AGRA 28 Jan. :अब इसे क्या समझें. कई सवाल खड़े करने के बाद डॉ. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी में जांच दोषियों के लिए सहारा बन रही हैं. एक हफ्ते पहले खुले फर्जी मार्कशीट मामले की जांच अभी भी यूनिवर्सिटी में चल रही है. जबकि इससे जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. मंडे को इस रैकेट से जुड़े और कई नाम सामने आने थे. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. विवि प्रशासन जांच की बात कह तो रहा है लेकिन जांच किसके खिलाफ होगी इसकी जानकारी उसे ही नहीं है क्योंकि यूनिवर्सिटी से कोई नाम सामने आने ही नहीं दिया जा रहा है.


जैसे कुछ हुआ ही न होपुलिस ने 21 जनवरी को एक फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले रैकेट का खुलासा किया था। इस मामले में पांच आरोपियों को बंदी बनाकर जेल भेज दिया गया। इसके बाद पुलिस ने यूनिवर्सिटी जाकर पूछताछ की। इस दौरान कई कर्मचारियों से भी पूछताछ हुई। लेकिन कोई नतीजा सामने नहीं आया। इस मामले में कुलपति ने भी जांच की बात कही। लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। जांच के नाम पर मामले को दबाने के प्रयास हो रहे हैं। वहीं पुलिस ने भी मामले में कोई जांच या पूछताछ नहीं की।चर्चा में हैं दो बड़े अधिकारी


सोर्स बताते हैं कि पुलिस को पूछताछ में कई नाम पता लगे, जिन पर कार्यवाही की तैयारी थी। लेकिन कार्यवाही तो दूर की बात है उनके नाम भी सामने नहीं लाए जा रहे हैं। इन नामों में विवि के दो बड़े अधिकारियों के नामों की चर्चा यूनिवर्सिटी कैंपस में चल रही है। सूत्र बताते हैं कि ये अधिकारी भी खेल से जुड़े हैं। इसलिए दबाव के चलते नाम दबा दिए गए हैं। वहीं सोर्सेज का कहना है कि इस मामले में एक कर्मचारी को पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था। जिसे बाद में छोड़ दिया गया। मामले का अगर पूरा खुलासा होता है, तो कई बड़े नाम सामने आएंगे।हर कोई मौनयूनिवर्सिटी में हर अधिकारी और कर्मचारी ने मामले को लेकर चुप्पी साध ली है। कोई भी इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। यहां तक की कुलपति भी रविवार के बाद से यूनिवर्सिटी में नहीं दिखाई दिए हैैं। ऐसे में सवाल उठना तो लाजिमी है।यूनिवर्सिटी पहुंची पुलिसट्यूजडे देर शाम पुलिस यूनिवर्सिटी पहुंची। जहां उन्होंने मामले की जांच के लिए दो बड़े अधिकारियों से पूछताछ की। हालांकि पूछताछ में कुछ भी अभी सामने नहीं आया है। लेकिन सवाल है कि क्या किसी पर कार्रवाई होगी।कहां गए हंगामा करने वाले छात्र नेताछोटे-छोटे मुद्दों को लेकर यूनिवर्सिटी में हंगामा करने वाले, तोडफ़ोड़ करने वाले छात्र नेताओं ने भी मामले से दूरी बना ली है। कोई भी छात्रसंगठन या नेता इसके खुलासे की मांग करता नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि उन्हें भी डर है कि कहीं उनका नाम सामने न आ जाए। इस खेल में छात्रनेताओं का भी अहम रोल है। दोषी की कॉल अधिकारी के मोबाइल पर

सूत्र बताते हैं कि मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी अमित राज चौहान के एक बड़े अधिकारी से घनिष्ठ संबंध है। उन अधिकारी के मोबाइल में दोषी की काफी कॉल्स हैं।यूनिवर्सिटी पहुंचा गायब कर्मचारीरैकेट के खुलासे के बाद से गायब चल रहा एक कर्मचारी मंगलवार को यूनिवर्सिटी पहुंचा। रजिस्ट्रार ऑफिस का यह कर्मचारी रैकेट के खुलासे के बाद से सीट से गायब था। अब जब सब कुछ शांत हो गया तो कर्मचारी ने सीट संभाल ली।

Posted By: Inextlive