जोशीमठ में हो रहे धंसाव को लेकर नौ युवक 14 दिन में करीब 300 किमी पैदल चलकर मंडे को देहरादून पहुंचे। इन युवाओं को जुलूस के साथ रिस्पना पुल से शहीद स्मारक ले जाया गया। शहीद स्मारक पर युवकों को सम्मानित करने के साथ ही एक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया। परिचर्चा में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् प्रो। रवि चोपड़ा जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती एक्टिविस्ट इंद्रेश मैखुरी और उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट ने हिस्सा लिया।

देहरादून (ब्यूरो)। जोशीमठ में भूधंसाव को लेकर दिसम्बर से लगातार किये जा रहे धरने के बावजूद सरकारी स्तर पर कोई आश्वासन न मिलने के बाद जोशीमठ के नौ युवकों का एक दल पहली मार्च को पैदल देहरादून के लिए रवाना हुआ। करीब 300 किमी पैदल चलकर ये मंडे को देहरादून पहुंचे। युवकों का दल रिस्पना पुल पर पहुंचा तो वहां मौजूद सैकड़ों लोगों ने जनगीतों के साथ उनका स्वागत किया। बाद में शहीद स्मारक पर इंसानियत मंच, उत्तराखंड महिला मंच, सीपीएम, एसएफआई, जन संवाद समिति सहित दर्जनों अन्य संगठनों एक सभा का आयोजन किया गया।

सरकार कर रही लापरवाही
सभा में जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने जोशीमठ में किये जा रहे आंदोलन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जोशीमठ में दरारें पडऩी नवंबर 2021 से ही शुरू हो गई थीं। दिसंबर 2022 तक पूरे जोशीमठ में दरारें नजर आने लगीं और सैकड़ों घर धंसने लगे। 24 दिसंबर को जोशीमठ में एक बड़ा प्रदर्शन किया गया।जनवरी की शुरुआत में अचानक दरारें बढऩे लगी और जमीन धंसने लगी और देश-विदेश का मीडिया जोशीमठ पहुंचा तो शासन प्रशासन सक्रिय हुआ। कुछ घोषणाएं की गई, लेकिन अब तक कोई घोषणा जमीन पर नहीं उतरी।

अब भी धंस रहा जोशीमठ
पर्यावरणविद् प्रो। रवि चोपड़ा ने कहा कि सरकार अब जोशीमठ पर बात तक नहीं कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि जोशीमठ में जमीन लगातार धंस रही है। सरकार ने जनवरी में घोषणा की थी कि दो हफ्ते में सभी प्रभावित परिवारों का पुनर्वास कर दिया जाएगा, लेकिन अब दो महीने होने को आये, पुनर्वास तो दूर सही से फौरी राहत भी लोगों को नहीं मिल पाई है। जोशीमठ में भूधंसाव के बीच अगले महीने बदरीनाथ यात्रा शुरू होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में बदरीनाथ मार्ग कई बार धंसा है। दरार वाली जगहों को मिट्टी, पत्थर, मलबे से पाट दिया जाता है, लेकिन फिर से दरारें आ जाती हैं, कुछ जगहों पर गहरे गड्ढे हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को कैसे विश्वास दिलाएगी कि उनकी यात्रा पूरी तरह से निर्विघ्न संपन्न होगी।

अधिकारी-नेता लौटे
उत्तराखंड महिला मंच के निर्मला बिष्ट कहा कि जब तक जोशीमठ में मीडिया का जमावड़ा रहा, तब तक नेता और अधिकारी भी जोशीमठ में डेरा डाले रहे, तरह-तरह की घोषणाएं करते रहे, लेकिन जोशीमठ से मीडिया के लौटते ही अधिकारी और नेता भी अपनी-अपनी मांदों में लौट गये हैं। उन्होंने कहा कि इन दिनों गैरसैंण में विधानसभा सत्र चल रहा है। सभी संगठनों और विपक्षी दलों को चाहिए कि वे इस बजट सत्र में जोशीमठ के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सरकार पर दबाव डालें और देश की संसद में भी इस गंभीर मसले पर चर्चा हो। जोशीमठ से पैदल यात्रा कर देहरादून पहुंचे युवाओं की ओर से सचिन ने अपनी 14 दिन की यात्रा के बारे में अनुभव साझा किये। जोशीमठ आंदोलन से जुड़े एक्टिविस्ट और सीपीआई एमएल के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि जोशीमठ को बचाने का एक ही रास्ता है कि तपोवन-विष्णुगाड परियोजना बना रही कंपनी एनटीपीसी को जोशीमठ से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए।

Posted By: Inextlive