संकट में हजारों लोगों की रोजी रोटी

Updated Date: Wed, 21 Jan 2015 07:03 AM (IST)

- रोहिन के प्रदूषित होने से मछुआराें के सामने खड़ा हुआ संकट

- नदी के किनारे मछली मारने वाले नाव खड़े हुए किनारे

GORAKHPUR: नदियां केवल सभ्यता की पहचान नहीं होती, बल्कि हमेशा से लोगों को जीविका का साधन रही हैं। जब इन नदियों के अस्तित्व पर संकट आता है कई परिवार के आगे रोजगार का संकट पैदा हो जाता है। कुछ ऐसी संकट से रोहिन नदी के किनारे रहने वाले लोगों पर आ गया है। नदी की मछलियां मर गई हैं तो नदी में गंदा पानी आ जाने के कारण कपड़े धोने वाले अब धोबी चिंतित हैं।

भ्0 हजार लोगों के सामने संकट

महाराजगंज के भाजपा के संतोष सिंह ने बताया कि एक आंकड़े के अनुसार महराजगंज में लगभग ख्भ् से फ्0 हजार लोग रोहिन नदी के पानी से अपनी रोजीरोटी चलाते हैं। इसमें क्0 हजार लोग ऐसे हैं जो नदी के किनारे कपड़ा धोते हैं। जबकि ख्0 हजार लोग मछलियां मारकर बाजार में बेचते हैं। अब इनके सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है। नदी में मछलियां मर गई हैं। जो जिंदा बची थी, वे राप्ती नदी में चली गई हैं। ऐसे में गोरखपुर और महराजगंज में भ्0 हजार लोगों के पास रोजगार का संकट पैदा हो गया है। उमेश चंद ने बताया कि इसका असर बाजार में दिखने लगा है। स्थिति यह है कि मानीराम, पीपीगंज और कैंपियरगंज के मार्केट में जहां शाम को ताजी मछलियां मिलती थी, वहां आज बर्फ वाली मछली मिल रही है।

नहीं मिल रही मछलियां

रोहिन और झरही का संगम जहां होता है, उसे दो मुहानी बोलते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक अभियंता चंद्रेश कुमार ने बताया कि डोमिनगढ़ से लेकर झरही मुहाने तक झरही, चंदन, प्यास, रोहिन और कोल्हुई नदी से पानी का सैंपल लिया गया है। रोहिन का पानी पूरी तरह से प्रदूषित हो गया है। स्थिति यह है कि डोमिनगढ़ से लेकर झरही तक मछलियां नहीं मिली।

पहली बार छूटा है काला पानी

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्राधिकारी एसबी सिंह ने बताया कि ठूठीबारी में जब वे पहुंचे और जांच करने के बाद लोगों से बात की। लोगों ने बताया कि 8 से क्0 दिन में अक्सर नेपाल से लाल पानी आता था, जिसको लेकर कई बार स्थानीय लोगों ने अफसरों से कंप्लेन किया, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहली बार इतनी ज्यादा मात्रा में काला पानी नेपाल से आया है। इसलिए यह गोरखपुर तक पहुंचा है, नहीं तो महराजगंज जाते-जाते इसका असर समाप्त हो जाता था। पहले लाल पानी जिस दिन छूटता था, वह दिन में भ् से 7 घंटे तक आता था, लेकिन इस बार जब काला पानी आया वह क्ख् घंटे तक लगातार आता रहा।

कार्यक्रम की व्यवस्था के कारण आज रोहिन नदी का जायजा नहीं ले पाया हूं। हम रोहिन नदी को स्वच्छ करने के लिए आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। अगर फिर से नेपाल ने गंदा पानी छोड़ा तो हम बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।

महंत योगी आदित्यनाथ, सदर सांसद

Posted By: Inextlive
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