसारी के मुताबिक, बीती 17 अक्टूबर की रात 11.08 बजे दो युवक सूरत के जिलानी अपार्टमेंट निवासी शेख अशफाकुल हुसैन और मोइनुद्दीन पठान कमरा लेने पहुंचे थे। उन्होंने कमरा लेने के लिये आईडी प्रूफ के रूप में आधार कार्ड दिखाया। जिसके बाद उन्हें होटल के बेसमेंट में स्थित रूम नंबर जी-103 दिया गया। अगले दिन सुबह 10.35 बजे वे दोनों रूम से बाहर निकले। उनमें से एक ने भगवा कुर्ता तो दूसरे ने लाल रंग का कुर्ता पहन रखा था। अशफाकुल के हाथ में मिठाई का डिब्बा था। उन लोगों ने बताया कि वे किसी दरगाह हजरत अब्बास पर जियारत करने जा रहे हैं। उन्होंने दरगाह जाने के लिये साधन के बारे में भी पूछताछ की। तीन मिनट तक रिशेप्सन पर रुकने के बाद वे दोनों चले गए।
कपड़े बदल फिर चले गए
अनस ने बताया कि 18 अक्टूबर को दोपहर करीब 1.21 बजे अशफाकुल और मोइनुद्दीन वापस लौटे। वे थोड़े से परेशान लग रहे थे। रिशेप्सन से रूम की चाभी लेने के बाद वे कमरे में चले गए। 15 मिनट में रूम में रहने के बाद उन्होंने कपड़े बदले और फिर बाहर निकल आए। एक बार फिर रिसेप्शन में चाभी देने के बाद उन दोनों ने शाम को वापस लौटने की बात कही और होटल से चले गए। अनस ने बताया कि पूरी रात और शनिवार रात तक जब अशफाकुल और मोइनुद्दीन नहीं लौटे तो उसने पुलिस को इसकी सूचना दी।
तथ्य एक नजर में
- लखनऊ पुलिस की चूक फिर उजागर, होटलकर्मियों ने दी पुलिस को सूचना
- कमरे से खून से सने कपड़े, सिम कार्ड का पैकेट व अन्य सामान बरामद
- होटल की सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए हत्यारे, वारदात के बाद कपड़े बदलकर हुए फरार
कमरे से बरामदगी
- हमलावरों द्वारा पहने गए भगवा व लाल रंग का कुर्ता
- हत्या में इस्तेमाल खून से सना चाकू
- शेविंग किट
- जियो सिम कार्ड का पैकेट
- लोअर
- दो एयर बैग
हत्यारों ने कब कब क्या किया
17 अक्टूबर
- रात 11.08 बजे दो युवक सूरत के जिलानी अपार्टमेंट निवासी शेख अशफाकुल हुसैन और मोइनुद्दीन पठान कमरा लेने पहुंचे।
- आईडी प्रूफ के रूप में आधार कार्ड दिखा बेसमेंट के रूम नंबर जी-103 कमरा लिया।
18 अक्टूबर
- सुबह 10.35 बजे दोनों रूम से बाहर निकले। उनमें से एक ने भगवा कुर्ता तो दूसरे ने लाल रंग का कुर्ता पहन रखा था।
- अशफाकुल के हाथ में मिठाई का डिब्बा था। उन लोगों ने बताया कि वे किसी दरगाह हजरत अब्बास पर जियारत करने जा रहे हैं
- तीन मिनट तक रिशेप्सन पर रुकने के बाद वे दोनों चले गए।
- दोपहर करीब 1.21 बजे अशफाकुल और मोइनुद्दीन वापस लौटे। रिशेप्सन से रूम की चाभी लेने के बाद वे कमरे में चले गए।
- 15 मिनट में रूम में रहने के बाद कपड़े बदले और फिर बाहर आकर रिसेप्शन में चाभी दी और निकल गए।  
खून से सने कपड़े बरामद
जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस ने रजिस्टर चेक किया तो कमरे में रुके युवक सूरत के निकले। शक होने पर कमरे की जांच की तो उनके होश उड़ गए। कमरे में हमलावरों द्वारा पहने गए भगवा व लाल रंग का कुर्ता, हत्या में इस्तेमाल खून से सना चाकू, शेविंग किट, जियो सिम कार्ड का पैकेट, लोअर व दो एयर बैग बरामद किये। हमलावरों के रुकने की पुष्टि होने पर पुलिस ने फॉरेंसिक टीम को बुलाया। जिसने सुबूत इकट्ठा किये।
पुलिस करती रही चूक दर चूक
कमलेश तिवारी की हत्या के बाद जांच में लखनऊ पुलिस चूक दर चूक करती रही। वारदात के बाद जहां पुलिस इसे व्यक्तिगत रंजिश का मामला बताती रही। वहीं, गुजरात एटीएस द्वारा तीन आरोपी पकड़े जाने पर उसके सुर बदल गए। वहीं, वारदात के बाद पुलिस ने हमलावरों के ठिकाने का पता करने के लिये भी जहमत नहीं उठाई। यही वजह है कि असली आईडी पर रुके हमलावरों का पता तब चल सका जब होटलकर्मियों ने खुद पुलिस से संपर्क साधा और इसकी सूचना दी। अगर पुलिस वारदात के फौरन बाद सक्रिय हो जाती तो शायद हमलावरों को राजधानी या फिर आसपास ही दबोचा जा सकता था।
मोलतोल कर लिया था कमरा
होटल रिसेप्शनिस्ट अनस ने बताया कि 17 अक्टूबर की रात दोनों युवक ऑटो से होटल पहुंचे थे। रिसेप्शन पहुंचने पर उन्होंने रूम के लिये मोलतोल किया। जिसके बाद रूम का किराया 1300 प्रतिदिन तय हुआ। उन्होंने 2 हजार का नोट देकर एक हजार रुपये वापस भी ले लिये। बाकी पेमेंट रूम चेकआउट करने के वक्त देने को कहा था।
हमले में मोइनुद्दीन घायल
जब दोनों हमलावर होटल वापस लौटे तो मोइनुद्दीन ने अपना दाहिना हाथ कुर्ते की जेब में डाल रखा था। कमरे में पहुंचकर उन्होंने तौलिया से खून साफ किया। माना जा रहा है कि मोइनुद्दीन का दाहिना हाथ कमलेश की गर्दन रेतने के वक्त चोटिल हो गया। जिसे छिपाने के लिये वह कुर्ते में अपना हाथ डाले हुए था। हालांकि, होटलकर्मियों को उस वक्त उस पर शक नहीं हुआ।
हत्यारे सीसीटीवी में कैद  
होटल खालसा इन के रिसेप्शन पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कमलेश तिवारी के हत्यारे चेकइन के वक्त 17 अक्टूबर की रात, 18 अक्टूबर की सुबह जाते वक्त, दोपहर में वापस लौटने और फिर एक बार बाहर जाते कैद हुए। इस सीसीटीवी फुटेज व डीवीआर को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है।
दो किलोमीटर दूर है घटनास्थल
हमलावरों ने कमलेश तिवारी के घर के करीब ही अपना ठिकाना बनाया ताकि, वारदात के बाद वे आसानी से कपड़े बदलकर फरार हो सकें। आशंका जताई जा रही है कि इसके लिये उन्होंने गूगल मैप की मदद ली। दरअसल, होटल खालसा इन और कमलेश तिवारी के घर के बीच की दूरी महज दो किलोमीटर है। जहां से पैदल ही एक जगह से दूसरी जगह जाया जा सकता है।
lucknow@inext.co.in


Posted By: Inextlive Desk

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