वर्ष 2017 में तत्कालीन राज्य सरकार के आखिरी वक्त में उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का गठन हुआ था। उम्मीद जताई जा रही थी कि पांच सालों के भीतर दूनवासियों का मेट्रो का सपना पूरा होगा।

- 48 परसेंट लोगों का तर्क, मेट्रो के नाम पर किए जा रहे बड़े दावे, हवा-हवाई
- प्रोजेक्ट, डीपीआर, स्टडी में बीत गए करीब 7 साल, मेट्रो की एक ईंट तक नहीं लगी

देहरादून (ब्यूरो): इसी वर्ष नई सरकार आई। स्टडी के लिए विदेश तक के टूर हुए। लेकिन, करीब 7 वर्ष का समय पूरा हो गया है। अब तक मेट्रो के नाम पर एक ईंट भी नहीं लग पाई। बेशक, दिल्ली मेट्रो जैसे से लेकर केबिल कार, पॉड कार तक की प्लानिंग हो चुकी हैं। लेकिन, ये सपना कब पूरा होगा, कोई कह नहीं सकता है। हां, इतना जरूर है कि मेट्रो कॉर्पोरेशन के नाम एमडी से लेकर तमाम डायरेक्टर, अधिकारी व कार्मिकों की फौज तैनात है। हर माह लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं। इसी पर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों से राय जाननी चाही। मिली पब्लिक ओपनियन में 50 परसेंट लोगों का कहना है कि अब मेट्रो का ही ऑफिस बंद कर देना चाहिए। जबकि, 48 परसेंट लोगों ने कहा कि मेट्रो के नाम पर हो रही बातें केवल हवा-हवाई ही हैं।

पब्लिक ओपनियन परसेंटेज में
राजधानी दून में वाहनों व पॉल्यूशन बढ़ता जा रहा है। सरकार 7 सालों से मेट्रो संचालन की बात कह रही है। मेट्रो के नाम पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैैं। क्या दून में मेट्रो का सपना पूरा होगा।?
जी नहीं---11 परसेंट
उम्मीद है--26 परसेंट
हवा-हवाई--48 परसेंट
कुछ नहीं--15 परसेंट

दून के साथ कई शहरों में मेट्रो दौड़ चुकी है। दून में मेट्रो के नाम पर एक भी ईंट नहीं लग पाई। इसकी क्या वजह मानते हैं आप।?
होमवर्क की कमी--36 परसेंट
बजट का अभाव--18 परसेंट
लोगों से खिलवाड़--36 परसेंट
कुछ नहीं--9 परसेंट

मेट्रो के नाम पर कई बार मंत्री, अधिकारी करोड़ों खर्च कर विदेशों के अध्ययन को सैर कर चुके हैं। लेकिन, हाथ कुछ नहीं लगा। 7 सालों से मेट्रो कॉर्पोरेशन के नाम पर लाखों रुपए की सैलरी जा रही है।?
-विदेश की सैर जरूरी थी---25 परसेंट
-ऑफिस बंद कर देना चाहिए--50 परसेंट
-थोड़ा वक्त देना चाहिए--0 परसेंट
-कुछ नहीं--25

आबादी के साथ दून मेट्रो सिटीज की ओर बढ़ रहा है। आबादी व वाहनों के दबाव को देखते हुए क्या दून में मेट्रो का संचालन होना चाहिए। या फिर आइडिया को खत्म कर देना चाहिए।?
मेट्रो का काम जारी रहे--60 परसेंट
कोई फायदा नहीं--20 परसेंट
फायदा होगा--20 परसेंट
ऑप्शन तलाशे जाएं--0

जनवरी में भी हुई सीएस की बैठक
ज्यादा महीने नहीं हुए, जनवरी 2024 में तत्कालीन सीएस की अध्यक्षता में मेट्रो को लेकर बैठक हुई। जिसें मेट्रो की कम संभावनाओं के बीच पॉड कार को लेकर सर्वेक्षण के लिए कहा गया। जबकि, उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन क्र(यूकेएमआरसीक्र) ने दून में नियो मेट्रो को लेकर प्रस्ताव दिया था। जिसके बाद केंद्र को प्रस्ताव भेजा गया। अब तक इस पर स्थिति साफ नहीं है।

मेट्रो के नाम पर इन पर मंथन
-मेट्रो
-नियो मेट्रो
-पॉड कार
-केबिल कार
-रोपवे

यूकेएमआरसी ने दिए प्रस्ताव
-2022 करोड़ की लागत से 18 किमी रोपवे
-1778 करोड़ की लागत से 25 किमी एलिवेटेड बस रैपिड ट्रांजिट (बीआरटी)
-1753 करोड़ की लागत से 25 किमी पीआरटी

हरिद्वार पीआरटी पर भी मंथन
सरकार हरिद्वार पीआरटी संचालन पर भी तैयार थी। यूकेएमआरसी ने निविदा निकाली। लेकिन, अब तक कोई कंपनी सामने नहीं आई। अब तय किया गया है कि हरिद्वार व दून पीआरटी का निर्माण हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (हैम) के तहत करेगी। मंथन हुआ ििक सरकार डेवलपर को प्रोजेक्ट में होने वाले खर्च का 40 परसेंट पेमेंट काम शुरू होने से पहले कर देती है। बाकी 60 परसेंट डेवलपर को खुद लगानी होती है। 15 साल बाद अगर डेवलपर को घाटा हुआ तो 60 परसेंट धनराशि प्रतिवर्ष 80 से 100 करोड़ डेवलपर को लौटा देगी।

अप्रैल 2023 तक ये थी स्थिति
मेट्रो रेल कार्पोरेशन के मुताबिक नियो मेट्रो प्रोजेक्ट करीब 1900 करोड़ रुपये की थी। डीपीआर राज्य के बाद फाइनल टच देने के लिए केंद्र को भेजी गई। प्रोजेक्ट में राज्य व केंद्र 20-20 परसेंट बजट देंगे। बाकी 60 परसेंट राशि लोन से जुटाई जाएगी।

नियो मेट्रो का ये था प्रोजेक्ट
-22.42 किमी के दो कारीडोर
-दोनों कारीडोर में होंगे 25 स्टेशन।
-आईएसबीटी से गांधी पार्क 5.52 किमी
-एफआरआई से रायपुर 13.90 किमी
-नियो मेट्रो वहीं संचालित होगी, जहां की आबादी 20 लाख।
-लागत परंपरागत मेट्रो से 40 परसेंट कम।
-सड़क के डिवाइडर के भाग पर एलिवेटेड कारीडोर चलेगा।
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Posted By: Inextlive