बधाईयों का तांता दूल्हे राजा की खोजबीन शुरु

2019-02-24T06:00:06Z

पीसीएस रिजल्ट के बाद चला खूब चली चुहलबाजी

vikash.gupta@inext.co.in

PRAYAGRAJ: फ्राईडे को पीसीएस 2016 के फाइनल रिजल्ट में सफलता हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के लिए अब तनावपूर्ण माहौल का समय बीत चुका है। आम छात्र से ऊपर उठकर अफसर बन चुके इन अभ्यर्थियों के लिए फ्राईडे की पूरी रात और सैटरडे का दिन कुछ ऐसा रहा, जिसे शायद ही कभी ये भुला पाएं।

भइया कलेक्टर बन गइल

दिन में छात्रसंघ भवन से हालैण्ड हाल की ओर जा रही रोड पर पांच- छह की संख्या में खड़े कुछ लड़के किसी के आने का इंजतार कर रहे थे। पहले तो उनपर किसी का ध्यान नहीं गया। इस बीच एक मोटरसाईकिल पर सवार दो लड़के आते हैं। उन्हें दूर से देखते ही पहले से मौजूद लड़कों के चेहरे खिल उठते हैं। बाइक रुकती उससे पहले ही मौजूद लड़के बाइक पर पीछे बैठे लड़के की ओर तेजी से लपकते हैं। वे कुछ बोलें इससे पहले ही बाइक पर पीछे बैठा लड़का तेजी से चिल्लाता है भईया कलेक्टर बन गईल (इनका आशय डिप्टी कलेक्टर से था)। इस पर गले मिलने और एक-दूसरे को खींचने का जो दौर चलता है। उसे देख यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले और कुछ दूरी पर खड़े छात्रों का हुजूम भी समझ जाता है कि ये जनाब पीसीएस हुए हैं।

किराए के कमरे से मुक्ति तो मिली

इस बीच यूनिवर्सिटी रोड पर सफलता पाए कुछ प्रतियोगी अपने संघर्ष के दिनों की यादें ताजा करने के लिए पहुंचना नहीं भूले। यूनिवर्सिटी रोड पर पाकड़ के पेड़ के नीचे जमा ऐसी ही मंडली में कुछ चयनित छात्रों ने अपनी भावनाएं दिल खोलकर उड़ेली। इसमें एक पीसीएस ने अपने शुभचिंतक मित्र द्वारा फ्यूचर पर दागे गए सवाल पर तपाक से हाथ जोड़कर कहा भाई बहुत पढ़ लिया अब नय पढ़ना। इसपर पीसीएस में सेलेक्टेड बाकी लोग भी मुस्किया दिए। इस दौरान कुछ चर्चा संघर्ष के दिनों को लेकर छिड़ी तो किसी ने अपने हास्टल को याद किया तो किसी ने किराए के कमरे से मुक्ति पा लेने की आह भरी।

बोले पहले तो पहचानते ही नहीं थे

चर्चा के इस दौर में एक-दो ऐसे भी रहे जो अपने चाचा, दादा, पापा और कुछ दोस्तों के योगदान को याद करना नहीं भूले। एक महाशय ऐसे भी थे, जिन्हें सफलता के बाद पूर्व में विलेन साबित हुए रिश्तेदार भी खूब याद आए। बुरे दिनों में उनके दिए गए तानों को याद कर बार- बार तंज कस रहे इस शख्स ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा पहले तो पहचानते ही नहीं थे, गांव में ऐसा बिहेव करते थे मानों दस साल तैयारी करके मैने कोई पाप कर दिया। अब जब रिजल्ट आया तो ऐसे-ऐसे दूर दराज के रिश्तेदार फोन कर रहे हैं। जिन्हें वे पहचानते तक नही। भड़ास निकालते हुए बोले कि अब सब खुद को काका, बुआ और चाची बता रहे हैं।

पचास लाख की बोली तय है

पुराने दिनों से आगे निकलकर बात कुछ आगे बढ़ी तो मंडली में शामिल दो कुंवारे पीसीएस जमकर घेरे गए। मित्र मंडली में एक ने कहा गुरु अब कितने में बात बनी (इनका मतलब शादी से था)। इससे पहले कि कुछ जवाब आता दूसरे ने बीच में टोकते हुए मसखरे अंदाज में कहा भई इनका तो टेम्पो हाई है। पचास लाख की बोली तय है। इस पर कुछ शांत खड़े दूसरे कुंवारे पीसीएस भी बहुत उकसाने पर धीरे से बोले। इस पर दूसरे ने तंज कसा और बोले सही कह रहे हो आयोग तक कुंवारों के मोबाइल नम्बर हासिल करने की खोजबीन शुरू हो चुकी है।


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