न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. रवि उनियाल ने बताया कि स्टडी के लिए 78-78 मरीजों के दो ग्रुप बनाए गए। एक ग्रुप में केवल माइग्रेन की समस्या वाले और दूसरे ग्रुप में माइग्रेन समेत सिस्टीसर्कोसिस वाले मरीजों को शामिल किया गया था। इसमें 18-40 वर्ष की उम्र के मरीजों को शामिल किया गया था।


लखनऊ (ब्यूरो)। अगर आधे सिर में दर्द लगातार और बेहद तीव्र हो रहा है तो सतर्क होने की जरूरत है। खासतौर पर माइग्रेन की समस्या वालों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए, क्योंकि यह लक्षण सिस्टीसर्कोसिस (दिमाग में कीड़ा) की समस्या हो सकती है, क्योंकि जिन मरीजों के दिमाग में कीड़ा होता है, उनमें माइग्रेन के गंभीर होने का खतरा दो-तीन गुना अधिक हो जाता है। यह जानकारी केजीएमयू के न्यूरोलॉजी विभाग द्वारा 156 मरीजों पर हुई स्टडी में सामने आई है। डॉक्टर्स के मुताबिक, अनहाइजीनिक खाने से यह समस्या सबसे ज्यादा होती है।दो ग्रुप में हुई स्टडी


न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ। रवि उनियाल ने बताया कि स्टडी के लिए 78-78 मरीजों के दो ग्रुप बनाए गए। एक ग्रुप में केवल माइग्रेन की समस्या वाले और दूसरे ग्रुप में माइग्रेन समेत सिस्टीसर्कोसिस वाले मरीजों को शामिल किया गया था। इसमें 18-40 वर्ष की उम्र के मरीजों को शामिल किया गया था। स्टडी के दौरान यह देखने को मिला की सामान्य माइग्रेन वाले मरीजों में माह में 7-8 बार ही दर्द देखने को मिली, जबकि दूसरे ग्रुप में यही दर्द तीव्र होने के साथ फ्रीक्वेंसी करीब दोगुनी देखने को मिली। जिसके चलते इन मरीजों में दवा की डोज को बढ़ाना पड़ा था। ऐसे में अगर किसी को माइग्रेन का दर्द अधिक हो तो उसे एक बाद सीटी स्कैन जरूर करवाना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेकर अपना इलाज शुरू करवाना चाहिए।महिलाओं में समस्या ज्यादाडॉ। रवि के मुताबिक, माइग्रेन एक प्रकार का सिर दर्द है जो सिर के आधे हिस्से में उठता है। यह दिमाग की तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी के कारण होता है। हालांकि, माइग्रेन की समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है। पर इस स्टडी में असर दोनों में एक जैसा ही देखने को मिला।चाट में धनिया, चाऊमीन में पत्तागोभी बड़ी वजह

डॉ। रवि के मुताबिक, दिमाग में कीड़ा होने की बड़ी वजह अनहाइजीनिक खाना होता है। खासतौर पर हरी पत्तेदार सब्जियों की वजह से यह सबसे ज्यादा होता है। पत्ता गोभी और धनिया की वजह से ज्यादा होता है। खासतौर पर चाट, बताशे, चाऊमीन आदि में ये सब्जियां अकसर बिना साफ किए और कच्ची ही डाल दी जाती हैं। जिसकी वजह से सिस्ट यानि अंडा हमारी बॉडी से दिमाग में पहुंच जाता है, जिसकी वजह से समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा जो लोग बिना अच्छी तरह धुले सलाद वगैरह खाते हैं, उनमें भी रिस्क ज्यादा होता है। यह समस्या ठेले-खोमचे पर खाने वालों में ज्यादा होती है, क्योंकि यह लोग साफ-सफाई का पूरा ध्यान नहीं रखते है। ऐेसे में पत्तेदार सब्जियों को गर्म पानी में नमक मिलाकर अच्छे से धोना चाहिए, ताकि इस समस्या से बचा जा सके।इन लक्षणों का रखें ध्यान-सिर के आधे हिस्से में दर्द-कमजोरी महसूस होना-आंखों के आगे काला धब्बा नजर आना-गुस्सा या चिढ़चिढ़ापनअनहाइजीनिक खाने से दिमाग में कीड़ा पहुंच जाता है, जिससे माइग्रेन की फ्रीक्वेंसी ज्यादा हो जाती है। ऐसे में समय रहते इलाज बहुत जरूरी है। -डॉ। रवि उनियाल, केजीएमयू

Posted By: Inextlive