जिंदगी का संघर्ष आपको जीने की ताकत देता है. मुख में मुस्कान बिखेरेगा. जीवन की संतुष्टि के लिए मेहनत और संघर्ष सबसे आवश्यक होते है. आप कुछ भी कर लें बिना संघर्ष के आपके जीवन की नैय्या को किनारा नहीं मिलने वाला. यह मानना है 2005 बैच की पीपीएस अफसर और प्रयागराज की पहली महिला एसपी क्राइम इंदू प्रभा सिंह का. दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट ने उनसे तमाम पहलुओं पर वार्ता की. उन्होंने एक और चीज कहा नई जिम्मेदार का पदभार संभालने के बाद सबसे संवाद कर चैलेंज तय करेंगी.


प्रयागराज (ब्यूरो)। मूलत: गोंडा जनपद की रहने वाली इंदु प्रभा सिंह कानपुर, फिरोजाबाद, बरेली, रामपुर,गोरखपुर में सीईओ के पद पर तैनात रही हैं। लोक सेवा आयोग से डिप्टी एसपी के पद पर उनका चयन 2005 में हुआ था। वर्तमान में वह गोरखपुर में सीओ खजनी के पद पर तैनात हैं। इंदु प्रभा सिंह राजधानी लखनऊ में भी ट्रेनिंग के दौरान तैनात रही हैं। इंदु प्रभा सिंह के पति इंडियन आर्मी में अफसर हैं। अपनी 8 साल की बेटी के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवारत इंदु प्रभा सिंह से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के रिपोर्टर में जब पूछा कि पुलिस जैसी चैलेंजिंग जॉब और परिवार के बीच कैसे संतुलन रख पाती हैं तो इंदु प्रभा सिंह ने कहा कि जॉब ज्वाइन करने से पहले माइंड सेट था। पुलिस की नौकरी करना है तो जिंदगी में चैलेंज स्वीकार करना ही होगा। कहा कि पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ सेपरेट रखती हूं। यही नहीं वह गोरखपुर में सीओ खजनी रहने के दौरान ही उत्तर प्रदेश पुलिस डिपार्टमेंट ने दीवाली से पहले प्रमोशन की सौगात दी है। इंदु प्रभा सिंह एडिशनल एसपी रैंक पर प्रमोट हुई हैं। अब उन्हें प्रयागराज की नई एसपी क्राइम बनाया गया है।क्राइम के तुरंत बाद टूट पड़ो
इंदु प्रभा सिंह का मानना है कि घटना होने के तुरंत बाद अगर आप उसकी तहकीकात शुरू करते हैं और बारीकी से कडिय़ों को जोड़ते हैं तो उसका खुलासा करना काफी आसान हो जाता है। देरी करने पर खुलासे से दूर जाना और केस पेडिंग होना तय है। दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट रिपोर्टर से बातचीत में इंदु प्रभा सिंह ने बताया कि जब वह बरेली में सीओ थीं। उसी दौरान पांच लोगों की हत्या कर दी गई थी। इस मामले को उन्होंने थाने पर न छोड़कर खुद लीड करना शुरू किया। 24 घंटे के भीतर सामूहिक और चर्चित हत्याकांड का खुलासा कर दिया था।

Posted By: Inextlive