बीमारियां बांट रही शहर की सड़कें

Updated Date: Fri, 28 Apr 2017 07:41 AM (IST)

सड़कों की बेतरतीब खोदाई से दस फीसदी तक बढ़ गए अस्थमा के मरीज

ALLAHABAD: शहर की गड्ढेदार और खोदी गई ऊबड़-खाबड़ सड़कों से उड़ने वाली धूल लोगों को अस्थमा और सीओपीडी जैसी घातक बीमारियां बांट रही हैं। एमएलएन मेडिकल कॉलेज के डॉ। आलोक चंद्रा और रेस्पीरेटरी केयर सेंटर के चेस्ट फिजीशियन डॉ। आशुतोष गुप्ता का कहना है कि धूल के प्रभाव से फेफड़े कमजोर हो रहे हैं, जिसके चलते अस्थमा के दस फीसदी तक मरीज बढ़ गए हैं। व‌र्ल्ड अस्थमा डे के मौके पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन को इस ओर ध्यान देना होगा। वरना, मरीजों की संख्या में खासा इजाफा हो सकता है।

घातक है फोटोथेरेपी

नवजात बच्चों को जाइंडिस से बचाने के लिए लंबे समय तक फोटोथेरेपी में रखना भी अस्थमा का कारण बन जाता है। यह बात इंटरनेशनल रिसर्च में सिद्ध हो चुकी है। इससे भविष्य में बच्चा अस्थमा जैसी आटो इम्युन डिजीज की चपेट में आ सकता है। इसलिए जब तक जरूरी न हो बच्चों को फोटोथेरेपी में रखने से बचाकर रखना होगा। अगर माता-पिता या भाई-बहनों को अस्थमा है तो बीमारी के चांसेज बढ़ जाते हैं। अगर गर्भवती को अस्थमा है तो इलाज के लिए इन्हेलर का प्रयोग करना चाहिए। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे को दवाओं से होने नुकसान होने से बचाया जा सकता है। डॉ। आशुतोष गुप्ता ने कहा कि अस्थमा के इलाज में इन्हेलर थेरेपी कारगर साबित हुई और यह दवाओं के मुकाबले काफी सस्ती भी है। हॉस्पिटल्स में एलर्जिक अस्थमा के मरीजों की संख्या में भी खासा इजाफा हुआ है।

अस्थमा के कारण

धूल, धुआं, अचानक मौसम में बदलाव, कुत्ते, बिल्ली, परागकण, इनडोर प्लांट्स, स्मोकिंग, धान और गेहूं की डस्ट आदि।

बचाव

फैमिली हिस्ट्री में अस्थमा है तो सतर्क रहना होगा।

धूल और धुएं से बचाव करना होगा।

घर में कुत्ता या बिल्ली जैसे जानवर न पालें।

एलर्जी है तो कबूतर के पंख और एस्प्रिन से दूरी बनाए रखें।

दुनियाभर में 300 और इंडिया में तीस मिलियन अस्थमा के मरीज हैं।

लगेगा फ्री जांच कैंप

डॉ। आशुतोष ने बताया कि व‌र्ल्ड अस्थमा डे की इस बार की थीम इट्स टाइम टू कंट्रोल अस्थमा है। इसलिए दो मई को स्ट्रेची रोड और सुंदरम टावर स्थित रेस्परेटरी केयर सेंटर पर सुबह से शाम तक फ्री ब्रीदो मीटर टेस्ट कैंप का आयोजन किया गया है। लोगों को अवेयर करने के लिए अस्थमा पर वीडियो भी जांच किया गया है।

गर्भवती को अस्थमा है तो इलाज के लिए इन्हेलर का प्रयोग करना चाहिए। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे को दवाओं से होने नुकसान होने से बचाया जा सकता है।

-डॉ। आशुतोष गुप्ता

चेस्ट स्पेशलिस्ट

नवजात बच्चों को जाइंडिस से बचाने के लिए लंबे समय तक फोटोथेरेपी में रखना भी अस्थमा का कारण बन जाता है।

डॉ। आलोक चंद्रा

एमएलएन मेडिकल कॉलेज

Posted By: Inextlive
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