बाढ़ में कई कालोनियों के डूबने पर चेता प्रशासन पर नहीं हुई कार्रवाई गंगा नदी के किनारे राजघाट से अस्सी तक अवैध निर्माण

वाराणसी (ब्यूरो)वीडीए दफ्तर से मात्र सौ मीटर की दूरी पर वरुणा नदी है। नदी से 50 मीटर दायरे के अंदर नया निर्माण पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यह एरिया डूब क्षेत्र में भी आता है। बावजूद इसके इस क्षेत्र में अवैध निर्माण रफ्ता-रफ्ता चलता है। कुछ दिन पहले बाढ़ क्षेत्र का दौरा करने आए सीएम योगी आदित्यनाथ और जलमंत्री स्वतंत्र देव सिंह बड़ी संख्या में जलमग्न मकान और कालोनियों का मंजर देखकर चौंक गए थे। मौके पर मौजूद अधिकारियों से सवाल किया था कि आखिर प्रतिबंध के बावजूद कैसे बन गए मकान। किसी अधिकारी ने इसका जवाब नहीं दिया, लेकिन उनके जाने के बाद कमिश्नर, डीएम, वीडीए वीसी ने अवैध निर्माण पर खूब मंथन किया, लेकिन बाढ़ का पानी उतरते ही उनका गुस्सा भी शांत हो गया। यह सिलसिला नहीं, बल्कि बदस्तूर बन चुका है, जो त्योहार की तरह हर साल आता है.

वरुणा किनारे 774 अवैध निर्माण

वरुणा नदी से 50 मीटर दायरे में वीडीए, नगर निगम और सिंचाई विभाग की टीम ने सर्वे के बाद हरित पट्टी क्षेत्र में 774 अवैध निर्माण चिह्नित किया था। इस पर वीडीए का हथौड़ा कब चलेगाा, कौन करेगा कार्रवाई यह सवाल बनकर रह गया है। अवैध निर्माण की फाइल वीडीए कार्यालय में धूल फांक रही है। सच्चाई तो यह है कि कई अधिकारी-कर्मचारी हरित पट्टी को भूल चुके हैं। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण यानी एनजीटी की निगरानी समिति वरुणा नदी में हुए अवैध निर्माण को तोडऩे के लिए वीडीए को कई बार चेतावनी तक दे चुकी है। एनजीटी टीम आने पर फाइल को निकाला जाता है। वीडीए की कागजी घुड़दौड़ ने ही वरुणा किनारे की हरियाली रौंद दी.

लंबे समय से चल रहा खेल

मार्च 2015 में वीडीए की बोर्ड बैठक में भैंसासुर से लेकर अस्सी घाट तक करीब 16 किमी के दायरे में गंगा किनारे से दो सौ मीटर के अंदर किसी भी तरह के नये निर्माण पर रोक लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली थी। इन प्रतिबंधित एरिया में सिर्फ मकानों की मरम्मत कराई जा सकती है। इसी की आड़ लेकर प्रतिबंधित एरिया में अवैध निर्माण बिना रोक-टोक हो रहा है। आरोप है कि जोनल अधिकारी और अवर अभियंता की मिलीभगत से लोग मरम्मत की इजाजत लेकर नया निर्माण करा रहे हैं। यह खेल लंबे समय से चल रहा है.

शिकायत पर कार्रवाई, रोक नहीं

गंगा नदी के किनारे घाट से 200 मीटर के अंदर नया निर्माण पूरी तरह से प्रतिबंधित है। सिर्फ मकानों की मरम्मत कराई जा सकती है। इसके लिए भी वीडीए से परमिशन जरूरी है। यह नियम 2015 से लागू है। बावजूद इसके गंगा किनारे अवैध निर्माण धड़ल्ले से चल रहा है। शिकायत पर वीडीए की ओर से कार्रवाई होती है, लेकिन नगवां, दशाश्वमेध, भेलूपुर, चौक, कोतवाली, आदमपुर के जेई की मिलीभगत से अवैध निर्माण पर रोक नहीं लगा पा रही है.

कार्रवाई कर मांगी थी रिपोर्ट

एनजीटी की निगरानी समिति के तत्कालीन चेयरमैन डीपी सिंह ने जिला प्रशासन व वीडीए अधिकारियों संग बैठक कर एक माह के अंदर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। कार्रवाई की रिपोर्ट भेजने को कहा था लेकिन कार्रवाई फाइल से आगे नहीं बढ़ सकी। वरुणा में हरियाली के बजाय गंदगी जरूर नजर आ रही है.

हत्यारी बिल्डिंग का ध्वस्तीकरण नहीं

बांसफाटक बड़ादेव स्थित हत्यारी बिल्डिंग का ध्वस्तीकरण रुकने के कारण तरह-तरह चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार हत्यारी बिल्डिंग के मालिक ने तीन मंजिल भवन का नक्शा वीडीए में दाखिल कर दिया है। ऐसी स्थिति में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुक सकती है। इस संबंध में जब वीडीए वीसी अभिषेक गोयल से बातचीत की गई तो उन्होंने ऐसी जानकारी से मना कर दिया। कहा कि ध्वस्त करने की कार्रवाई दो या तीन दिन बाद फिर से शुरू होगी। स्थानीय दुकानदारों से बातचीत चल रही है। एक-दो दिन में निर्णय हो गया। इसके बाद ध्वस्तीकरण की फिर से शुरू होगी.

बिना नक्शा पास किसी भी कीमत पर नये भवन का निर्माण नहीं होना चाहिए। लेकिन जो मकान बन गए हैं, उसे अवैध कहकर ध्वस्त करना उचित नहीं है.

मंगीलाल

नक्शा पास कराने की प्रक्रिया सरल होनी चाहिए। ऑनलाइन होने के बावजूद तमाम ऐसी फारमेल्टी है, जिसे पूरा कराना आसान नहीं है। यही वजह है कि शहर में बिना नक्शा पास मकानों की भरमार है.

गौतम शुक्ला

वीडीए के साथ नगर निगम, पुलिस और बिजली विभाग को भी अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। इससे अवैध निर्माण पर रोक लग सकती है.

बृजेश बाबू

अवैध निर्माण गिराने से पहले संबंधित जेई पर कार्रवाई होनी चाहिए। यह तो जगजाहिर है कि पैसे लेकर वीडीए की टीम ही अवैध निर्माण कराती है.

शिवराज ओझा

वीडीए की टीम नगर निगम और सिंचाई विभाग के साथ मिलकर वरुणा किनारे अवैध निर्माण की एक बार फिर से समीक्षा करेगी। इसके बाद ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी। इसके अलावा अब किसी क्षेत्र में अवैध निर्माण की शिकायत मिलने पर जेई जिम्मेदार होंगे.

अभिषेक गोयल, वीसी

Posted By: Inextlive