Lucknow News: अटल बिहारी वाजपेई साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में केजीएमयू के 119वें फाउंडेशन डे के अवसर पर चीफ गेस्ट त्रिपुरा के सीएम डॉ. माणिक साहा ने 63 मेधावी छात्र-छात्राओं को मेडल देकर सम्मानित किया।


लखनऊ (ब्यूरो)। लखनऊ से मेरा गहरा नाता है, खासकर केजीएमयू से। मैंने यहां से मेडिकल की पढ़ाई की है। आज जिनको मेडल मिल रहा है उनको बधाई और शुभकामनाएं। प्रदेश सरकार ने कानून व्यवस्था को बेहतर किया है। उनके मॉडल को त्रिपुरा में लागू किया गया है। क्योंकि हम भी किसी भी दशा में गुंडाराज नहीं चाहते हैं। इससे काफी हद तक कानून व्यवस्था को बेहतर करने में मदद मिल रही है। ये बातें शुक्रवार को अटल बिहारी वाजपेई साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में केजीएमयू के 119वें फाउंडेशन डे के अवसर पर चीफ गेस्ट त्रिपुरा के सीएम डॉ। माणिक साहा ने कहीं। इस मौके पर 63 मेधावी छात्र-छात्राओं को मेडल देकर सम्मानित किया गया।केजीएमयू लगातार आगे बढ़ रहा


फाउंडेशन डे प्रोग्राम में बोलते हुए सीएम माणिक साहा ने आगे बताया कि त्रिपुरा की तरफ से आप सभी से आग्रह करता हूं कि आप लोग त्रिपुरा घूमने आएं। हमारी झीलों को देखें, हमारे प्रकृति के नजारों को देखें। आपको एक अलग अनुभूति होगी। हमारे यहां तो अब रेल भी चलने लगी है। साथ ही एयरपोर्ट जल्द ही इंटरनेशनल होने वाला है। वहीं, विशिष्ट अतिथि यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि कोविड की रोकथाम से लेकर वैक्सीन बनाने तक में यूपी ने शानदार काम किया है। कई देशों में पर्चियों पर कोविड मरीजों को इलाज मुहैया कराया गया। यूपी में कोविड का इलाज से लेकर वैक्सीन तक के आंकड़े आनलाइन हैं। केजीएमयू में प्रतिदिन सात से आठ हजार मरीज ओपीडी में आते हैं। मरीजों को डॉक्टर अच्छी सलाह दे रहे हैं। सरकार केजीएमयू को आगे बढ़ाने में लगातार प्रयास कर रही है। डॉक्टरों की कमी दूर की जा रही है। पैरामेडिकल स्टाफ व कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है। गुणवत्ता में सुधार के बावत काम किया जा रहा है। सरकार राज्यपाल के प्रयासों के साथ है। यूपी व त्रिपुरा साथ मिलकर काम करें, इसके लिए प्रतिनिधि ज्ञान का आदान-प्रदान करें, ताकि इलाज की तकनीक को और बेहतर किया जा सके।जल्द ही नए डॉक्टरों की तैनाती होगीवीसी प्रो। सोनिया नित्यानंद ने कहा कि केजीएमयू लगातार तरक्की के नए आयामों को छू रहा है। नर्सिंग भर्ती परीक्षा सफलतापूर्वक कराई है। जल्द ही नए डॉक्टरों की तैनाती होगी। रोगियों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, डॉ। अमिता जैन, डॉ। विनीता दास, पूर्व वीसी डॉ। एमएलबी भट्ट व डॉ। बिपिन पुरी, डॉ। डीके गुप्ता समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।

प्रोफेसर को परेशान करने के लिए गाना गाने लगते थेकेजीएमयू द्वारा शुक्रवार को इंटरनेशनल एलुमनाई मीट का आयोजन किया गया, जहां 24 देशों से करीब 900 से अधिक एलुमनाई शामिल हुए। जिसमें 1946 बैच के डॉ। एके हलीम भी पहुंचे थे। जिन्होंने बताया कि मेरे सभी स्टूडेंट्स बेहद मेहनती और सक्सेसफुल हैं। इस दौरान अपने पुराने साथियों और फैकल्टी को देखकर हर कोई पुरानी यादों में खो गया। सभी एक-दूसरे से कॉलेज के दिनों की बात करने में मशगूल नजर आये। वहीं, इस दौरान कॉलेज के दिनों में की गई शरारतों को भी याद किया गया।टीचर के लेक्चर में गाने गाते थेमैं एसपी हॉस्टल में रहता था। हमारा 1963 बैच शरारतों के लिए जाना चाहता था। उस समय पता ही नहीं होता था कि कब पढ़ाई और कब एग्जाम होना है। हम लोग टीचर्स को तंग करने के लिए शोर मचाना, डब्बों में कंकड़ भरकर लेक्चर के समय सीढ़ियों पर बजाया करते थे। हम प्रो। बीजी प्रसाद को सबसे ज्यादा परेशान करते थे, जो हम लोगों को एनसीसी कैंप में जबरदस्ती ले जाते थे। वहां पानी वगैरह भी नहीं होता था। उनको परेशान करने के लिए हम लेक्चर में गाने गाना, पाइप में मेहंदी के बीज भरकर उनपर मारते थे।

-डॉ। भूटा सिंह, लंदनकंबल पहनकर डराने लगेमैं 1962 बैच की हूं। उस समय हम 17-18 साल के थे। कॉलेज के दिनों में खूब शरारत करते थे। हमारे हॉस्टल में डॉ। हामिदा बीबी थीं। वह डरती बहुत थीं। एक दिन रात में हम लोग चुपके से उनके कमरे में कंबल डालकर खूब उछले और चिल्लाने लगे, जिसके कारण वह बेहद डर गईं और चिल्लाने लगीं। इसके बाद हम लोगों की वार्डन से शिकायत की गई। जिसके बाद हम लोगों को खूब डांट पड़ी।-डॉ। आशा रावत, देहरादूनफैकल्टी ने मेरी जान बचाईमैं 1981 बैच की हूं। मैंने एमडी मेडिसिन किया था। उस दौरान प्रो। आरसी आहूजा फैकल्टी में थे। उन्होंने बेहद अच्छे से ईसीजी सिखाया था। बीच में एकबार मैं बहुत ज्यादा बीमार पड़ गई थी। मेरी हालत मरने वाली हो गई थी। उस दौरान उन्होंने मेरी पूरी मदद की और मेरी जान बचाई। वह मेरे लिए भगवान द्वारा भेजे गये फरिश्ते की तरह थे।-डॉ। इरा पांडे, यूकेलोग पैर छूने लगते थे
मैं 1951 बैच का हूं। उस समय डेंटल के स्टूडेंट्स हजरतगंज में चीफ फूड मार्ट घूमने गये, जिसमें डॉ। दुग्गल भी शामिल थे। उनको वहां पकड़कर रोक लिया गया। सीनियर ने मुझे बुलाया और मैंने जोश में आकर उन्हें कहा कि मैं अपने साथी को बचाने जा रहा हूं। इसके बाद मैं वहां पहुंचा और अपने साथी को छुड़ाकर ले आया। उस दौरान मेरे हाथ में चोट भी लग गई थी। तब लोगों को पता चला कि हम कॉलेज के लड़के वहां अपने साथी को बचाने आए थे नाकि लूटपाट करने। इसके बाद जब हम लोग कहीं भी जाते तो लोग उनके पैर छूने लगते थे।-डॉ। अजीत प्रसाद जैन

Posted By: Inextlive