बॉलीवुड की जान समझी जाने वाली ये 25 फिल्‍में एक बार जरूर देखें

2017-08-02T16:02:00Z

बॉलीवुड में फिल्‍ममेकिंग का अपना एक इतिहास है और हर फिल्‍म भी शायद एक रोचक कहानी है। पहली फुल लेंथ बॉलीवुड फिल्‍म थी राजा हरिशचंद्र जो साल 1913 में बनी थी। इसके बाद ना जाने कितनी फिल्‍में सिल्‍वर स्‍क्रीन पर जगमगाईं कुछ लोगों के जहन में अपनी जगह बना सकीं और कुछ बस यूंही गुजर गईं। आइये जानें बीते 100 साल की ऐसी 25 फिल्‍मों के बारे में जो लोगों के दिल दिमाग में अपना मुकाम बनाने में तो कामयाब हुई हीं साथ ही ट्रेंड सेटर भी बनीं।

दो बीघा जमीन: 1953 में आई ये फिल्म भारतीय किसानों के हालात की कहानी सुनाने वाली फिलम थी और शायद आज भी उतनी ही रेलिवेंट है। बलराज साहनी स्टारर बिमल रॉय की इस फिल्म को 1954 में कांस फिल्म फेस्टिवल में प्रिक्स इंटरनेशनल फिल्म का पुरस्कार दिया गया था।
प्यासा: गुरूदत्त, वहीदा रहमान और माला सिन्हा स्टारर ये ट्रेजडी फिल्म, इकलौती भारतीय फिल्म है जो टाइम्स की 100 ऑल टाइम मूवी लिस्ट और साइट एंड साउंडस 250 ग्रेटेस्ट फिल्म लिस्ट में अपनी जगह बनाने में कामयाब हुई। 1957 में एक भावुक कवि और कठोर समाज के बीच के दर्द भरे रिश्तों को दिखाने वाली प्यासा पहली इंडियन फिल्म थी जो वेनिस फिल्म फेस्टिवल में दिखाने के लिए भेजी गई थी।

मदर इंडिया: ऑस्कर अवॉर्ड के फॉरेन फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेट होने के लिए सबसे पहले यही भारतीय फिल्म पहुंची थी।  1957 में आई मदर इंडिया को भारत के लिहाज से यहां की गॉन विद द विंड कहा जाता है।
मुगल-ए-आजम: 1960 की ये फिल्म के आसिफ की भव्य फिल्मों में से एक है। जिसने मुगल शहंशाहों की आलीशान लाइफ स्टाइल के प्रदर्शन के साथ शहजादे सलीम और एक कनीज अनारकली की लवस्टोरी को बयान किया था। फिल्म में पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार और मधुबाला ने लीड रोल प्ले किए थे। बॉलीवुड में उस दौर की सबसे मंहगी फिल्म कहलाने वाली ये फिल्म बाद में हाइएस्ट अर्निंग फिल्म भी साबित हुई।
साहब बीबी और गुलाम: बिमल मित्र के बंगाली नॉवल साहब बीबी और गुलाम पर बेस्ड ये फिल्म 1962 की सबसे क्रिटिकली एक्लेम फिल्म थी। खास तौर पर मीना कुमारी के अभिनय की सबने तारीफ की थी।
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वक्त: उस दौर में चल रहे ट्रेजिडी और राष्ट्रप्रेम के ट्रेंड को तोड़ कर 1965 में रिलीज हुई वक्त लोगों के ताजी हवा का राहत भरा झोंका साबित हुई थी। यश चोपड़ा की इस फिल्म को जबरदस्त सफलता मिली तो इसकी एक वजह फिल्म की कसी कहानी, तेज गति और उसमें मौजूद भरपूर मनोरंजन भी था।
गाइड: 1965 में ही आई गाइड अपने आप में एक अलग तरह की कहानी और सोच को लेकर बनाई गई फिल्म थी। फिल्म देवानंद के करियर में मील का पत्थर साबित हुई। इसमें वहीदा रहमान के अभिनय को भी काफी तारीफ मिली। 2007 में इसका सालों से डिब्बे में बंद बड़ा इंग्लिश वर्जन कांस फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया। टाइम मैग्जीन ने गाइड को बॉलीवुड की बेस्ट क्लासिक मूवीज की लिस्ट में शामिल किया है।
पाकीजा: 15 साल के लंबे टाइम में बन कर रिलीज होने वाली पाकीजा को इंस्टेंट कामयाबी तो नहीं मिली पर बाद के वर्षों में ये फिल्म कल्ट फिल्मों की सूची में शामिल हुई। हालाकि रिलीज के कुछ हफ्तों बाद ही मीना कुमारी की मौत ने सारा नजारा ही बदल दिया और फिल्म सुपरहिट साबित हुई।

बॉबी: 1973 तक फिल्मों में टीन एज लवस्टोरीज को कतई महत्व नहीं दिया गया था, लेकिन इस साल आयी बॉबी ने सारी तस्वीर बदल कर रख दी। राजकपूर की इस फिल्म में ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया ने लीड रोल प्ले किया था। फिल्म के रिलीज के बाद दोनों किशोर प्यार का ऐसा आइडल बने की वो टैग आज तक नहीं हटा।
गरम हवा: 1945 में पार्टीशन और महात्मा गांधी की शहादत का एक आगरा से पेशावर गई मुस्लिम फेमिली पर क्या असर पड़ता है इसकी मार्मिक कहानी है गरम हवा और फिल्म को एमएस सथ्यु के कमाल के डायरेक्शन और बलराज सहानी की दिल दू लेने वाली अदाकारी ने और भी शानदार बना दिया है।
शोले: 1975 में आई रमेश सिप्पी की इस फिल्म को क्रिटिक्स ने पूरी तरह नकार दिया पर आज ये फिल्म खुद एक कहानी बन चुकी है। ये ना सिर्फ ऑलटाइम हाइएस्ट कमाई करने वाली फिल्मों में टॉप पर है बल्कि पांच साल तक लगातार थियेटरों में चलने वाली फिल्म का रिकॉर्ड भी इसी फिल्म के पास है।

आंधी: पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदरा गांधी की निजी जिंदगी से इंस्पायर इस फिल्म में सुचित्रा सेन ने एक महिला पॉलिटीशियन का रोल प्ले किया था। इस फिल्म के जरिए ये अहसास कराया गया कि इंदरा गांधी और फिरोज गांधी की निजी जिंदगी कैसी रही होगी। ये फिल्म राजनीति के अलग रंग को दिखाने वाली फिल्म बनी।
गोलमाल: यूं तो हर दौर में कॉमेडी मूवीज आई हैं पर जो कीर्तिमान अमोल पालेकर और उत्पल दत्त स्टारर गोलमाल ने 1979 में बनाया उसे कोई नहीं तोड़ सका। आज भी जब बेस्ट कॉमेडी मूवी की बात होती है तो गोलमाल का नाम टॉप पर होता है।
जाने भी दो यारो: सोशल और पॉलिटिकल सिस्टम पर बनी स्टायरिकल फिल्मों में आज भी जाने भी दो यारों का कोई मुकाबला नहीं कर सकता। ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह, पंकज कपूर और भक्ति बर्वे जैसे कलाकारों की एक साथ एक ही वक्त में इतनी जबरदस्त एक्टिंग देखना सचमुच शानदार अनुभव है।
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मासूम: एरिक सीगल की नॉवेल मैन, वोमेन एण्ड चाइल्ड पर बेस्ड ये फिल्म शेखर कपूर के डायरेक्शनल डेब्यु की फिल्म है। एक नाजुक विषय पर इतनी शानदार तरीके से फिल्म बनाना वाकई कमाल है। उस पर नसीरुद्दीन शाह और शबाना आजमी जैसे मंझे हुए कलाकारों का अभिनय और तीन मासूम चाइड एक्टर्स जुगुल हंसराज, उर्मिला मातोंडकर और अनुराधा श्रीवास्तव की इनोसेंस का कांबिनेशन वाकई डेडली था।
सारांश: 28 साल की उम्र में 60 साल के व्यक्ति के लीड रोल में डेब्यु करने का जो साहस इस फिल्म में अनुपम खेर ने दिखाया था तो एक मिसाल बन गया। वहीं महेश भट्ट केनिर्देशन का पूरा निखार भी इस फिल्म में दिखा है।
कयामत से कयामत तक: जब हर तरफ एक्शन फिल्मों का कब्जा था, ऐसे में एक ट्रेजिडी टीन एज लव स्टोरी लेकर आना बड़ी हिम्मत का काम था। ऐसे में आमिर खान और जूही चावला जैसे न्यू कमर्स के साथ बनी इस फिल्म ने हलचल मचा दी। फिल्म के दोनों कलाकार रातों रात स्टार बन गए।

बैंडिट क्वीन: 1994 में एक बार फिर शेखर कपूर नए तेवर में लौटे और दस्यु सुंदरी फूलनदेवी की लाइफ पर बेस्ड ये विवादास्पद फिल्म लेकर आये। फिल्म के डायलॉग से लेकर पिक्चराइजेशन तक हर चीज बेहद बोल्ड थी।
हम आपके हैं कौन: सूरज बड़जात्या की इस फिल्म से पहले भी हिंदुस्तानी शादी फिल्मों का सब्जेक्ट बनी है पर इस अंदाज में नहीं। सलमान खान और माधुरी दीक्षित स्टारर ये फिल्म ना सिर्फ अपने समय की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी बल्कि इसने फेमिली ड्रामा मूवीज का एक अलग ही बेंचमार्क सेट कर दिया।
दिल चाहता है: फरहान अख्तर के डायरेक्शनल डेब्यु वाली इस फिल्म में बॉलीवुड में एक नए किस्म के सिनेमा का दौर शुरू किया जो आजादी के बाद के अर्बन यूथ की सोच का आइना बनी। फिल्म में आमिर खान, सैफ अली खान और अक्षय खन्ना ने अलग अलग वर्ग के युवाओं का प्रतिनिधित्व किया है।

दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे: शाहरुख खान और काजोल की इस फिल्म ना सिर्फ कामयाबी का इतिहास लिखा बल्कि शोले का सालों पूराना रिकॉर्ड तोड़ कर सिनेमाघरों में सबसे ज्यादा समय तक चलने का नया कीर्तिमान स्थापित किया। आज भी मुंबई के सबसे पुराने सिनेमाहॉल मराठा मंदिर में ये फिल्म प्रतिदिन एक शो में दिखाई जा रही है।
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लगान: इतिहास के पन्नों से खोज कर आजादी के संघर्ष के कुछ गुमनाम नायकों की अनसुनी कहानी को आधार बना कर 2001 में आई इस फिल्म को विश्व भर में सराहना मिली। फिल्म को ऑस्कर की फॉरेन लेंग्वेज कैटगरी में बेस्ट फिल्म के लिए नॉमिनेशन भी मिला। फिल्म का निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया था।
स्वदेश: लगान के तीन साल बाद आशुतोष एक और बेहतरीन और डिफरेंट विषय पर फिल्म लेकर आये। ये पहली भारतीय फिल्म थी जिसमें नासा रिसर्च सेंटर के अंदर फिल्माये गए दृश्य दिखाये गए। फिल्म एक एनआरआई साइंटिस्ट शाहरुख खान की घर वापसी की कहानी थी।
द लंचबॉक्स: इरफान खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी और निमृत कौर स्टारर इस फिल्म को आप बॉलीवुड की सबसे रेयर लव स्टोरी कह सकते हैं।

क्वीन: ये फिल्म हर लिहाज से एक बेहतरीन फिल्म कही जा सकती है। स्त्री विमृश, बोल्ड और उसके बावजूद गंभीरता से अपना संदेश देने वाली विकास बहल डायरेक्टेड और कंगना रनौत स्टारर ये फिल्म एक मस्ट वॉच मूवी है।

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